सिटी में बसों में बढ़ा किराया, नहीं बढ़ी सुविधाएं

2020-01-18T05:46:24Z

-सिटी बसों में पहले मिनिमम फेयर 7 रूपये था। अब हुआ 10 रुपये

-सुविधाओं में नहीं हुआ कोई सुधार

आगरा। रोडवेज बसों में किराया बढ़ने के बाद अब सिटी बसों में भी किराया बढ़ गया है। मिनीमम फेयर सात रुपये से बढ़कर दस रुपये हो गया है। लेकिन सुविधाओं की बात की जाए तो इसमें कोई चेंज नहीं आया है। पहले भी सिटी बस में यात्रा करने के लिए लोगों को जूझना पड़ता था। अब भी यहीं हाल है। अभी भी वहीं खटारा बसें सिटी की सड़कों पर दौड़ रही हैं। जो कभी भी किसी हादसे को दावत दे सकती हैं। इन बसों में न तो सुरक्षा के कोई इंतजाम हैं और न हीं ठीक से बैठने के लिए सीट हैं। हालत ये है कि कई बसों में सीटे टूटू पड़ी है। सिटी बसों में सीटों के कवर फट चुके हैं। यहां तक कि खड़े होने पर जिस हैंडल को पकड़ा जाता है, वो भी अब इन बसों से गायब हो गए हैं। आलम ये है कि बस में सफर करते टाइम खडे़ हुए लोग ब्रेक लगने पर एक-दूसरे पर गिर पड़ते हैं। इन बसों में सफर करना हादसों को दावत देने के समान है।

महिलाओं के लिए नहीं हैं सुरक्षित

सिटी की सड़कों पर दौड़ने वाले बसें महिलाओं के लिए बिल्कुल सुरक्षित नहीं है। बसों में लोगों को रूई की तरह ठूंस-ठूंस कर भर दिया जाता है। ऐसे में महिलाओं को खासी समस्या होती है। महिलाओं के लिए रिजर्व सीटों पर भी पुरूष अपना कब्जा जमाए बैठे रहते हैं। महिलाओं के लिए ऐसे में असुरक्षा का भाव आता है। सिटी बसों में इतनी भीड़ रहती है कि सीनियर सिटीजंस के लिए तो इसमें सफर करना पहाड़ चढ़ने के समान है। इतनी भीड़ में सीनियर सिटीजंस को बस में चढ़ने और उतरने में काफी मशक्कत करनी पड़ती है।

टिकट नहीं देते कंडक्टर

सिटी बस में सफर करने वाले कुछ यात्रियों ने बताया कि वे पैसे तो देते हैं लेकिन इसके बदले उन्हें टिकट नहीं मिलती है। कंडक्टर टिकट देने में खेल करते हैं। वे भीड़ का फायदा उठाकर पैसे तो ले लेते हैं लेकिन टिकट नहीं देते हैं। टिकट के लिए कई बार कहना पड़ता है। इसके बाद वे टिकट देते हैं। कुछ लोगों से कम किराया लेकर उन्हें बिना टिकट भी सफर करने देते हैं। इससे विभाग को राजस्व का चूना लगता है।

ओवरलोड हो जाती हैं बसें

एमजी रोड पर चल रही सिटी बसों का आलम ये है कि ये भगवान टाकीज से चलती हैं और संजय प्लेस तक जाते-जाते ओवरलोड हो जाती हैं। अपने गंतव्य के लिए लेट हो रहे लोगों के पास एमजी रोड पर कोई दूसरा ऑप्शन भी नहीं है। इस कारण लोगों को बसों में लटककर भी जाना पड़ता है।

Posted By: Inextlive

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