MillennialsSpeak जो रोजगार की देगा गारंटी उसी को देंगे वोट

2019-02-20T11:32:51Z

-युवाओं को चाहिए ऐसी सरकार, जो रोजगार देने का भरे दम

VARANASI : 2019 लोकसभा चुनाव को लेकर सरगर्मी बढ़ने लगी है। इस बार के चुनाव में भी 18 से 38 साल का युवा वर्ग अहम भूमिका निभाएगा। इन्हें हम मिलेनियल्स कह रहे हैं। ये वो यंगस्टर्स हैं जिनके पास हर मसले को परखने का अपना अलग नजरिया है। जैसे-जैसे इलेक्शन का समय करीब आ रहा है, इन मिलेनियल्स में भी चुनाव को लेकर दिलचस्पी बढ़ती जा रही है। ये अलग-अलग मुद्दों पर खुलकर बात शेयर कर रहे हैं। मिलेनियल्स के पास तमाम ऐसे मुद्दे हैं जिनको दैनिक जागरण आई नेक्स्ट ने मिलेनियल्स स्पीक के मंच के जरिए आप सभी तक पहुंचाने का प्रयास किया। मंगलवार को सिगरा स्थित वीडीए आवास पर राजनी-टी पर मिलेनियल्स ने चर्चा करते हुए ऐसी सरकार चुनने की बात कही जो उनकी अपेक्षाओं को पूरा करने का दम भर सके।

देशभर के युवा परेशान

चर्चा में शामिल सभी यंगस्टर्स ने चर्चा की शुरुआत ही ऐसे मुद्दे से की जिसको लेकर देशभर के युवा परेशान हैं। हर युवा की जुबान पर एक ही बात थी कि देश में रोजगार का टोटा है, लिहाजा अब ऐसी सरकार चाहिए जो न निकले खोटी। उन्होंने कहा कि सत्ता में आने से पहले करीब-करीब हर दल का नेता जनता से उसकी हर समस्या को पूरा करने का दम भरता है, लेकिन कुर्सी मिलते ही उसके लिए सब कुछ बस एक चुनावी जुमला बनकर रह जाता है। वर्तमान सरकार ने गद्दी संभालने से पहले करोड़ों युवाओं को रोजगार देने का सपना दिखाया था, लेकिन हुआ कुछ नहीं। इसलिए अब ऐसे सरकार नहीं चाहिए जो वादा करके मुकर जाए।


रोजगार न मिलने से कर रहा सुसाइड

 

बढ़ती बेरोजगारी को लेकर युवाओं ने कहा कि बेरोजगारों की हालत किसानों से भी बदतर हो गई है। रोजगार न मिलने से युवा आत्महत्या कर रहे है। गरीब वर्ग के युवा कड़ी मेहनत और लाखों रुपए लोन से पढ़ लिखकर खुद को इस काबिल बनाते हैं कि नौकरी मिलने पर उनके सारी समस्याएं दूर हो जाएंगी, लेकिन ऐसा नहीं हो रहा। डिग्रियां लेकर ये सड़कों पर घूम रहे हैं। एजुकेशनल लोन न अदा कर पाने पर युवा तनाव में आकर आत्म हत्या कर रहा है। जिसे रोकने वाला कोई नहीं। गवर्नमेंट सरकारी जॉब भी जेनरेट नहीं करा पा रही है। प्राइवेट नौकरी में भी न सैलरी दी जा रही है न सिक्योरिटी। अगर सरकारी जॉब मिलती दिखती भी है तो उसके लिए घूस में इतने ज्यादा रुपए मांगे जाते हैं कि उसे दे पाना ही मुश्किल होता है।

 

पलायन रोकने का नहीं हुआ इंतजाम

राजनी-टी के दौरान कई और मुद्दों पर भी चर्चा हो ही रही थी कि कुछ युवाओं ने वर्तमान सरकार को बनारस के विकास को लेकर सवालों के घेरे में ले लिया। उन्होंने कहा कि इसमें कोई दो राय नहीं है कि बनारस का विकास हो रहा है। लेकिन यह विकास बहुमुखी नहीं है। बनारस को सिर्फ रोल मॉडल के रूप में विकसित करते हुए स्मार्ट बनाया जा रहा है। लेकिन यहां सरकार यह भूल गई है कि बनारस को सूट बूट में तैयार करने की नहंी बल्कि मजबूत बनाने की जरूरत है। मतलब ये कि यहां इंडस्ट्री, फैक्ट्री, कारखाने की जरूरत है, जिस पर सरकार ने कुछ भी काम नहीं किया। इसकी कमी की वजह से शहर से युवा पलायन कर रहे हैं। नौकरी पाने के लिए इन्हें दिल्ली, मुंबई जैसे बड़े शहरों की ओर रुख करना पड़ रहा है। कोई युवा अपना शहर छोड़कर जाना नहीं चाहता, लेकिन नौकरी का इंतजाम न होने से इनकी मजबूरी बन गई है कि इन्हें अपना घर द्वार छोड़कर जाना पड़ रहा है।

