MillennialsSpeak बरेली में #RaajniTEA देश की सुरक्षा की आवाज हो बुलंद एजुकेशन के लिए भी सरकार दिखाए दम

2019-02-19T11:08:22Z

आज दैनिक जागरण आईनेक्स्ट की टीम मिलेनियल्स टॉक के लिए शाहजहांपुर हाइवे पर स्थित लोट्स मैनेजमेंट कॉलेज में पहुंचेगी। यहां पर 12 बजे से डिबेट की जाएगी।
आज दैनिक जागरण आईनेक्स्ट की टीम मिलेनियल्स टॉक के लिए शाहजहांपुर हाइवे पर स्थित लोट्स मैनेजमेंट कॉलेज में पहुंचेगी। यहां पर क्ख् बजे से डिबेट की जाएगी.

BAREILLY@inext.co.in
BAREILLY:
दैनिक जागरण आई नेक्स्ट का टी-प्वाइंट डिबेट राजनी-टी मिलेनियल्स स्पीक धीरे-धीरे रफ्तार पकड़ने लगा है। इसी कड़ी में मंडे को कैंट स्थित मेजर ध्यानचंद्र स्टेडियम में प्लेयर को डिबेट में शामिल किया। प्लेयर्स ने स्पो‌र्ट्स में सुविधाएं बढ़ाने, करप्शन खत्म करने, कालाधन, आरक्षण और आतंकवाद पर जमकर आक्रोश जाहिर किया।

रोजगार के बढ़ाएं उद्योग

एजुकेशन की बात करते हुए शिवा तिवारी ने कहा कि हमारे यहां सिस्टम ऐसा है कि जो सरकारी स्कूल हैं, उनके लिए सरकार तो भरपूर रुपए खर्च कर रही हैं, पर हमारे यहां के जो शिक्षक हैं, वह पहले तो बहुत कम स्कूल आते हैं और जब कभी आते हैं तो ज्यादातर समय खाली बैठकर गुजार देते हैं। ऐसे स्कूलों से पढ़कर निकलने वाले बच्चों की नींव कमजोर होना लाजिमी है। सिस्टम से परेशान होकर ही पब्लिक अपने बच्चों को निजी स्कूल में एडमिशन कराती है, लेकिन वहां पर भी लूटमार मची है। ऐसे सिस्टम को सुधारना चाहिए।
खामियों से बढे़ बेरोजगार
देवेन्द्र ने बात को आगे बढ़ाते हुए कहा कि सिस्टम में तो खामियां हैं तभी तो आज बेरोजगारों की संख्या बढ़ रही है। जैसे-जैसे पढ़े लिखे लोगों की संख्या में वृद्धि हो रही है उसी तरह रोजगार के साधन भी बढ़े तभी काम चलेगा। शिक्षा संबंधी उद्योग लगाए जाएं या फिर पढ़े लिखे लोगों को इस तरह शिक्षा दी जानी चाहिए कि वह आत्मनिर्भर बन सके।
सिक्योरिटी पर समझौता नहीं
इसी बीच अनुज कुमार ने बेरोजगारी को ब्रेक देते हुए कहा कि इस समय देश के लिए सबसे अहम मुद्दा है आतंकवाद। हमारे जो जवान शहीद हुए हैँ उसका बदला लेना चाहिए। देश की जनता सिक्योरिटी से समझौता करने वालों को स्वीकार नहीं करेगी।
करप्शन हो खत्म
अर्पित ने अपनी बात रखते हुए कहा कि हम चाहते हैं कि करप्शन खत्म हो जाए, लेकिन वह खत्म कैसे होगा। किसी भी सरकारी ऑफिस में जाओ तो बगैर रिश्वत दिए काम नहीं होगा। क्या अफसर इसको नहीं जानते हैं। वह जानते हैं, लेकिन वह जानकर भी चुप्पी साध लेते हैं। ्रकरप्शन खत्म करना है तो सबसे पहले नीचे से ऊपर तक सिस्टम को सुधारना होगा। इसको सरकार अकेले खत्म नहीं कर सकती है। इसका अरविन्द पटेल, सौरभ गुर्जर और अभिषेक सिंह ने भी समर्थन किया।
सिर्फ फीस बढ़ी, क्वालिटी नहीं
डिबेट में सौरभ ने कहा कि प्लेयर्स के लिए सुविधाएं होनी चाहिए। साथ ही जो फीस स्टेडियम में बढ़ी है, वह कम होनी चाहिए। कई मजदूरों के बच्चे हैं, जो फीस भरने में सक्षम नहीं है, उन्हें शुल्क फ्री होना चाहिए। जो शुल्क स्टेडियम में पहले भ् सौ रुपए करीब लिया जाता था, उसमें और बढ़ोत्तरी कर दी गई। स्पो‌र्ट्स में सुधार नाम की कोई चीज नहीं दिख रही है। कोच जैसे पहले आते थे और टाइम पूरा करके चले जाते थे, वैसे हालात आज भी हैं।

