मोरारजी देसाई इंदिरा गांधी के पीएम बनने पर विरोध किया तो कांग्रेस से निकाले गए बाद में बने पीएम

2019-04-09T16:45:29Z

स्वतंत्रता सेनानी मोरारजी देसाई आज बेशक इस दुनिया में नहीं है लेकिन उनके पीएम बनने के पीछे कई रोचक किस्से लाेगों की जुबां पर हैं। उन्होंने इंदिरा गांधी के पीएम बनने पर विरोध किया था और बाद में खुद पीएम बने थे। आइए आज उनकी पुण्यतिथि पर जानें उनके पीएम बनने का ये सफर

कानपुर। स्वतंत्रता सेनानी मोरारजी देसाई 24 मार्च, 1977 से 28 जुलाई, 1979 तक भारत के प्रधानमंत्री रहे थे। जिस समय वह प्रधानमंत्री बने थे उस समय उनकी करीब 81 वर्ष थी। भारत सरकार की एक आधिकारिक वेबसाइट के मुताबिक मोरारजी देसाई का जन्म गुजरात के भदेली गांव में 29 फरवरी, 1896 को हुआ था। उनके पिता टीचर थे और। पिता के आचरणों को अपनाते हुए मोरार जी देसाई बचपन से ही कड़ी मेहनत करने एवं सच्चाई के मार्ग पर चलने लगे थे। मोरार जी देसाई ने 1918 में स्नातक करके बारह वर्षों तक डिप्टी कलेक्टर के रूप में कार्य किया।

मोरार जी ने 1931 में अखिल भारतीय कांग्रेस समिति ज्वाॅइन की थी
मोरार जी देसाई 1930 में महात्मा गांधी द्वारा किए जा रहे आजादी के संघर्ष में शामिल हुए। इस दाैरान वह तीन बार जेल गए थे। मोरार जी ने 1931 में अखिल भारतीय कांग्रेस समिति ज्वाॅइन की थी और यह 1937 तक गुजरात प्रदेश कांग्रेस कमेटी के सचिव रहे। वह राजस्व, कृषि, वन एवं सहकारिता मंत्रालय के मंत्री भी बने थे। इसके अलावा वह 1967 में इंदिरा गांधी के मंत्रिमंडल में उप-प्रधानमंत्री एवं वित्त मंत्रालय के प्रभारी मंत्री भी थे। लंबे समय तक कांग्रेस पार्टी में रहने वाले मोरार जी देसाई को बाद में कांग्रेस में मतभेदों के चलते पार्टी छोड़नी पड़ी थी।

नेहरू की मौत के बाद इंदिरा को पीएम बनाए जाने का विरोध किया था

मोरारजी देसाई ही थे जिन्होंने पंडित जवाहर लाल नेहरू की मौत के बाद इंदिरा को प्रधानमंत्री बनाए जाने का विरोध किया था। वहीं पार्टी में लगातार अंदरूनी कलह चल रही थी। जुलाई 1969 में श्रीमती गांधी ने उनसे वित्त मंत्रालय का प्रभार वापस ले लिया। इस पर मोरार जी देसाई ने कहा था कि बेशक प्रधानमंत्री के पास विभागों को बदलने का अधिकार है लेकिन उन्होंंने परामर्श करने का शिष्टाचार भी नहीं दिखाया। इससे उनसे आत्मसम्मान को ठेस पहुंची हैं। इसके बाद उनके पास उप-प्रधानमंत्री पद से इस्तीफा देने के अलावा कोई दूसरा विकल्प नहीं था।
पाॅलिटिकल किस्सा : जब कांग्रेस का हुआ बंटवारा
24 मार्च 1977 को मोरारजी देसाई ने प्रधानमंत्री के रूप में शपथ ली
वहीं कांग्रेस ने मोरारजी देसाई 12 नवंबर 1969 को उन्हें पार्टी से निकाल दिया। इस घटना ने कांग्रेस को दो भागों में बंट गई थी।1975 में देश इमरजेंसी लगने के बाद वह कुछ राजनीतिक गतिविधियों की वजह से गिरफ्तार भी हुए थे। इसके बाद वह जनता पार्टी में शामिल हो गए थे। 1977 के आम चुनाव में जनता पार्टी की जीत में उनकी खास भूमिका थी। वह गुजरात के सूरत निर्वाचन क्षेत्र से लोकसभा के लिए चुने गए थे। 24 मार्च, 1977 को उन्होंने भारत के प्रधानमंत्री के रूप में शपथ ली। वहीं 10 अप्रैल, 1995 को मोरारजी देसाई दुनिया को अलविदा कह गए थे।



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