तो इबोला क्या बिगाडे़गा हमारा

2014-08-19T07:00:22Z

- पहले से शहर में हैं आठ से दस तरह के वायरस

- सिटी में पंद्रह दिन में मरीजों के आंकड़ों इबोला के डर को कर दिया दूर

Meerut : इबोला के खतरे से बचने के लिए भले ही अलर्ट जारी कर दिया गया हो। तमाम तरह की नसीहत भी दी जा रही हो, लेकिन सिटी में तो पहले से ही कई तरह के वायरस और खतरनाक बीमारियां पांव फैलाए हुए हैं तो एक और वायरस आने से क्या बिगड़ जाएगा। अगर गौर करें तो इससे पहले हर शहर में स्वाइन फ्लू और बर्ड फ्लू का खतरा भी बडे़ जोरो से फैला था, लेकिन धीरे-धीरे उसका असर भी खत्म हो गया। अब शायद किसी को याद हो कि इस नाम की भी कोई बीमारी थी। अब इबोला का नंबर आ रहा है, लेकिन अन्य वायरस के मुकाबले ये भी मामूली बात है।

और भी हैं वायरस

इबोला वायरस से जहां दुनियाभर में हड़कंप सा मचा हुआ है। वहीं इबोला के खतरे से बचने के लिए इंडिया में अलर्ट भी जारी कर दिया गया है। तमाम शहरों में तो इसके ट्रीटमेंट के लिए भी खास सेंटर बनाए जा चुके हैं। पर सोचने की बात तो यह है उस सिटी के लोगों का इबोला क्या बिगाड़ेगा जहां पहले से ही तमाम बड़े वायरस मौजूद हों। वायरल फीवर, डायरिया में रोटा वायरस, डेंगू में एजिल वायरस टेस्ट, बॉडी इंफेक्शन में एंटीग्रा वायरस, ज्वाइनडिस और स्वाइन फ्लू। इसके अलावा न जाने कितने ऐसे तमाम तरह के वायरस सिटी के लोगों में फैले हुए हैं। जब इतने सारे वायरस लोगों में पहले ही अपना डर बनाए हुए हैं, तो फिर इबोला वायरस का डर क्यों होगा?

क्या कहते हैं आंकड़े

अगर हम आंकड़ों की बात करें तो पिछले पंद्रह दिनों में लगभग सैकड़ों की तादाद में लोग वायरस का शिकार हो चुके हैं। सरकारी अस्पतालों के ही आंकड़ों की बात करें तो जिला अस्पताल में रोजाना औसतन क्0 से ख्0 पेशेंट वायरस का शिकार होते हैं। वहीं मेडिकल के आंकड़ों पर जाएं तो यहां रोजाना में ब्0 मरीज तो ऐसे आते ही हैं, जिनमें किसी न किसी तरह के वायरस फैलने की बीमारी होती है। अगर हम एक पैथलॉजी लैब में वायरस टेस्ट के आंकड़ों की बात करें तो सिटी की लैब पर लगभग म्0-70 मरीजों का टेस्ट तो होता ही है।

इबोला वायरस के लक्षण

इबोला एक किस्म की वायरल बीमारी ही है, जिसका संक्रमण होने पर तेज बुखार आ जाता है। शरीर के खुले अंगों से खून बहने लगता है। इसमें अन्य लक्षण जैसे कमजोरी आ जाना, मांसपेशियों में भयंकर दर्द होना और गले में खराश होना आदि है। अगर इसी तरह के लक्षण मरीज में हो तो डॉक्टर से टेस्ट करवा लेना चाहिए।

अभी तक इस तरह के मरीज तो नहीं आए हैं। फिलहाल वायरल फीवर, डायरिया और डेंगू जैसी बीमारियों के ही पेशेंट इन दिनों ज्यादा आ रहे हैं, लेकिन फिर भी किसी भी तरह की बीमारी से बचने के लिए जरुरी है केयर करना।

- डॉ। तनुराज सिरोही, फिजीशियन

इन दिनों में वायरल फीवर और डायरिया के मरीजों की संख्या बढ़ रही है। इसके अलावा डेंगू के मरीज भी आ रहे हैं। इसलिए ध्यान रखना चाहिए हल्की-फुल्की खांसी जुकाम को भी हल्के में न लें।

- डॉ। सर्वेश रस्तोगी, फिजीशियन

इन दिनों मरीजों की संख्या बहुत बढ़ रही है। जरा सी लापरवाही न जाने कितनी बड़ी बीमारी बना दे, इसलिए बीमारी कैसी भी हो, तुरंत उसका उपचार करना व सावधानी बरतना बहुत ही जरुरी है।

- डॉ। सुभाष सिंह, मेडिकल सीएमएस

यहां तो हर दिन ही कभी टाइफाइड तो कभी मलेरिया के मरीज आ रहे हैं। अभी भी इमरजेंसी वार्ड में मरीजों की संख्या बढ़ती जा रही है।

- डॉ। सहदेव कुमार वालिया, एसआईसी, जिला अस्पताल


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