 

 

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मेरी बात
यूथ के लिए एक तो क्वालिटी परक शिक्षा मिले, ताकि वह पढ़-लिखकर सिर्फ डिग्री या डिप्लोमा हासिल करके घर बैठने के जगह कुछ करने योग्य हो। हमारे यहां तो पढ़े लिखे बेरोजगारों की संख्या में लगातार बढ़ोत्तरी हो रही है। स्पो‌र्ट्स की बात रही तो इसमें और सुधार होना चाहिए। प्लेयर्स को सुविधा मुहैया कराने की जरूरत है।
शिवा तिवारी
कड़क बात
इस समय सबसे बड़ा और एक ही मुद्दा है कि जो हमारे देश के जवान शहीद हुए हैं, उन आतंकवादियों को जड़ से खत्म किया जाना चाहिए। इस तरह की कोई वारदात आतंकी दोबारा न करने पाए, क्योंकि यह देश की सिक्योरिटी का मुद्दा है। जब देश सिक्योर नहीं होगा तो हम देशवासी कहां सिक्योर होंगे। इसके लिए कोई जरूरी कदम एक बार में ही उठाना चाहिए।
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प्लेयर्स की बात
आज आरक्षण का मुद्दा इस कदर हो गया है कि हर वर्ग आरक्षण की मांग कर रहा है। आरक्षण जातिगत खत्म ही कर देना चाहिए और आर्थिक स्थिति को देखकर ही रखना चाहिए।
अनुज कुमार
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-स्टूडेंट्स पढ़-लिखकर डिग्रियां तो हासिल कर रहे हैं, लेकिन जॉब नहीं मिलने पर वह डिग्रियां सिर्फ बोझ हैं। इसके लिए सिस्टम में बदलाव हो ताकि डिग्री बोझ न बने।
अर्पित कुमार
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-एजुकेशन सिस्टम को बदलना चाहिए क्योंकि एजुकेशन अब रोजगार परक शिक्षा बनाने से ही काम चलेगा। डिग्री बांटने से अब काम नहीं चलने वाला है।
रमन यादव
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-सरकारी सिस्टम में करप्शन चरम पर है। किसी कर्मचारी से काम कराना है तो उसे बगैर पैसे के काम नहीं हो सकता है। शिकायत पर भी कार्रवाई तो होती है, सिर्फ दिखावा होता है।
सौरभ
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-शुरू में जीएसटी लांच हुई तो व्यापारियों को लगा कि यह कोई बोझ लादा जा रहा है, लेकिन अब लगता है कि इससे कहीं न कहीं करप्शन पर रोक तो लगी है। धांधली करने वालों पर नकेल लगी है।
देवेन्द्र कुमार
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-आतंकवाद के लिए सरकार को कड़ा रुख अख्त्यार करना चाहिए। इसके लिए पक्ष से लेकर विपक्ष तक सभी एकजुट है। इससे अच्छा मौका और कोई नहीं हो सकता, आंतकवाद खात्मा करने के लिए।
िवपिन कुमार
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-नोटबंदी से देश को तो फायदा हुआ है, लेकिन मुझे लगता नहीं जितना सरकार की नजर में था, उतना कालाधन वापस आया हो। इसमें भी लोगों ने जमकर लाभ लिया।
अभिषेक प्रताप सिंह
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-प्लेयर्स के लिए सरकार की तरफ से सुविधाएं बढ़ाई जाए, जिससे प्लेयर्स और अच्छा प्रदर्शन कर सके। इस समय स्पो‌र्ट्स का जो हाल है, उसे सुधारने की जरूरत है।
सौरभ गुर्जर
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