MillennialsSpeak नेता वही कहलाए जो एजुकेशन पर एक्शन में आए

2019-02-21T11:20:44Z

सर छोटूराम इंजीनियरिंग कॉलेज के हॉस्टल में राजनीति पर चर्चा

दैनिक जागरण आई नेक्स्ट की ओर से किया गया यह आयोजन

युवा बोले, एजुकेटेड नेताओं की है सख्त आवश्यकता

MEERUT@inext.co.in

MEERUT : एजुकेशन की जड़ें मजबूत नहीं होंगी तो कैसे एजुकेशन के क्षेत्र में सुधार होगा। इसके लिए बेसिक लेवल पर ही पहल करनी होगी और इस बात को वही गंभीरता से समझ सकता है, जो एजुकेशन की वैल्यू को समझता हो। इसी तरह के विचारों के साथ मिलेनियल्स ने राजनीतिक चर्चा को शुरू किया। दैनिक जागरण आई नेक्स्ट द्वारा आयोजित अब मिलेनियल्स करेंगे राजनी-टी की बात कार्यक्रम का आयोजन सर छोटूराम कैंपस के एकेटीयू ब्वॉयज हॉस्टल में किया गया। इस दौरान युवाओं ने एजुकेशन, किसान, सुरक्षा, स्कील डवलपमेंट समेत तमाम विभिन्न मुद्दों पर खुलकर अपने विचार रखे। कुछ मुद्दों पर युवा जरूर एक-दूसरे से सहमत दिखे लेकिन कुछ पर युवाओं अपने अलग-अलग विचार जोशों-खरोश के साथ सामने रखे।


पढ़े-लिखे की जरूरत

दैनिक जागरण आई नेक्स्ट द्वारा आयोजित अब मिलेनियल्स करेंगे राजनी-टी की बात कार्यक्रम में शुभम ने कहा कि समाज को एजुकेटेड नेता की सख्त जरुरत है। कारण, अगर एजुकेटेड पॉलिटिशियन नहीं होंगे तो वे कैसे समझेंगे कि समाज को कैसे आगे लेकर जाना है। वे कैसे समझेंगे कि कैसे समाज की कुरीतियों और रूढि़वादिता को दूर करना है। एक बात बताइए कि अगर आपकी सोच क्रिमनल होगी तो आपका समाज में उसी और उसी विचारधारा के तहत ही काम करेंगे और करने देंगे। गलत कामों ही बढ़ावा देंगे न। बात को आगे बढ़ाते हुए पीयूष ने कहा कि सहीं बात है, जब तक हमारे समाज का नेता पढ़ा लिखा नहीं होगा, तब तक न तो वास्तविक रुप से क्षेत्र का विकास होगा न ही समाज का। प्रदीप ने अपनी बात रखते हुए कहा कि पॉलिटिशियंश के करप्ट होने के ही ये परिणाम हैं कि यहां सरकार बदल जाती है, लेकिन पेपर लीक होने का नियम नहीं बदल पाते।

 

एजुकेशन के लेवल पर हो काम

जैसे-जैसे कार्यक्रम आगे बढ़ा वैसे-वैसे नए-नए विचार सामने आते गए। प्रशांत पटेल ने अपनी बात रखते हुए कहा कि हम लोगों में से ही पढ़-लिखकर लोग शिक्षक बनकर बेसिक एजुकेशन जैसे विभागों में आते हैं। मगर जो अपने दायित्व को नहीं निभाते, ऐसे शिक्षकों पर लगाम लगाने के लिए सरकार को कोई स्कीम बनाने की आवश्यकता है। वहीं हायर एजुकेशन में स्टूडेंट्स के लिए ऐसी स्कीम होनी चाहिए, जिससे उनको पढ़ाई के साथ ही रोजगार भी मिले ताकि वो अपना खर्च भी उठा सकें। अमृत ने अपनी बात रखते हुए कहा कि एजुकेशन टेक्नोलोजी पर फोकस करने की बहुत आवश्यकता है।

 

ये मुद्दे भी रहे चर्चा में

रोजगार नहीं मिल रहा यूथ काम की तलाश में भटक रहा है।

बेसिक से लेकर हायर एजुकेशन तक में विभागों में सरकारी शिक्षक नहीं निभा रहे अपनी ड्यूटी ईमानदारी से।

