कार्डियोलॉजी का 'कचरा' जिंदगी पर खतरा

2018-11-04T06:00:18Z

- कार्डियोलॉजी का मेडिकल वेस्ट बन रहा बवाले जान, नियमों को दरकिनार कर सीधे कूड़ाघर में फेंक रहे कचरा

-प्रॉपर डिस्पोजल के बजाए ठेकेदार निपटा रहा मेडिकल वेस्ट, अस्पताल का एमपीसीसी से कोई अनुबंध ही नहीं

KANPUR: एलपीएस इंस्टीट्यूट ऑफ कार्डियोलॉजी में हर रोज निकलने वाला खतरनाक मेडिकल वेस्ट कहीं जान का दुश्मन न बन जाए, क्योंकि रोज सैकड़ों किलो यह संक्रमित वेस्ट खुले में फेंका जाता है। नियमों को दरकिनार कर इसे कूड़ाघर में फेंक दिया जाता है। दैनिक जागरण आईनेस्क्ट ने कार्डियोलॉजी से निकलने वाले इस खतरनाक मेडिकल वेस्ट को लेकर पड़ताल की तो मेडिकल वेस्ट के जानलेवा गोरखधंधे का खुलासा हुआ। दरअसल कार्डियोलॉजी से निकलने वाले मेडिकल वेस्ट का निस्तारण कोई वेस्ट मैनेजमेंट एजेंसी नहीं बल्कि आउटसोर्सिग पर सफाई व्यवस्था देखने वाला ठेकेदार कर रहा है। जो रोज निकलने वाले संक्रमित कूड़े का भी व्यापार कर मरीजों और आम लोगों की जान खतरे में डाल रहा है।

कार्डियोलॉजी का अनुबंध नहीं

शहर के प्रमुख अस्पतालों व क्लीनिकों से निकलने वाले मेडिकल वेस्ट के निस्तारण की जिम्मेदारी मेडिकल पॉल्यूशन कंट्रोल कमेटी यानी एमपीसीसी की है। जोकि सभी अस्पतालों व क्लीनिकों से अनुबंध कर बायोमेडिकल वेस्ट का निस्तारण अपने इंसीनेटर में ले जाकर करता है। पनकी में एमपीसीसी का प्लांट लगा है। एमपीसीसी का मेडिकल कॉलेज से संबद्ध अस्पतालों समेत शहर के सभी बड़े अस्पतालों से निकलने वाले बायोमेडिकल वेस्ट के निस्तारण के लिए अनुबंध है,लेकिन एलपीएस इंस्टीटयूट ऑफ कार्डियोलॉजी के मामले में ऐसा नहीं है। बल्कि आउटसोर्सिग पर इंस्टीटयूट की सफाई व्यवस्था देखने वाला ठेकेदार बायो मेडिकल वेस्ट का निस्तारण करता है। पड़ताल में पता चला कि ठेकेदार ने ही संस्थान की तरफ से अनुबंध कर रखा है,लेकिन एमपीसीसी को वह मेडिकल वेस्ट नहीं देता। इसकी पुष्टि खुद एमपीसीसी से जुड़े अधिकारी करते हैं।

मेडिकल वेस्ट का बिजनेस

कार्डियोलॉजी से हर रोज 100 से 200 किलो बायोमेडिकल वेस्ट निकलता है, लेकिन इसका निस्तारण किसी इंसीनेटर या आटोक्लेव मशीन के जरिए किसी प्लांट में नहीं बल्कि कार्डियोलॉजी के पीछे ही खुले में किया जाता है। यहां ठेकेदार के ही कुछ लोग मेडिकल वेस्ट से सिरींज से दूसरीे संक्रमित चीजों को छांट कर अलग करते हैं। इसके बाद छांटे गए कचरे को रिक्शे चादरों व काली पॉलीथिनों में लाद कर गोल चौराहे के पास स्थित नगर निगम के कूड़ाघर में फेंक दिया जाता है। जहां एक बार फिर इस खतरनाक संक्रमित कचरे से सामान छांट कर अलग किया जाता है और इन्हें कबाड़ी और अन्य लोगों को बेचा जाता है।

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फैक्टफाइल-

- 140 बेडों की क्षमता कार्डियोलॉजी की

- ओटी, पैथोलॉजी, आईसीयू, वार्डो से निकलता है बायो मेडिकल वेस्ट

- प्रति बेड 1 किलो से 1200 ग्राम तक मेडिकल वेस्ट प्रति दिन निकलता है

- प्रति दिन 150 से 200 किलो बायोमेडिकल वेस्ट निकलता है संस्थान से

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माना कि फेंकते हैं मेिडकल वेस्ट

कार्डियोलॉजी से निकलने वाले मेडिकल वेस्ट को लेकर जब संस्थान के अधिकारियों से बात की गई तो उन्होंने माना कि गोल चौराहे के पास नगर निगम के कूड़ाघर में कुछ वेस्ट फेंका जाता है,लेकिन वह ब्लड से कंटेमनेटेड नहीं होता। उन्होंने दावा किया कि संस्थान का एमपीसीसी व नगर निगम से स्वीकृत फर्म जेटीएन से मेडिकल वेस्ट निस्तारण का अनुबंध है। मेडिकल वेस्ट को पीछे खुले में अलग किया जाता है। जिसमें ब्लड से कंटेमनेटेड चीजों को एमपीसीसी को दिया जाता है बाकी फेंक दिया जाता है।

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कितने तरह का मेडिकल वेस्ट-

बायोमेडिकल वेस्ट-

यलो कैटेगरी- हयूमन एंड एनिमल अनॉटामिकल वेस्ट, स्वाइल्ड वेस्ट, एक्सपायर्ड मेडिसिन, केमिकल वेस्ट,कंटेमनेटेड लेनिन, गाउन, मास्क,माइक्रोबायोलॉजी व बायोटेक्नोलॉजी क्लीनिकल लैब वेस्ट

रेड कैटेगरी-कंटेमिनेटेड प्लास्टिक वेस्ट

व्हाइट केटेगरी- मैटेलिक बॉडी इंप्लांट

ब्लू कैटेगरी- ग्लासवेयर

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जनरल वेस्ट- वेट वेस्ट,ड्राई वेस्ट, कंस्ट्रक्शन एंड डिमोलिशन वेस्ट

अन्य वेस्ट- रेडियो एक्टिव वेस्ट,ई वेस्ट, बैट्री

वर्जन-

बायोमेडिकल वेस्ट निस्तारण की सभी गाइडलाइन पूरी की जा रही हैं। सेग्रीग्रेशन के बाद ही नॉन ब्लड कंटेमनेटेड वेस्ट को फेंका जाता है। बाकी सारा मेडिकल वेस्ट एमपीसीसी को ही रोजाना दिया जाता है।

- डॉ.विनय कृष्णा, डॉयरेक्टर, एलपीएस इंस्टीटयूट ऑफ कार्डियोलॉजी


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