सुगम्य भारत योजना में दिव्यांगजनों का आवागमन नहीं बन पा रहा सुगम

2019-07-18T06:00:22Z

- 3 दिसम्बर 2015 में पीएम ने शुरु की थी योजना

- सरकारी इमारतों में दिव्यांगजनों के आवागमन को सुगम बनाने का था उद्देश्य

आगरा। 60 करोड़ खर्च होने के बाद भी सुगम्य भारत योजना के अन्तर्गत दिव्यांगजनों को लाभ नहीं मिल पा रहा है। 3 दिसम्बर 2015 को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने सुगम्य भारत योजना की शुरुआत की। इस योजना को शुरु करने के पीछे प्रधानमंत्री का उद्देश्य था कि सरकारी व जनोपयोगी कार्यालयों में दिव्यांगजनों का सुलभ और सुविधाजनक हो।

नहीं बने रैम्प नगर निगम में दिव्यांगजनों को होती है परेशानी

कहने को नगर निगम में सुगम्य भारत योजना के अन्तर्गत दिव्यांगों के लिए पार्किंग, शौचालय, ड्रिकिंग वाटर के होर्डिग तो लगा दिए गए हैं। लेकिन धरातल पर ये सुविधाएं उपलब्ध नहीं हैं। मेन गेट की ओर बेरीकेटिंग लगाकर एक रैम्प अवश्य बना दी गई है। इसके लिए अन्य कहीं भी कोई रैम्प नहीं है। बुधवार को पैरों से विकलांग शकीला नगर निगम में स्ट्रीट वेंडर जाने के लिए अपना पंजीकरण कराने पहुंची। पहले तो नगर निगम के कर्मचारी उस महिला को इधर-उधर टहलाते रहे। बाद में उसे फॉर्म दिया गया। शकीला ने बताया कि उसे ऊपर-नीचे जाने में बहुत बड़ी दिक्कत हुई। उस पर चला भी नहीं जा रहा है। लेकिन पेट की खातिर करना पड़ रहा है।

सुगम्य भारत योजना

सुगम्य भारत योजना का एक ही उद्देश्य था कि सरकारी दफ्तरों और जनोपयोगी कार्यालयों में उनकी पहुंच सुलभ होने के साथ सुविधाजनक हो। उनके अनुरुप ही सरकारी दफ्तरों में ऐसी व्यवस्थाएं की जाएं। इससे वे अपने जीवन को प्रगति और प्रतिष्ठा के साथ आगे बढ़ा सकें। इसका नारा दिया गया था कि ज्ञान बढ़े और काम बढ़े, दिव्यांगजनों का मान बढ़े। इसके लिए 10 निजी कंपनियों को काम सौंपा गया था। इसके लिए अलग से बेवसाइट बनाने की बात भी कही गई थी। सरकार की ओर से इन व्यवस्थाओं को दुरुस्त करने के लिए 60 करोड़ का बजट जारी किया था।

ये है दिव्यांगता के प्रकार

- दृष्टि दिव्यांगता

- वाक दिव्यांगता

- श्रवण दिव्यांगता

- अस्थि दिव्यांगता

- मानसिक दिव्यांगता

- मानसिक

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जिले में दिव्यांगों की स्थिति पर एक नजर

120117 कुल दिव्यांगजन

-67708 कुल दिव्यांग पुरुष

- 52409 कुल दिव्यांग महिलाएं

राज्य सरकार द्वारा दिव्यांगजनों के लिए संचालित योजनाएं

- दिव्यांगजनों के भरण-पोषण हेतु अनुदान

- दिव्यांगजन पेंशन योजना

- कृत्रिम अंगों के लिए मरम्मत और खरीदने की सुविधाएं

- दिव्यांगजन को शादी-विवाह प्रोत्साहन योजना

-पुनर्वासन दुकान निर्माण, दुकान संचालन हेतु योजना

- ऑपरेशन के लिए अनुदान

- नि:शुल्क यात्रा की सुविधा

स्ट्रीट वेंडर जोन की स्थिति पर एक नजर

शहर में स्ट्रीट वेंडर जोन की स्थिति में कोई प्रगति नहीं हो सकी है। चार महीने पहले बजट जारी होने के बाद भी स्ट्रीट वेन्डिंग जोन परियोजना पर काम शुरु नहीं हो सका है। शहर में स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के तहत स्ट्रीट वेन्डिंग जोन को निर्माण किया जाना था। इसके लिए कमेटी ने प्रस्ताव को पास करते हुए शुरुआत में 76 वेन्डरों को परिचय पत्र वितरित कर स्थान मुहैया कराया जाना था। इसके लिए नगर निगम के अफसरों ने स्ट्रीट वेंडरों को रजिस्ट्रेशन के लिए तिथि व स्पॉट निर्धारित कर दिए थे। इसमें ठेल, ढकेल, फुटपाथ पर अस्थाई दुकान लगाने वाले फुटकर असंगठित स्ट्रीट वेंडरों का रजिस्ट्रेशन कराया जाना था।

- 03.81 करोड़ की लागत से स्ट्रीट वेन्डिंग जोन

स्ट्रीट वेन्डिंग जोन के क्रियान्वयन की स्थिति पर एक नजर

आगरा

- 18 स्थानों का चयन

- 20067 पथ विक्रेताओं का सर्वे

-4010 पथ विक्रेताओं का रजिस्ट्रेशन

- 2307 पथ विक्रेताओं का प्रमाण पत्र वितरित किए गए

- 1106 पथ विक्रेताओं को परिचय पत्र वितरित किए गए।


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