टेक्नोलॉजी ऑफ एजुकेशन पर बेहतर कार्य होने चाहिए।

पढ़ाई के साथ ही मिलने चाहिए रोजगार के अवसर।

शहरों के नाम बदलने पर भी हुई गरम चर्चा।

नेताओं की सोच उनके बैकग्राउंड पर निर्भर करती है।

आतंकवाद का सफाया करना है बहुत जरुरी।

महिला सुरक्षा को लेकर होने चाहिए बड़े फैसले।

किसानों के लिए होना चाहिए काम, उनको मिलना चाहिए उनकी फसल का सही दाम

हर सरकार में पिस रही है केवल मीडिल क्लास।

अगर शहीदों को न्याय नहीं मिलता तो वोट नोटा को जाएगा।

धारा-370 को हटाने की भी की युवाओं ने मांग।

 

कड़क मुद्दा

कार्यक्रम में चर्चा के दौरान सबसे कड़क मुद्दा शहरों का सरकार द्वारा नाम बदलना रहा। जिसके विरोध में बात करते हुए अमृत ने कहा कि केवल संतों की तरह गाय गोबर की बातें करना और शहरों का नाम बदलकर खुश होने वाली सरकार नहीं चाहिए। वहीं बात को काटते हुए प्रशांत ने कहा कि देश के विभिन्न शहरों को औरंगजेब जैसी सोच वालों ने लूटा व अपने फिजूल के हक जमाने के लिए नाम बदल दिए। अब सरकार का शहरों को उनके पुराने नाम वापस लौटाने का मकसद ये है कि आने वाली पीढ़ी उसका इतिहास पढ़े जो हकीकत में है। उनको भी शहरों के नाम से जुड़ी कहानियों की जानकारी होनी चाहिए। वहीं बात को काटते हुए पीयूष ने कहा कि नाम बदलने के लिए इतने मोटे बजट खर्च करने की जरुरत नहीं है, जितना मौजूदा सरकार ने किया। पीयूष का जवाब देते हुए चंदन ने कहा कि आज मौजूदा सरकार ने इलाहाबाद का नाम प्रयागराज कर वहां कुंभ का आयोजन किया, जिससे करोड़ों रूपये का मुनाफा हुआ। ये पूरे देश के लिए फायदे का सौदा है।

 

मेरी बात

मेरे हिसाब से मौजूदा सरकार बहुत कुछ बेहतर कर रही है। आगे भी उम्मीदें है कि सब कुछ बेहतर होने वाला है। मेरी केवल यही मांग है देश के शहीदों को न्याय मिले, इसके अलावा एजुकेशन स्तर को सुधारने के लिए शिक्षकों को जागरुक करने की आवश्यकता है। इसके साथ ही हायर एजुकेशन में पढ़ाई के साथ ही रोजगार उपलब्ध कराने के लिए सरकार को कड़े कदम उठाने चाहिए, मेरा वोट उसी सरकार को जाएगा, जो युवाओं के लिए बेहतर प्रयास करेगा।

प्रशांत पटेल

 

टेक्नोलोजी ऑफ एजुकेशन के लिए बेहतर प्रयास करने वाली सरकार चाहिए, केवल साधु संत की बाते करने वाली सरकार नहीं चाहिए।

अमृत यादव

 

किसान, युवा, गरीब के हक में काम करने वाली सरकार चाहिए। सरकार कोई भी पेपर लीक करने वाली सरकार नहीं चाहिए।

प्रदीप

 

एम्प्लॉयमेंट एवं एजुकेशन के मुद्दे पर काम करने वाली सरकार चाहिए। इसको केवल वहीं समझ सकता है जो खुद पढ़ा लिखा हो।

शुभम सिंह

 

केवल वादे करने वाली सरकार नहीं चाहिए, क्योंकि हर सरकार पहले वादे करती है फिर बिना वादे पूरे किए पांच साल गायब रहती है।

विकास

 

धारा-370 को हटाने वाली सरकार चाहिए, अगर धारा-370 नहीं हटाई जाएगी, तो मेरा वोट नोटा को जाएगा।

पीयूष

 

मैं तो केवल उसी को वोट करुंगा, जो जमीनी हकीकत पर देश की सुरक्षा पर काम करेगा। साथ ही जो युवाओं के बार में सोचेगा।

मुजाबिर

 

पेपर लीक करने वाली और क्रप्शन वाली सरकार नहीं चाहिए। मुझे साफ-सुथरी काम करने वाली सरकार चाहिए।

बाबूलाल

 

मीडिल क्लास के हित में जमीनी हकीकत पर काम करने वाली सरकार चाहिए। हमेशा हर सरकार में केवल मीडिल क्लास ही पिसती है।

चंदन


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