नोबेल शांति पुरस्कार विजेता मलाला यूसुफजई अपने देश पाकिस्तान लौट गई हैं। तालिबानी आतंकियों द्वारा किए गए हमले के बाद मलाला छह साल बाद पहली बार पाकिस्तान पहुंची हैं। बता दें कि साल 2012 में लड़कियों के लिए शिक्षा की वकालत करने पर तालिबानी आतंकियो ने मलाला पर हमला किया था और उस वक्त उन्हें सिर पर गोली मारी थी। इस घटना के बाद मलाला पाकिस्तान छोड़ने पर मजबूर हो गई थी।


इस रास्ते से पकिस्तान लौटीं मलालामीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक मलाला गुरुवार की सुबह करीब 1:41 बजे दुबई के रास्ते पाकिस्तान के बेनजीर भुट्टो इंटरनेशनल एयरपोर्ट पहुंची। विमान से उतरने के बाद उन्हें कड़ी सुरक्षा के बीच एक स्थानीय होटल में ले जाया गया। बताया जाता है कि गोली लगने के बाद मलाला पाकिस्तान छोड़ने पर मजबूर हो गई थी और इंग्लैंड में रह रहीं थीं।चार दिनों की यात्रा पर मलालापाकिस्तानी मीडिया के अनुसार वे चार दिनों की पाकिस्तान यात्रा पर हैं। अपनी यात्रा के दौरान वह पाकिस्तानी पीएम शाहिद खक्कान अब्बासी से भी मुलाकात करेंगी। जानकारी के मुताबिक, मलाला अपने परिवार और मलाला फंड के सीईओ के साथ 'मीट द मलाला' कार्यक्रम में भी शामिल होंगी। हालांकि, सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए उनके कार्यक्रम को अभी गुप्त रखा गया है। बर्मिंघम में ही रह रही मलाला
लड़कियों की शिक्षा के अधिकार के लिए आगे आईं 20 वर्षीय मलाला पर 2012 में पाकिस्तानी तालिबानी ने हमला किया था। मलाला युसूफजई तब महज 15 साल की थीं जब तालिबान के एक बंदूकधारी ने उनके सिर में गोली मार दी थी। स्वात घाटी में उस वक्त मलाला अपने स्कूल की परीक्षा दे कर गांव वापस जा रही थीं। मलाला ने पाकिस्तान की लड़कियों को पढ़ाई के प्रति जागरूक करने की कोशिश की थी। इस हमले के तुरंत बाद उन्हें इलाज के लिए बर्मिंघम ले जाया गया और तब से वह अपने पूरे परिवार के साथ बर्मिंघम में ही रह रही हैं। यहीं से उनकी पढ़ाई और लड़कियों की शिक्षा को बढ़ावा देने का अभियान चल रहा है।मलाला का परिचय मलाला का जन्म साल 1997 में पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वाह प्रांत के स्वात जिले में हुआ था। बताया जाता है कि तालिबान ने साल 2007 से मई साल 2009 तक स्वात घाटी पर अपना कब्जा जमा लिया था। उस समय तालिबान के डर से स्थानीय लड़कियों ने स्कूल जाना बंद कर दिया। मलाला तब कक्षा आठवीं में थीं और उनका संघर्ष यहीं से शुरू हुआ। उन्हें 2014 में भारत के कैलाश सत्यार्थी के साथ संयुक्त रूप से नोबेल शांति पुरस्कार दिया गया था। उस वक्त मलाला की उम्र महज 17 साल थी और वो अब भी नोबेल शांति पुरस्कार पाने वालों की सूची में सबसेकम उम्र की विजेता हैं।

Posted By: Mukul Kumar