गठबंधन से मायावती का ब्रेकअप अखिलेश बोले वेलकम

2019-06-05T09:33:49Z

बसपा सुप्रीमो मायावती ने आखिरकार गठबंधन से ब्रेकअप कर लिया।

- मायावती ने अखिलेश की नेतृत्व क्षमता पर फिर उठाया सवाल
- यादव वोट न मिलने पर उपचुनाव अलग लड़ने की बताई मजबूरी

lucknow@inext.co.in
LUCKNOW : बसपा सुप्रीमो मायावती ने आखिरकार गठबंधन से ब्रेकअप कर लिया। सोमवार को नई दिल्ली में यूपी के पदाधिकारियों के साथ चुनाव की समीक्षा के दौरान सपा का वोट बैंक ट्रांसफर न होने की बात कहने वाली मायावती ने आज इस पर मुहर भी लगा दी। उन्होंने बसपा को मिली कम सीटों का ठीकरा पूरी तरह सपा पर फोड़ते हुए कहा कि चुनाव में हमें यादव वोट बैंक का फायदा नहीं मिला। इतना ही नहीं, सपा में भितरघात के चलते कई बड़े नेता भी अपनी सीट गवां बैठे। उन्होंने अखिलेश की नेतृत्व क्षमता पर फिर से एक बार सवालिया निशान भी उठा दिया तो अखिलेश यादव ने मायावती के अकेले उपचुनाव लड़ने के फैसले का वेलकम करते हुए आगे कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है।
अखिलेश और डिंपल देते हैं सम्मान
बैठक में अपने बयानों को लेकर मीडिया पर आई खबरों को लेकर मायावती ने आज विस्तार से कहा कि इसमें कोई संदेह नहीं कि जबसे बसपा व सपा का गठबंधन हुआ है, सपा प्रमुख अखिलेश यादव व उनकी पत्नी डिंपल यादव मुझे पूरा सम्मान देते है और अपना बड़ा व आदर्श मानकर मेरी बहुत इज्जत करते हैं। मैंने भी उनको अपने सभी पुराने गिले-शिकवों को भुलाकर व्यापक देश एवं जनहित में तथा अपने बड़े होने के नाते उनको अपने खुद के परिवार की तरह ही पूरा आदर-सम्मान दिया है। हमारे यह रिश्ते केवल अपने राजनीतिक स्वार्थ के लिए ही नहीं बने हैं बल्कि ये रिश्ते आगे भी हर सुख- दुख की घड़ी में हमेशा ऐसे ही बने रहेंगे। यह रिश्ते अब कभी भी खत्म होने वाले नहीं हैं।
अलग चुनाव लड़ना राजनीतिक मजबूरी
मायावती ने कहा कि बसपा का अलग उपचुनाव लड़ना राजनीतिक विवशता है। यूपी में लोकसभा चुनाव के जो परिणाम आये हैं, सपा का बेस वोट अर्थात यादव समाज अपने यादव-बाहुल्य सीटों पर भी सपा के साथ मजबूती के साथ टिका रहा। अंदरखाने किसी नाराजगी के तहत भितरघात से सपा की यादव बाहुल्य सीटों पर भी सपा के मजबूत उम्मीवारों को भी हरा दिया। ऐसे में अन्य सीटों के साथ-साथ कन्नौज में डिंपल यादव, बदायूं में धर्मेंद्र यादव व फिरोजाबाद में रामगोपाल यादव के बेटे अक्षय यादव का भी हारना अब हमें सोचने पर मजबूर करता है। इसमें ईवीएम की भी भूमिका खराब रही है। इसके बावजूद भी बसपा का बेस वोट व सपा का अपना बेस वोट जुड़ने के बाद इन सबको हारना नहीं चाहिए था।
बसपा को अपना वोट कैसे दिया
उन्होंने कहा कि ऐसी स्थिति में यह आकलन किया जा सकता है कि जब सपा का बेस वोट खुद सपा की खास सीटों पर ही छिटक गया है तो फिर इन्होंने बसपा को अपना वोट कैसे दिया होगा? गठबंधन के मकसद में भी हमें कोई खास सफलता नहीं मिल पायी है। इस बारे में सपा के कुछ लोगों में भी सुधार लाने की जरूरत है। उन्हें अपने आप में, बसपा कैडर की तरह ही किसी भी हाल में तैयार होने के साथ-साथ बीजेपी की घोर जातिवादी, सांप्रदायिक व जनविरोधी नीतियों से प्रदेश, देश व समाज को मुक्ति दिलाने के लिए कठोर संघर्ष करते रहने की सख्त जरूरत है जिसका एक अच्छा मौका सपा के लोगों ने इस बार चुनाव में गवां दिया।

काफी तैयारी की जरूरत

उन्होंने कहा कि अब आगे सपा को इसी हिसाब से तैयारी करने की जरूरत है। यदि मुझे लगेगा कि सपा प्रमुख अपने राजनीतिक कार्यों को करने के साथ-साथ अपने लोगों को मिशनरी बनाने में कामयाब हो जाते हैं, तो तब हम लोग जरूर आगे भी मिलकर साथ में चलेंगे अर्थात अभी हमारा कोई ब्रेकअप नहीं हुआ है। अगर वे किसी कारणवश इस काम में सफल नहीं हो पाते हैं, तो फिर हम लोगों का अकेले ही चलना ज्यादा बेहतर होगा। इसीलिए वर्तमान स्थिति में अब हमने यूपी में कुछ सीटों पर होने वाले उपचुनावों में फिलहाल अकेले ही यह चुनाव लड़ने का फैसला लिया है।
अकेले लड़ने का स्वागत : अखिलेश
वहीं बसपा सुप्रीमो के इस बयान पर सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने कहा कि सपा भी अब अकेले उपचुनाव लड़ने की तैयारी करेगी। अब हम पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के साथ मशविरा करके आगे की रणनीति पर फैसला करेंगे। वहीं बसपा के अलग चुनाव लड़ने के फैसले पर बोले कि अगर रास्ते अलग हुए है तो हम इसका स्वागत करते हैं। इसके अलावा सपा के राष्ट्रीय महासचिव प्रोफेसर रामगोपाल यादव ने बसपा सुप्रीमो के बयान पर कहा कि अगर यादव वोट ट्रांसफर न हुए होते तो बसपा को केवल चार सीटें ही मिलतीं।
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यह एक अवसरवादी ठगबंधन था जो अपने परिवार को बचाने और भ्रष्टाचार को छुपाने के लिए किया गया था। इस गठबंधन की न कोई दृष्टि थी, न कोई सोच और ना जनहित से लेना-देना था। मैं बसपा प्रमुख द्वारा एक जाति विशेष पर वोट न देने के आरोप की निंदा करता हूं। जनता द्वारा सपा-बसपा की जातीय राजनीति को नकारने के बावजूद बसपा प्रमुख अपनी आदतों से बाज नहीं आ रही है।
- डाॅ. महेंद्र नाथ पांडेय, भाजपा प्रदेश अध्यक्ष



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