पलायन रोकने को मास्टर प्लान

2017-11-06T07:00:43Z

सीएम आवास से आया राज्य को संवारने का रैबार

थल सेनाध्यक्ष सहित कई हस्तियों ने कहा, अब न हो और देर

- पलायन, पर्यावरण और पर्यटन जैसे मुद्दों पर हुई चर्चा

DEHRADUN : राज्य स्थापना दिवस समारोहों की शुरुआत रविवार का बीजापुर स्थित मुख्यमंत्री आवास में हुई। यहां हिल-मेल फाउंडेशन और राज्य सरकार के सौजन्य से आयोजित रैबार नामक कार्यक्रम में थल सेनाध्यक्ष जनरल बिपिन रावत, प्रधानमंत्री के सचिव भास्कर खुल्बे और कोस्टगार्ड के डीजी राजेन्द्र सिंह सहित कई लोगों ने उत्तरखंड के विकास संबंधी मुद्दों पर चर्चा की। चार सत्रों में पूरे दिन चले इस मंथन में पर्यावरण, पलायन और पर्यटन सहित कई मुद्दों पर चर्चा की हुई। कार्यक्रम में सीएम त्रिवेन्द्र रावत सहित कई मंत्री और राज्य के अधिकारी शामिल हुए।

रुके पलायन, मिले रोजगार

रैबार के पहले सत्र का विषय था, उत्तराखंड की पुकार, रुके पलायन मिले रोजगार था। इस विषय पर प्रधान मंत्री के सचिव भास्कर खुल्बे ने कहा कि पलायन के कारणों को जानना होगा। जिला स्तर पर पांच साल का मास्टर प्लान बनाया जाए। स्किल डेवलपमेंट के मामले में गंभीर प्रयास हों। आईएफएस अधिकारी आलोक डिमरी ने कहा कि आपदाओं के कारणों का वैज्ञानिक अध्ययन हो, अंग्रेजों के बनाए टूरिस्ट सेन्टर से आगे बढ़ें और विकास के केन्द्र में महिलाओं, बच्चों, युवाओं और गांवों को रखा जाए। पलायन आयोग के उपाध्यक्ष एसएस नेगी ने पाठ्यक्रम में टूरिज्म और हेरिटेज स्थलों को शामिल करने की जरूरत बताई। सीएम त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने कहा कि राज्य सरकार रोजगार उपलब्ध कराने का हर संभव प्रयास कर रही है।

पर्यटन और पर्यावरण पर जोर

इस विषय पर लेखिका अद्वैता काला, यू कोस्ट के डीजी राजेन्द्र डोभाल, ओएनजीसी के डायरेक्टर डीडी मिश्रा, हेस्को के अनिल जोशी और डीजीपी अनिल रतूड़ी ने विचार रखे। अद्वैता काला ने अच्छे होटल स्थापित करने की जरूरत बताई तो अनिल जोशी ने मंदिरों को रोजगार से जोड़ने और छोटी नहरों का जाल बिछाने की सलाह दी। राजेन्द्र डोभाल ने भांग और भंगजीरा की खेती को लाभप्रद बताया और कहा कि तीर्थ यात्रियों और सामान्य पर्यटकों से राज्य का भला नहीं होगा, बल्कि राज्य के पर्यटन को आयुर्वेद और पंचकर्म से जोड़ने से लाभ मिलेगा।

इंडस्ट्री, इंफ्रॉस्ट्रक्चर पर फोकस

रैबार का तीसरा सत्र ब्-आई यानी इंवेस्टमेंट, इंडस्ट्री, इंफ्रॉस्ट्रक्चर और इंफोर्मेशन पर आधारित था। इस सत्र में पतंजलि के सीईओ आचार्य बालकृष्ण, हंस फाउंडेशन के को-फाउंडर मनोज भार्गव, सीएम के स्वास्थ्य सलाहकार डॉ। नवीन बलूनी, निम के प्रधानाचार्य कर्नल अजय कोठियाल और व्यवसायी शौर्य डोभाल ने हिस्सा लिया। इस सत्र में यह बात सामने आई कि पर्वतीय क्षेत्रों में बड़े उद्योग लगाना संभव नहीं है, लेकिन छोटे उद्योग धंधे बेहतर चल सकते हैं। आचार्य बालकृष्ण ने जड़ी-बूटियों के उत्पादन पर जोर दिया और कहा कि इससे पर्वतीय क्षेत्रों की आर्थिकी मजबूत होगी।

आगे क्या हो

रैबार का चौथा और अंतिम सत्र एक तरह से सार संग्रह सत्र था। इस सत्र में थल सेनाध्यक्ष बिपिन रावत, सीएम त्रिवेन्द्र सिंह रावत, एनटीआरओ के चेयरमैन आलोक जोशी, प्रधानमंत्री के सचिव भाष्कर खुल्बे, गीतकार प्रसून जोशी और आचार्य बालकृष्ण ने हिस्सा लिया। सीएम ने भरोसा दिया कि आज इस मंथन से जो बातें सामने आई हैं, सरकार उन पर अमल करने के हर संभव प्रयास करेगी। जनरल बिपिन रावत ने कहा कि शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी पर्वतीय क्षेत्रों में पलायन का प्रमुख कारण है। उन्होंने कहा कि पर्यटन को बढ़ावा देने के साथ-साथ उत्तराखंड को अपनी संस्कृति भी बचा कर रखनी होगी। प्रसून जोशी ने कहा कि पहाड़ संघर्ष की क्षमता पैदा करता है। उन्होंने पहाड़ की मातृशक्ति को भी याद किया। आलोक जोशी ने कहा कि देश में पांच लाख साईबर सिक्योरिटी विशेषज्ञों की जरूरत है।


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