MillennialsSpeak चाहा था जितना मिला नहीं उतना

2019-02-21T11:12:46Z

VARANASI@inext.co.in
VARANASI :
लोकसभा चुनाव को देखते हुए देश की पब्लिक इस बार ऐसी सरकार चुनना चाहती है जो वादा करे तो निभाने पर अमादा रहे। देश की राजनीति को लेकर युवाओं में काफी आस भी जगी है तो कुछ मुद्दों पर बदलाव भी चाहते हैं। इस चुनाव में निर्णायक की भूमिका निभाने वाले 18 से 38 साल आयु के भारतीय मतदाता जिन्हें हम मिलेनियल्स भी कहते हैं, वह इस बार काफी सोच विचार के बाद ही वोट करने वाला है। मुद्दों की कसौटी पर कसते हुए राजनीति में किसे वोट करना है और किसे सत्ता से बाहर रखना इसे मिलेनियल्स तय कर रहे हैं। मिलेनियल्स के कुछ मुद्दे हैं जिन्हें दैनिक जागरण आई नेक्स्ट ने मिलेनियल्स स्पीक के मंच पर टटोलने की कोशिश की। दुर्गाकुंड स्थित ब्रह्मानंद कॉलोनी में आयोजित राजनी-टी पर चर्चा करते हुए युवाओं ने ऐसी सरकार चुनने की बात कही जो शिक्षा-सुरक्षा स्वास्थ्य, चिकित्सा, किसान का ख्याल कर नौजवान को रोजगार उपलब्ध करा सके।

रोजगार मिले ताकि एजुकेशन लोन को चुका सके

गर्म चाय की प्याली थामे युवाओं ने कहा कि आज का युवा यही चाहता है कि शिक्षा खत्म होते ही उसे बेहतर रोजगार मिले ताकि एजुकेशन लोन को वह चुका सके। उबलते कड़क चाय की तरह मुद्दों पर फोकस करते हुए यंगस्टर्स अधिक से अधिक रोजगार मुहैया कराए जाने का समर्थन करते हुए ऐसी सरकार चुनने पर एकसुर में बोले जो वाकई में रोजगार से जोड़ सके। थोड़ा फ्लैसबैक में जाते हुए मौजूदा सरकार के वादे पर फोकस करते हुए युवाओं ने कहा कि अभी भी युवा नौकरी के लिए भटक रहा है। सरकारी विभागों में यदि एक चपरासी का भी वांट आता है तो उसमें बीटेक, पीएचडी धारक तक अप्लाई करने से नहीं चूकते। आखिर ऐसा क्यों हुआ? वर्तमान सरकार से बहुत उम्मीदें थी लेकिन अफसोस पूरी नहीं हो सकी। डिजिटल इंडिया की बात तो जरूर हो रही है लेकिन जब एकांउट में पैसे ही नहीं होंगे तो फिर ऐसे डिजिटल इंडिया होने का क्या मतलब? राजनी-टी पर अन्य मुद्दों पर स्टूडेंट्स ने अपनी बेबाकी से राय दी।

 

किसानों की हालत खराब

डेवलपमेंट की बात शुरू हुई तो एक स्वर में स्टूडेंट्स ने इसे स्वीकारा कि बीते कुछ सालों में रिंगरोड, बाबतपुर फोरलेन सहित कुछ चुनिंदा सड़कों की स्थिति सुधरी है। मगर, अभी अधिकतर ऐसे वार्ड, कालोनियां है जहां की सड़कें पिछले पांच साल में एक बार भी मरम्मत का मुंह नहीं देख सकी। सफाई व्यवस्था का हाल यह है कि जो प्रभावी है, सत्ता में है उसी के आसपास साफ-सफाई व्यवस्था बेहतर हुई है। राष्ट्रीय मुद्दों पर बात शुरू हुई तो किसान के एक बेटे ने कहा कि जनपदों में क्रय केंद्रों पर अन्न नहीं लिया जा रहा है। बिचौलिया हावी है, देश पर जवान और खेतों में किसान मर रहा है। सरहद पर जवान शहीद हो रहा है और सरकार सिर्फ बदला लेने का वादा ही कर रही है।

 

बुलेट ट्रेन बाद में, पहले समय सुधारें

मिलेनियल्स स्पीक के तहत स्वास्थ्य, चिकित्सा और सुरक्षा पर युवाओं ने ध्यान खींचा। उबलते चाय की तरह गर्म मिजाज से बोले कि हम सेमी हाईस्पीड और बुलेट ट्रेन चलाकर ही क्या करेंगे जब अपने यहां कि ट्रेंस लेटलतीफी का शिकार हैं। पहले वर्तमान में चल रही ट्रेनों की टाइमिंग और यात्रियों की सुरक्षा सरकार सुनिश्चित करे। उम्मीद थी तो बहुत कुछ सरकार से लेकिन उतना नहीं मिला जितना आस जगी थी। जीएसटी को लेकर व्यापारी परेशान है। दबाव में कुछ कह नहीं पा रहे हैं।

 

मेरी बात

युवाओं को बेहतर रोजगार और शिक्षा देने वाले को ही मेरा वोट जाएगा। अब समय आ गया है कि हर युवा अपनी आवाज को बुलंद करे और सोच-विचार मंथन कर अपना फैसला सुनिश्चित करे।

अमित सोनकर


कड़क मुद्दा

रोजगार के प्लेटफार्म पर सरकार की विफलता सामने आई है। सरहद पर जवान शहीद हो रहे हैं तो वहीं कर्जमाफी और क्रय केंद्रों पर हावी बिचौलियों के बीच फंसकर किसान भी खेतों में दम तोड़ रहे हैं। शिक्षा-स्वास्थ्य और सुरक्षा पर भी ठोस काम नहीं हुआ।

 

 

रोजगार देने वाले को ही मेरा समर्थन जाएगा। मौजूदा दौर में युवाओं के सामने रोजगार सबसे बड़ी चुनौती है। जॉब नहीं मिलने से तनाव में युवा हर दिन सुसाइड कर रहा है।

अश्विनी सोनकर

 

 

 

मुझे नहीं लगता कि मौजूदा सरकार भी युवाओं के लिए कुछ खास कदम उठा पाई है। स्कॉलरशिप सहित कई ऐसे मामले हैं जिसमें स्टूडेंट्स हलकान ही हुए हैं।

रिंटू पांडेय

 

 

सिर्फ आश्वासनों से युवाओं को शांत कराया जा रहा है। मगर, अब युवा शांत नहीं रहने वाले हैं। अधिक से अधिक रोजगार उपलब्ध कराने वाले को ही मेरा वोट जाएगा।

कुलदीप पांडेय

 

 

 

नोटबंदी, जीएसटी जैसे मुद्दे ने आम पब्लिक को बहुत तकलीफ दिया है। खास कर जीएसटी में नए कानून ने व्यापारी वर्ग को निराश किया है। जिससे व्यापार प्रभावित हो रहा है।

ओम शुक्ला

 

 

 

जो सरकार युवाओं का मान-सम्मान रखेगी उसे ही मेरा समर्थन जाएगा। क्योंकि हर बार युवाओं को सिर्फ हथियार बनाकर छला जाता है।

आलोक सोनकर

 

 

उसी सरकार को चुना जाएगा जो पब्लिक के साथ-साथ सरहद पर डटे वीर जवानों और किसानों की सुरक्षा के बारे में भी सोचे। मौजूदा घटनाएं सरकार के लिए चुनौती बनी हुई है।

प्रिंस सिंह


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