कागजों में जिंदा महिला की जमा होती रही LIC किश्त, चार साल बाद मरा बता ले लिया 25 लाख रुपये का क्लेम

2020-01-22T13:15:54Z

भारतीय जीवन बीमा निगम एलआईसी में एक ऐसा फर्जीवाड़ा सामने आया है जिसे जानकर आप हैरत में पड़ जाएंगे। एक डॉक्टर ने कागजों में महिला की जिंदा दिखाकर पॉलिसी कराई और फिर उसकी मौत का सार्टिफिकेट जारी कर पैसा हड़प लिया। एलआईसी प्रबंधक ने जांच में इसका खुलासा होने पर डॉक्टर के खिलाफ एसएसपी को तहरीर दी।

कानपुर (ब्यूरो)। एलआईसी की भार्गव स्टेट शाखा में कैलाश नाथ प्रबंधक है। उनकी शाखा में आशा देवी नाम पर 25 लाख की पॉलिसी हुई थी। जिसमें चिरदीप सेन गुप्ता नॉमिनी थे। चार साल तक पॉलिसी की किश्त जमा होने के बाद 9 मई, 2017 को आशा देवी की मौत का हवाला देकर क्लेम किया गया। अफसरों ने नियम शर्तो के आधार पर चिरदीप सेन के खाते में 25 लाख रुपये ट्रांसफर कर दिया। इस बीच एलआईसी अफसरों ने एक अंजान शिकायत मिलने पर बैैंक एकाउंट के बारे में पड़ताल की तो पता चला कि यह एकाउंट फर्जी है। जिसे सिर्फ पॉलिसी के पैसे लेने के लिए खुलवाया गया था। इसके बाद अफसरों ने पॉलिसी में दर्ज आशा देवी के एड्रेस पर जाकर जानकारी की तो पता चला कि उस एड्रेस में आशा देवी नहीं रहती थी।
एक और मामला सामने आया
इस बीच एक और मामला सामने आ गया। जिसमें गीता देवी के नाम पर 25 लाख की पॉलिसी की गई थी और चार साल किश्त जमा करने के बाद गीता देवी की मौत का हवाला देकर क्लेम किया गया था। इस पॉलिसी में सौरभ गुप्ता नॉमिनी थे। इस बार अफसरों ने पहले एड्रेस पर जाकर जांच की तो पता चला कि गीता और सौरभ गुप्ता नाम का कोई भी वहां नहीं रहता है। पॉलिसी में दर्ज एड्रेस सभी जानकारियां फर्जी होने पर भुगतान रोक दिया गया।
कुंडली खंगाली तो पता चला
एलआईसी अफसरों ने दोनों मामलों की गहनता से पड़ताल की तो पता चला कि दोनों का डेथ सार्टिफिकेट ग्वालटोली निवासी डॉक्टर एसएस सिद्दीकी ने जारी किया है। जिसे संज्ञान में लेकर अफसरों ने डॉक्टर सिद्दीकी की कुंडली खंगाली तो पता चला कि सारे खेल के पीछे डॉक्टर सिद्दीकी ही है। सारे तथ्य सामने आने पर प्रबंधक कैलाश नाथ ने डीआईजी को तहरीर दी। डीआईजी अनंत देव का कहना है कि जांच कर कार्रवाई की जाएगी।
kanpur@inext.co.in


Posted By: Satyendra Kumar Singh

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