लोकसभा चुनाव 2019 जानें क्या है आचार संहिता इन बातों का रखना होगा ध्यान

2019-03-11T13:10:54Z

लोकसभा चुनाव 2019 की तारीखों का ऐलान हो गया है। 11 अप्रैल से शुरू हो रहे लोकसभा चुनाव 7 चरणों में होंगे। चुनाव तारीखों के ऐलान के साथ देश में आदर्श आचार संहिता लागू हो गई है। जिसका ध्यान रखना बहुत जरूरी है। यहां जानें क्या है आचार संहिता

कानपुर। चुनाव की तारीखों का ऐलान होने के बाद चुनाव आचार संहिता लागू हो जाती है। चुनाव आचार संहिता के रूप में चुनाव आयोग द्वारा राजनीतिक दलों व उम्मीदवारों के लिए एक गाइडलाइन जारी की जाती है। इलेक्शन कमीशन ऑफ इंडिया की आधिकारिक वेबसाइट के मुताबिक आचार संहिता चुनाव आयोग के बनाए वो नियम हैं, जिनका पालन हर पार्टी और हर उम्मीदवार के लिए जरूरी है। इन नियमों का उल्लंघन करने पर सख्त सजा हो सकती है। यहां तक उम्मीदवार को चुनाव लड़ने से भी रोका जा सकता है। एफआईआर हो सकती है और उम्मीदवार को जेल जाना पड़ सकता है।
सरकार, राजनैतिक पार्टियों व उम्मीदवारों को रखना होगा इन बातों का ध्यान
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वोट हासिल करने के लिए जातिगत या सांप्रदायिक भावनाओं की कोई अपील नहीं की जा सकती।
* मस्जिदों, चर्चों, मंदिरों या अन्य पूजा स्थलों को चुनाव प्रचार के लिए मंच के रूप में इस्तेमाल नहीं किया जा सकता।
*चुनाव के दौरान कोई भी मंत्री सरकारी दौरे का इस्तेमाल चुनाव के लिए नहीं कर सकता।
*सरकारी संसाधनों का किसी भी तरह चुनाव के लिए इस्तेमाल नहीं किया जा सकता।
*यहां तक कि कोई भी सत्ताधारी नेता सरकारी वाहनों और भवनों का चुनाव के लिए इस्तेमाल नहीं कर सकता।
* केंद्र हो या प्रदेश सरकार, न तो कोई घोषणा कर सकती है, न शिलान्यास, न लोकार्पण और ना ही भूमिपूजन।
* सरकारी खर्च से ऐसा आयोजन नहीं हो सकता, जिससे किसी भी दल विशेष को लाभ पहुंचता हो।
*इस पर नजर रखने के लिए चुनाव आयोग पर्यवेक्षक नियुक्त करता है।
* सभी दलों और उम्मीदवारों को मतदान केंद्रों के 100 मीटर के भीतर प्रचार करने की परमीशन नहीं होती है।  
*कैंडीडेट और पार्टी को जुलूस निकालने या बैठक करने के लिए चुनाव आयोग से परमीशन लेनी होती है।
*सभा के स्थान व समय की पूर्व सूचना पुलिस अधिकारियों को देना होती है।
*कोई भी पार्टी या उम्मीदवार ऐसा काम नहीं कर सकती, जिससे धार्मिक या भाषाई समुदायों के बीच मतभेद बढ़े या घृणा फैले।
*मत पाने के लिए रिश्वत देना, मतदाताओं को परेशान करना, उन पर दबाव बनाना भारी पड़ सकता है।
*व्यक्तिगत व जातिगत टिप्पणियां करने पर भी चुनाव आयोग कार्रवाई कर सकता है।
*अनुमति के बिना किसी की दीवार या भूमि का उपयोग नहीं हो सकता है।
*राजनीतिक दल और उम्मीदवार यह सुनिश्चित करेंगे कि उनके समर्थक अन्य दलों द्वारा आयोजित बैठकों और जुलूसों में अवरोध पैदा न करें।
* प्रस्तावित बैठक में लाउडस्पीकर या किसी अन्य सुविधा के इस्तेमाल के लिए लाइसेंस प्राप्त करने के लिए संबंधित अधिकारी से अनुमति लेनी होगी।
* जुलूस लिए आयोजक कार्यक्रम के लि स्थानीय पुलिस अधिकारियों को अग्रिम सूचना देंगे ताकि पत्र को आवश्यक व्यवस्था करने में सक्षम बनाया जा सके।
* जिन स्थानों पर किसी अन्य पार्टी द्वारा बैठकें आयोजित हो रही हों, उनके साथ दूसरी पार्टी द्वारा जुलूस नहीं निकाले जाएंगे।
* इसके अलावा एक पार्टी द्वारा जारी किए गए पोस्टर दूसरे पार्टी के कार्यकर्ताओं द्वारा नहीं निकाले जाएंगे।
* चुनाव में मतदान के दिन और करीब 48 घंटे पहले से मतदाताओं को शराब परोसने या वितरित से बचना चाहिए।
* राजनीतिक दल व उम्मीदवार मतदान केंद्रों के पास लगाए गए शिविरों के पास अनावश्यक भीड़ इकट्ठा न होने दें।

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