गुम हुए डस्टबिन सड़कों पर गंदगी का अंबार

2019-10-17T05:45:58Z

दैनिक जागरण आई नेक्स्ट की मुहिम से जुड़ आवाज उठा रहे शहरवासी

Meerut। दैनिक जागरण आई नेक्स्ट और रेडियो सिटी की खास मुहिम बिन में फेंक के साथ अब शहरवासी भी जुड़ने लगे हैं। जगह-जगह फैले कूड़े के ढेर और गंदगी के अंबार से लोग दुखी हो गए हैं। शहर के हर गली-मोहल्ले में कूड़े से उठने वाली दुर्गध के कारण लोग परेशान हैं। यहां तक की शहर के मेन इलाके भी कूडे़ से पटे हुए हैं। सोशल मीडिया के जरिए शहरवासी मुहिम से जुड़कर न केवल सफाई की मांग कर रहे हैं बल्कि अपनी समस्याएं भी शेयर कर रहे हैं। लोगों का साफ कहना है कि शहरभर में डस्टबिन की व्यवस्था होनी चाहिए। यही नहीं लोगों का कहना है कि सफाई को लेकर कुंभकर्णी नींद सो रहे प्रशासन को भी जगाने की जरूरत है।

ये है हाल

शहर के कई इलाकों में सफाई व्यवस्था पूरी लचर हो चुकी है। यहां नालियां चोक होने के साथ ही सड़कों पर भी कूड़ा पसरा हुआ है। डस्टबिन पूरी तरह से गायब हो चुके हैं। नगर निगम और प्रशासन की लापरवाही का नतीजा आमजन को भुगतना पड़ रहा है। सड़क पर कूड़े की वजह से लोगों का आना-जाना भी दूभर हो गया है। शहर में शायद ही कोई एरिया ऐसा हो, जहां सफाई व्यवस्था दुरुस्त हो। कुछ इलाकों में डस्टबिन भी लगाएं गए थे लेकिन लगने का बाद उनका कोई अता-पता नहीं है। निगम ये सब जान-समझने के बावजूद दूसरे डस्टबिन लगाने को तैयार नहीं हैं।

बच्चा पार्क में गंदगी

बच्चा पार्क शहर की सबसे बिजी रोड़ है। पूरे शहर को एक जगह जोड़ने वाला बच्चा पार्क गंदगी से पट चुका है। यहां डस्टबिन की व्यवस्था भी की गई थी, बावजूद इसके गंदगी सड़कों पर ही पसरी हुई है। यहां आने वाले लोगों को भारी दुर्गंध का सामना करना पड़ता है।

दिल्ली रोड पर कूड़े का ढेर

जीटी रोड होने के बावजूद दिल्ली रोड़ का बुरा हाल है। यहां जगह-जगह गंदगी का अंबार आते-जाते लोगों को शहर की तस्वीर दिखाता है। कूड़ा और उससे आने वाली दुर्गध की वजह से लोगों का यहां से निकलना दूभर हो जाता है।

महताब का हाल-बेहाल

महताब सिनेमा के पास के इलाके का हाल तो बद से बदतर हो चुका है। गंदगी के अंबार ने पूरी सड़क को पाट रखा है। इसकी वजह से यहां आवारा पशुओं का भी जमावाड़ा लगा रहता है। इतना ही नहीं मछली बाजार का बचा-कुचा गंद भी यहीं डाला जाता है। जिससे यहां दिन हो या रात इतनी दुर्गध उठती है कि निकलना मुश्किल हो जाता है। आवार कुत्ते यहां झुड़ों में रहते हैं और रात के वक्त राहगीरों पर अटैक भी करते हैं।

इनका है कहना

सफाई के लिए इतना बड़ा सिस्टम है बावजूद इसके शहर गंदा है। अब जनता को ही अधिकारियों को जगाना होगा। सड़कों से डस्टबिन गायब हो चुके हैं। हम जागेंगे तभी प्रशासन भी जागेगा।

लोकेश चंद्रा

प्रशासन और अधिकारियों की काम करने व करवाने की मंशा ही नहीं हैं। जनप्रतिनिधियों का भी सफाई से कोई लेना-देना नहीं हैं। शहर को साफ करने के लिए अब आमजन को ही आगे आना होगा।

नीरज कौशिक

सफाई के नाम पर नगर निगम और प्रशासन के पास करोड़ों का बजट आता है लेकिन शहर की सूरत देखकर ही अंदाजा लगाया जा सकता है कि इस बजट का यूज कहां हो रहा है।

रोहित गुर्जर

हम सुधरेंगे तभी शहर भी सुधरेगा। हमें चाहिए कि कूड़े को डस्टबिन में ही डाले। हमें अवेयर होना होगा। इसके बाद प्रशासन को भी जागना पड़ेगा। साफ-सफाई केवल अभियानों तक ही सीमित नहीं रहनी चाहिए।

पंकज त्यागी

Posted By: Inextlive

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