 

नोटबंदी का भी रहा मुद्दा

मिलेनियल्स में शामिल युवा व्यापारियों ने वर्तमान सरकार के नोटबंदी के कदम को भी गलत ठहराया। उन्होंने कहा कि नोटबंदी से गरीब तबके को भारी नुकसान हुआ है। इसमें ऐसे लोग शामिल थे, जिन्हें कैश पर ही निर्भर रहना पड़ता था। दिहाड़ी पर कमाई करने वालों का जरा भी ध्यान नहीं रखा गया। वहीं जीएसटी की बात करते हुए युवाओं ने कहा कि इसकी वजह से व्यापार धीमा पड़ गया है। वहीं युवाओं के लिए शिक्षा, चिकित्सा भी प्रमुख मुद्दों में हैं। उन्होंने कहा कि सरकारी स्कूल और हॉस्पिटल में व्यवस्था आज भी बेहतर नहीं है। आज भी लोग मरीज की जान बचाने के लिए प्राइवेट हॉस्पिटल का सहारा ले रहे हैं। वहीं सरकारी स्कूल में भी एक्सपर्ट टीचर्स की कमी है इसकी वजह से यहां बच्चों को वो तालिम नहंी मिल रही, जो प्राइवेट स्कूलों में मिल रही है। स्वास्थ्य की बात करते हुए कुछ युवाओं ने कहा कि अगर शहर में स्वच्छता रहे तो शायद अस्पताल जाने की जरूरत ही न हो। अगर साफ सफाई ठीक रहेगा तो बीमारी दूर रहेगी।

 


मेरी बात

सरकार के लिए एक एक वोट कीमती होता है। इसलिए मैं सरकार का चुनाव काफी सोच समझकर करता हूं। इस बार वोट उसी को करूंगा जो जुमला नहीं काम करने की वकालत करेगा। युवाओं के लिए रोजगार जेनरेट की बात करेगा।

मनोज त्रिपाठी

 

कड़क मुद्दा

बनारस को स्मार्ट बनाकर यहां के धरोहरों को खत्म न किया जाए। बनारस को बनारस ही बना रहने दें। ये इतिहास के पन्नों में दर्ज वो शहर है जो सिर्फ देश ही नहीं पूरे ब्रह्मांड में जाना जाता है। अगर बनारस को स्मार्ट बनाना ही है तो सरकार नई दिल्ली की तरह नए बनारस का निमार्ण कराये। देश विदेश से लोग बनारस को देखने आते हैं, इसलिए उसे उसके मूल स्वरुप में छोड़ दें।

 

वर्तमान में युवाओं का सबसे बड़ा मुद्दा बेरोजगारी है। एजुकेशन लोन लेकर युवा पढ़ाई कर रहे हैं। लेकिन नौकरी न मिलने से ईएमआई चुक्ता नहीं कर पा रहे। ऐसे में उन्हें मौत के अलावा कोई दूसरा विकल्प नहीं दिख रहा।

अमित श्रीवास्तव

 

मेरा वोट उसी को जाएगा, जो नौकरी देने की पूरी गारंटी देगा। क्योंकि राजनीतिक पार्टियां वादा करके सत्ता में तो आ जाती हैं, लेकिन उसके बाद सब कुछ भूल जाती हैं और कहती हैं वो तो जुमला था।

अनंत सिंह

 

 

सरकार सिर्फ दिखावे पर विश्वास रख रही है। विकास के नाम पर सिर्फ वहीं काम हो जो लाइम लाइट में हो। जिस चीज की जरूरत है उस पर सरकार का जरा भी ध्यान नहीं है। अब ऐसी सरकार नहीं चलेगी।

राजीव कुमार

 

अब तक सरकार ने जो काम किया है वह सराहनीय कार्य रहा। आयुष्मान भारत, उज्ज्वला, गरीबों को आवास जैसी कई योजनाओं से लोगों को लाभ मिला है। लेकिन बेरोजगार आज भी भटक रहे हैं।

महेन्द्र मिश्रा

 

 

मेरा वोट उसी के लिए जो रोजगार को अपनी प्राथमिकता सूची में रखे। अगर सिर्फ रोजगार देने का वादा ही करना है तो हमें ऐसी सरकार की जरूरत ही नहीं है।

आरपी सिंह

 

सिर्फ बातें नहीं काम दिखना चाहिए। बनारस में इंडस्ट्री की आवश्यकता है, जिससे हर वर्ग के लोगों को काम मिल सके। सिर्फ एजुकेटेड ही नहीं लेबर क्लास भी कमाने के लिए शहर छोड़ रहा है।

सुरेन्द्र कुमार

 

 

नोटबंदी और जीएसटी लागू करना सरकार का सबसे खराब फैसला था, सरकार के इन दोनों फैसले से लोगों का बहुत नुकसान हुआ है। महिला सुरक्षा को लेकर भी ज्यादा कुछ नहीं हुआ है।

अमिताभ मिश्रा


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