2005 में ऑस्ट्रेलिया में रेसिज्म का शिकार हुई थी पूरी अफ्रीकी टीम, दौरा छोड़कर लौटने वाली थी वापस

Updated Date: Sat, 11 Jul 2020 11:58 AM (IST)

क्रिकेट में रेसिज्म को लेकर मुद्दा काफी गरम है। कई विंडीज खिलाड़ी इसको लेकर खुलकर बोले हैं। अब इससे जुड़े पुराने किस्से भी सामने आ रहे। एक अफ्रीकी खिलाड़ी का दावा है कि ऑस्ट्रेलिया दौरे पर उन्हें रेसिज्म का शिकार होना पड़ा था। जिसके बाद टीम दौरा छोड़कर वापस आने वाली थी।


लंदन (एएनआई)। साल 2005 में साउथ अफ्रीकी टीम जब ऑस्ट्रेलिया दौरे पर गई। तब मेहमान टीम को रेसिज्म का शिकार होना पड़ा था। यह दावा है दक्षिण अफ्रीका के पूर्व बल्लेबाज एशवेल प्रिंस का। हालांकि उस वक्त अफ्रीकी टीम के कोच रहे मिकी ऑर्थर इससे अलग राय रखते हैं। पूर्व अफ्रीकी कोच मिकी आर्थर ने एशवेल प्रिंस के बयानों का खंडन किया है। ईएसपीएन क्रिकइंफो ने आर्थर के हवाले से कहा, 'हमने इसके खिलाफ एक स्टैंड बनाया। टीम प्रबंधन क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया के पास गया, जिसने सीमा पर अतिरिक्त सुरक्षा लगाई। मेरे स्मरण से टीम पूरी तरह से परेशान थी। मुझे किसी भी खिलाड़ी को यह कहते हुए याद नहीं है, 'चलो यहां से।'नस्लवाद के लिए कोई जगह नहीं
दक्षिण अफ्रीका के पूर्व कोच ने कहा, "नस्लवाद के लिए कोई जगह नहीं है। पाकिस्तान और श्रीलंका में, जो भी जाति, रंग, धर्म सबका है, सबका साथ है।" खैर ऑर्थर का बयान प्रिंस के बयान से अलग हो मगर प्रिंस अफ्रीकी टीम के सिस्टम के खिलाफ भी आवाज उठा रहे। एशवेल प्रिंस ने यह भी कहा था कि दक्षिण अफ्रीकी "सिस्टम टूट गया था", और राष्ट्रीय दस्ते का हिस्सा होने के दौरान दशक के लिए कभी कोई एकता नहीं थी। प्रिंस ने एक ट्वीट में कहा, 'प्रणाली टूट गई है और कुछ समय से हमारे प्रिय क्रिकेट साउथ अफ्रीका, ने इसको लेकर कुछ सतर्कता नहीं दिखाई है।'हम अपनी आवाज का उपयोग करेंसीएसए के कार्यवाहक सीईओ जैक्स फॉल ने एक आधिकारिक बयान में कहा, 'ब्लैक लाइव्स मैटर। यह उतना ही सरल है। 56 मिलियन से अधिक दक्षिण अफ्रीका का प्रतिनिधित्व करने वाले एक राष्ट्रीय खेल निकाय के साथ और एक मंच के मालिक होने की विशेषाधिकार प्राप्त स्थिति के साथ जितना हम करते हैं, यह महत्वपूर्ण है कि हम अपनी आवाज का उपयोग करें। साथ ही सभी प्रकार के भेदभाव वाले विषयों पर शिक्षित और दूसरों की बात सुनें।'ब्लैक लाइव्स मैटरबुधवार को इंग्लैंड और वेस्टइंडीज के क्रिकेटरों ने नस्लीयता के खिलाफ अपनी एकजुटता दिखाने और एजेस बाउल में पहले टेस्ट की शुरुआत से पहले ब्लैक लाइव्स मैटर आंदोलन का समर्थन करने के लिए घुटने टेककर मैदान में बैठे थे। तीन मैचों की टेस्ट श्रृंखला से पहले, इंग्लैंड और वेस्टइंडीज दोनों ने घोषणा की थी कि वे नस्लवाद विरोधी आंदोलन के साथ समर्थन दिखाने के लिए अपनी जर्सी पर एक ब्लैक लाइव्स मैटर लोगो लगाकर खेलेंगे।

Posted By: Abhishek Kumar Tiwari
This website uses cookie or similar technologies, to enhance your browsing experience and provide personalised recommendations. By continuing to use our website, you agree to our Privacy Policy  and  Cookie Policy.