जानें क्यों PhD की सीटें कम करने में जुटा एलयू प्रशासन

2019-01-17T09:48:57Z

लखनऊ यूनिवर्सिटी में इस साल पीएचडी की सीटें आधी होने जा रही हैं

- कई विभागों में आधी हो गईं हैं सीटें

- दो दर्जन के आसपास सीनियर प्रोफेसर हो रहे अगले तीन सालों में रिटायर्ड

lucknow@inext.co.in
LUCKNOW: लखनऊ यूनिवर्सिटी में इस साल पीएचडी की सीटें आधी होने जा रही हैं. वीसी की ओर से जारी नए आदेश में कहा गया है कि नए शिक्षक एक तिहाई सीटों पर ही प्रवेश ले सकेंगे. ऐसे में यूनिवर्सिटी की कुल सीटें जो वर्तमान में छह सौ से अधिक हैं घटकर तीन से चार सौ के बीच रह जाएंगी. आदेश के तहत जिस प्रोफेसर के अंडर में 8 सीटें होती हैं, वह अब पहले साल तीन को ही पीएचडी करा सकेगा. इसी तरह एसोसिएट और असिस्टेंट दो-दो को पीएचडी करा सकेंगे. यही वजह यह है कि कई विभागों की सीटें आधी हो गई हैं. अंग्रेजी विभाग में पहले पीएचडी की 60 सीटें थी, लेकिन 32 ही बन रहीं है. इसी तरह अन्य विभागों का ही यही हाल है.

तीन साल में 25 प्रोफेसर हो रहे रिटायर्ड
लखनऊ विश्वविद्यालय में इस साल कई सीनियर प्रोफेसर भी एचडी नहीं करा सकेंगे क्योंकि यूनिवर्सिटी प्रशासन के नए आदेश के मुताबिक जिन प्रोफेसर के रिटायरमेंट के तीन साल रह गए हैं वह पीएचडी नहीं करा सकेंगे. आगामी तीन साल में यूनिवर्सिटी में लगभग 25 प्रोफेसर रिटायर हो रहे हैं. ऐसे में इनके अंडर में लगभग 70 से 80 सीटें हैं जिन्हें अब शून्य कर दिया जाएगा. इस आदेश के बाद अब यूनिवर्सिटी में घमासान मच गया है. सभी प्रोफेसर इसके विरोध में आ गए हैं. पीएचडी ऑर्डिनेंस 2016 के 5.2.2 के मुताबिक यूनिवर्सिटी को प्रवेश से पहले सभी सीटें विज्ञापित करनी होंगी. जबकि यहां प्रवेश परीक्षा होने के बाद अब सीटों को कम किया जा रहा है. इसे कहीं भी चैलेंज किया जा सकता है.

कॉलेजों में आधी सीटों पर होगा पीएचडी
कॉलेजों के शिक्षक पहली बार पीएचडी कराने जा रहे हैं. ऐसे में पहले ही साल उनकी सीटें आधी हो जाएंगी क्योंकि यह नियम उनकी सीटों पर भी लागू हो रहा है.


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