सपा से लेंगे बदला मोदी मुस्लिम विरोधी

2016-01-16T02:10:05Z

-अपने जन्मदिन पर जोशीले अंदाज में बसपा सुप्रीमो ने भरी हुंकार

- पहली बार कहा, नगदी नहीं लेंगे, चेक और ड्राफ्ट से डोनेशन स्वीकार

LUCKNOW: मौका था बसपा प्रमुख मायावती के जन्मदिन का लेकिन माहौल पूरी तरह सियासी था। जोश से लबरेज बसपा सुप्रीमो मायावती ने ऐलान किया कि इस बार सत्ता में आए तो सपा से ब्याज समेत बदला लेंगे। प्रधानमंत्री मोदी तो झूठे वादे करते हैं। मुस्लिमों के विरोधी हैं। उन्होंने यह भी कहा कि पार्टी अब किसी से नगदी नहीं लेगी। चेक और ड्राफ्ट मंजूर है। कांग्रेस के 50 साल के राज पर सवाल उठाये तो दलितों और मुस्लिमों को अपने पाले में करने के लिए सहानुभूति भरी बातें भी कहीं। कहा कि यूपी में अब सख्त सरकार चाहिए जो लोगों की हिफाजत कर सके। कार्यकर्ताओं से कहा कि इस बार बहुमत दिलाना ही मेरा असली बर्थ डे गिफ्ट होगा।

दलितों से पक्षपात

मायावती ने कहा कि सपा प्रमुख मुलायम सिंह यादव के शाही अंदाज में मने जन्मदिन व सैफई महोत्सव में करोड़ों रुपये खर्च हुए। सरकारी धन और समय का दुरुपयोग हुआ। इस बार तो सारे रिकॉर्ड ही टूट गये। जनता की इस पर पैनी नजर है। अगर लोहिया जिंदा होते तो ऐसे लोगों को समाजवादियों से लिस्ट से निकाल देते। कहा कि बसपा सरकार की योजनाओं को खत्म किया गया। स्मारकों से छेड़छाड़ की गयी। इस बार सत्ता में आए तो ब्याज समेत ऐसा बदला लेंगे कि हमेशा याद रहे। सपा सरकार में गुंडों, माफिया और अराजक तत्वों का बोलबाला है। कानून-व्यवस्था ध्वस्त हो चुकी है। गुंडा टैक्स वसूलने से जनता त्रस्त है। कार्यकर्ताओं का आहवान किया कि चुनाव में समय कम है। हर हाल में सपा को सत्ता से बाहर करना है।

अच्छे नहीं, बुरे दिन आये

बसपा सुप्रीमो ने भाजपा सरकार और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को भी निशाने पर लिया। कहा कि चुनाव जीतने के लिए झूठे वादे किये। अच्छे दिनों के बजाय बुरे दिन आ गये। वाराणसी के अलावा यूपी के लिए कुछ नहीं किया। दलितों महापुरुषों की उपेक्षा की। अंबेडकर की 125वीं जयंती पर भी कोई स्मारक बनाने की घोषणा नहीं की। केवल पूंजीपतियों के लिए काम करते है। मुस्लिमों में डर का माहौल है। बीजेपी, आरएसएस और हिंदूवादी संगठन फिर सांप्रदायिकता फैला रहे है। उन्हें खुली छूट होने से देश में अफरा-तफरी का माहौल है। बुद्धिजीवी वर्ग भी परेशान है कि कहां जाएं। तेल की कीमतें घटी लेकिन जनता को फायदा नहीं दिया। राम मंदिर का मुद्दा उठाया जा रहा है। दिल्ली और बिहार में हारने के बाद यूपी में फिर झूठे प्रलोभन देकर सत्ता में आने की कोशिश करेंगे। इससे दलित समुदाय को बचना है।

आरक्षण के सहारे चुनाव में आजमाएंगे ताकत

मायावती ने एक बार फिर आरक्षण का राग छेड़कर संकेत दिए कि पार्टी दलितों, अल्पसंख्यकों की रहनुमा बनकर चुनाव मैदान में उतरेगी। गरीबों को आर्थिक आधार पर आरक्षण देने की वकालत की। कहा कि भाजपा को प्राइवेट सेक्टर में भी आरक्षण की व्यवस्था लागू करनी चाहिए लेकिन वह तो संविधान से ही छेड़छाड़ करने में जुटी है। दलितों, मुस्लिमों और अल्पसंख्यकों के कानूनी अधिकारों में कटौती की जा रही है। कांग्रेस ने पदोन्नति में आरक्षण का विधेयक पास नहीं कराया, अब भाजपा इसे लटका रही है। यूपी की 17 पिछड़ी जातियों को भी एस-एसटी की सूची में शामिल करने की मांग की।

नगदी से परहेज, चेक से नहीं

पार्टी को मिलने वाले करोड़ों रूपये के डोनेशन पर मायावती ने कहा कि यह पार्टी के शुभचिंतकों ने इसलिए दिया ताकि उनके नेता मजबूत बने। ताज कॉरिडोर मामले में सीबीआई ने छापा मारा और सारे बैंक एकाउंट सील कर दिए। तब भी शुभचिंतकों ने मदद देना जारी रखा। अब पार्टी किसी से नगदी नहीं लेगी। केवल चेक और ड्राफ्ट के जरिए ही डोनेशन लिया जाएगा। एक-एक पैसे का हिसाब इंकम टैक्स डिपार्टमेंट को दिया जाता है। यह विरोधियों को हजम नहीं होता है इसलिए दुष्प्रचार करते है कि मैं दौलत की बेटी हूं। पार्टी अब देश के बाकी राज्यों में भी पूरे दमखम से चुनाव लड़ेगी। इस अवसर पर उन्होंने अपनी आत्मकथा ब्लू बुक के नये हिंदी व अंग्रेजी संस्करण का विमोचन किया। साथ ही, एक कैलेंडर भी जारी किया।


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