जमीन ले ली पर अब तक मुआवजा नहीं

2014-11-15T07:01:35Z

- गंगा रेल सह सड़क पुल के दीघा इलाके के पास गुस्से में हैं लोग

- कई लोगों को नहीं मिली मुआवजे की पूरी राशि

-रेलवे 2002 के हिसाब से दे रही है मुआवजा

PATNA: गंगा रेल सह सड़क पुल के दीघा इलाके के पास अभी भी कई प्रॉब्लम्स है। पांच दिन पहले पिलर का कुआं धंसने से कई लोग मुआवजे की डिमांड कर रहे हैं। इसके अलावा इलाके के कई लोग ऐसे भी हैं, जिनकी जमीन तो ले ली गयी, पर उन्हें मुआवजा आज तक नहीं मिला है, जिन्हें मिला भी तो पूरा नहीं मिला।

बेघर भी हुए, पैसा भी नहीं मिला

बुटाई चौधरी कहते हैं कि हमारी छह डिसमिल जमीन रेलवे ने ली है। हमारे घर को भी तोड़ दिया गया। हम बेघर हो गए, लेकिन आठ महीने के बाद भी अबतक एक पाई नसीब नहीं हुआ है। बुटाई रुआंसे होकर बताते हैं कि हमें पांच बेटियां और दो लड़के हैं और सारे लोग एक ही झोपड़ी में रहते हैं। न खाने का ठीक न रहने का ठिकाना लेकिन ये रेलवे पैसा देने का नाम ही नहीं लेती है। अनिल कुमार की भी एक कट्ठा जमीन रेलवे ने ली है, लेकिन अब तक मुआवजे की बीस परसेंट राशि भी नहीं मिली है। सुमित्रा देवी को भी मुआवजे की पूरी राशि नहीं मिली है। रेलवे ने उनसे ख्भ् धुर जमीन ली है, लेकिन उन्हें ख्0 धुर का ही पैसा दिया। लोगों ने कहा कि जब मुआवजे की डिमांड करते हैं तब कहा जाता है कि फंड में पैसा नहीं है।

सभी को एक समान मुआवजा नहीं

लोकल पब्लिक का आरोप है कि रेलवे रसूख वाले लोगों को उनके जमीन की कीमत ज्याद दे रही है। वहीं गरीबों के जमीन को कम कीमत पर ले रही है। पवन ने बताया कि बिहार गवर्नमेंट की घोषणा के हिसाब से यहां की जमीन ख्7 लाख रुपए कट्ठा है, लेकिन रेलवे इससे बहुत कम कीमत पर लोगों से जमीन ले रही है। सुमित्रा देवी को उनके जमीन की कीमत क्भ् लाख रुपए कट्ठा के हिसाब से दिया गया, वहीं मालती देवी को क्फ् लाख रुपए कट्ठा के हिसाब से जमीन देने की बात कही जा रही है। लोगों ने यह आरोप भी लगाया है कि गवर्नमेंट जमीन ले रही है ख्0क्ब् में और पैसा दे रही ख्00ख् के रेट से।

आठ महीने पहले हमसे दो कट्ठा जमीन लिया गया, जिसका आज तक एक भी पाई नहीं दी गयी है। हमलोग कैसे रहते हैं, कैसे खाते हैं इससे रेलवे को क्या फर्क पड़ता है।

-मालती देवी, लोकल पब्लिक

किसके पास फरियाद करने जाएं। हम गरीब आदमी हैं कुछ कहते हैं तो पुलिस की धमकी मिलती है। हमारे पांच धुर जमीन का पैसा आजतक नहीं मिला है। पता नहीं मिलेगा या नहीं।

-सुमित्रा देवी, लोकल पब्लिक


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