मोबाइल हो गया नशा

2019-07-18T06:00:59Z

-काल्विन हॉस्पिटल में खुले मोबाइल नशामुक्ति केन्द्र में आ रहे हैं मोबाइल एडिक्शन के केसेज

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केस-1

गाजियाबाद के प्राइवेट इंजीनियरिंग कॉलेज में पढ़ने वाली दिव्याभा तीन दिन से खाना नहीं खा रही। उसकी जिद है पैरेंट्स आई फोन खरीदकर दें। इससे हैरान माता-पिता ने मोबाइल नशा मुक्ति केंद्र में दस्तक दी। डॉक्टर की काउंसिलिंग से फिलहाल स्टूडेंट ने जिद छोड़ दी है।

केस-2

12वीं में पढ़ने वाले रोचक के मा‌र्क्स इस साल काफी कम आए हैं। वह रोजाना 18 घंटे तक मोबाइल पर गेम खेलता है। इस चक्कर में उसका खाना-पीना और सोना डिस्टर्ब हो गया है। वह कॉलेज भी नहीं जाना चाहता है।

केस-3

6वीं क्लास में पढ़ने वाला मयंक मोबाइल के पीछे दीवाना हो चुका है। उसे थोड़ी-थोड़ी देर में मोबाइल नहीं मिले तो नाराजगी जाहिर कर देता है। खाना छोड़ देना, सामान फेंकना या मारपीट करना उसके लिए आम बात है।

केस-4

क्लास टेंथ में पढ़ने वाले इमरान के माता-पिता काफी टेंशन में हैं। उन्होंने एक दिन बेटे को मोबाइल फोन पर पोर्न देखते पकड़ लिया। नाराज होकर उन्होंने मोबाइल छीन लिया तो इमरान ने बवाल शुारू कर दिया। वह दोबारा मोबाइल पाना चाहता है

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vineet.tiwari@inext.co.in

PRAYAGRAJ: चौंकनेकी जरूरत नहीं। काल्विन हॉस्पिटल में खोले गए मोबाइल नशा मुक्ति केंद्र में ऐसे केसेज की लाइन लगी हुई है। बच्चों और टीनएजर्स के पैरेंट्स परेशान हो चुके हैं। वह चाहते हैं कि बच्चे मोबाइल से दूर हो जाएं। वजह, मोबाइल अब जरूरत से बढ़कर नशा हो चुका है।

दो तरह की थेरेपी से होगा इलाज

मोबाइल के इस नशे से परेशान मरीजों का केन्द्र में दो तरह से इलाज किया जाना है। अगर मरीज मोबाइल फोन की लत से परेशान है तो उसे साइको थेरेपी के जरिए इससे दूरी बनाने के तरीके बताए जाएंगे। फोन चलाने से अगर मरीज की आंख में सूखापन आ गया है। गर्दन, कान सहित हाथों में तकलीफ हो रही है तो उसका फारमो थेरेपी से दवाओं से इलाज किया जाएगा।

पूरे प्रदेश में लागू हुआ अभियान

मोबाइल एडिक्शन से छुटकारा दिलाने के लिए प्रयागराज के स्वास्थ्य विभाग द्वारा शुरू किए गए मोबाइल नशा मुक्ति अभियान को पूरे प्रदेश में लागू किए जाने की मंजूरी दे दी गई है। इसके लिए शासन से जारी आदेश में प्रत्येक जिले में यह केंद्र खोले जाने को कहा गया है। खुद शासन ने माना है कि अधिक मोबाइल के प्रयोग से कई तरह के साइड इफेक्ट सामने आ रहे हैं। साथ ही प्रयागराज के एनसीडी सेल के इस कदम को भी सराहा गया है।

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यह हैं मोबाइल के नुकसान

-अधिक मोबाइल फोन चलाने से बहरापन और गर्दन और कंधे की मांसपेशियों में खिंचाव आ सकता है।

-देर रात तक बात करने से अनिद्रा की शिकायत भी सामने आ रही है।

-लगातार आंखों को मोबाइल स्क्रीन पर जमाए रखने से ड्राई आई की प्रॉब्लम हो रही है।

- मोबाइल से निकलने वाले रेडियो एक्टिव किरणों से शरीर में विभिन्न प्रकार के कैंसर की संभावना बढ़ जाती है।

-मोबाइल पर पोर्न देखने से युवाओं के दिमाग में अश्लील विकृति का विकास होता है। इससे ग्रोथ रुक जाती है।

-मोबाइल पर ब्लू व्हेल सहित तमाम ऐसे गेम्स हैं, जिन्हें खेलने से आत्महत्या की प्रवृत्ति प्रबल होती है।

-मोबाइल फोन छीन लिए जाने से बच्चों द्वारा माता-पिता पर हमला करने या आक्रामकता के मामले भी बढ़ रहे हैं।

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मोबाइल फोन यूजर्स से जुड़े फैक्ट

50 करोड़ हो गई है देश में इंटरनेट डेटा सब्क्राइबर्स की संख्या

94 फीसदी घट गए हैं इंटरनेट के दाम।

8.8 जीबी प्रति व्यक्ति प्रति माह एवरेज डेटा यूज

03 गुना अधिक डेटा यूज कर रहे हैं इंडियंस अमेरिकंस के मुकाबले

वर्जन

केंद्र खुलने के पहले दिन ही मोबाइल एडिक्शन से जूझ रहे मरीजों की संख्या अच्छी खासी थी। मामले भी काफी गंभीर थे। पैरेंट्स अपने बच्चों को मोबाइल फोन से दूर रखना चाहते हैं। इसके लिए हम अलग-अलग थेरेपी मुहैया करा रहे हैं।

-डॉ। राकेश पासवान, मनोचिकित्सक, नशामुक्ति केंद्र काल्विन हॉस्पिटल

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काल्विन हॉस्पिटल में हमारी जिला मानसिक रोग टीम द्वारा मोबाइल फोन से छुटकारा दिलाने के लिए नशा मुक्ति केंद्र चलाया जा रहा है। हमारी इस पहल को शासन ने पूरे प्रदेश में लागू किया है। यह हमारे लिए गर्व का विषय है।

-डॉ वीके मिश्रा, नोडल, एनसीडी सेल प्रयागराज


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