Magh Purnima 2021: जानें क्या है स्नान का शुभ समय, इन चीजों का दान करने से मिलता है विशेष फल

Magh Purnima 2021 snan shubh muhurt माघ पूर्णिमा 27 फरवरी यानी आज मनाई जा रही है। यह स्नान-दान का पर्व है। इस बार माघी पूर्णिमा पर बन रहा हरिद्वार महाकुम्भ पर चतुर्थ प्रमुख शाही स्नान का योग काफी खास है। आइए जानें क्या दान करने से क्या मिलता है फल।

Updated Date: Sat, 27 Feb 2021 10:03 AM (IST)

पं राजीव शर्मा (ज्योतिषाचार्य)। माघ पूर्णिमा का धार्मिक दृष्टि से विशेष महत्व है।स्नान पर्वों का यह अंतिम प्रतीक है।इस बार दिनाँक 27 फ़रवरी 2021,शनिवार को माघी पूर्णिमा का विशेष योग बन रहा है।इस दिन सूर्योदय से मघा नक्षत्र पूर्वाह्न 11:18 बजे तक रहेगा। *सुकर्मा योगसाँय 7:37 बजे* तक रहेगा।

स्नान करने का शुभ समय
हरिद्वार के महाकुम्भ का चतुर्थ प्रमुख स्नान पर्व इस दिन माघी पूर्णिमा की पवित्र तिथि पर मनाया जाएगा। "मघा नक्षत्र" से संबंधित होने के कारण इस मास का नाम "माघ" पड़ा।इस नक्षत्र के अधिष्ठात्र देवता "पितर-गण" हैं।माघ स्नान का अनुष्ठान करने वाले के लिए यह आवश्यक है कि वह "पौष पूर्णिमा" को स्नान कर "माघ" व्रत प्रारम्भ करे और माघ पूर्णिमा को स्नान कर व्रत का समापन करे। इस स्नान का मुख्य समय अरुणोदयकाल अथार्त सूर्योदय से 1:45 मिनट पहले होगा।

क्या-क्या कर सकते हैं दान
माघ पूर्णिमा का धार्मिक दृष्टि से विशेष महत्व है।स्नान पर्वों का यह अंतिम प्रतीक है।इस पर्व में यज्ञ,तप तथा दान का विशेष महत्व है।इस दिन स्नान आदि से निवृत्त होकर भगवान विष्णु का पूजन,पितरों का श्राद्ध और भिखारियों को दान करने का विशेष फल है। निर्धनों को भोजन,वस्त्र,तिल, कंबल,गुड़,कपास,घी,लड्डू, फल,अन्न,पादुका आदि का दान करना चाहिए।ब्राह्मणों को भोजन कराने का महात्म्य व्रत करने से ही होता है।

तिल के दान का विशेष महत्व
इस दिन गंगा स्नान करने से मनुष्यों की भवबाधाएं दूर होती हैं। इस मास में काले तिलों से हवन और काले तिलों से ही पितरों का तर्पण करना चाहिए। मकर संक्रांति के समान ही तिल के दान का इस माह में विशेष महत्व है।माघ स्नान करने वाले पर भगवान माधव प्रसन्न रहते हैं तथा सुख-सैभाग्य,धन-संतान तथा स्वर्ग आदि उत्तम लोकों में निवास तथा देव विमानों में विहार का अधिकार देते हैं। यह माघ स्नान परम पुण्यशाली व्यक्ति को ही कृपा अनुग्रह से ही प्राप्त होता है। माघ स्नान का सम्पूर्ण विधान वैशाख मास के स्नान के समान ही होता है।

सूर्य को अर्ध्य देते समय इस मंत्र को बोलना चाहिए:-
"ज्योति धाम सविता प्रबल,तुमरे तेज प्रताप"
"छार-छार है जल बहै, जनम-जनम गम पाप"

Posted By: Abhishek Kumar Tiwari
This website uses cookie or similar technologies, to enhance your browsing experience and provide personalised recommendations. By continuing to use our website, you agree to our Privacy Policy  and  Cookie Policy.