यंगस्टर्स को भी शिकार बनाने लगा ब्रेन स्ट्रोक

2018-12-21T06:00:45Z

- जिले में डेली आते 40 से 50 केस, 40 से कम उम्र के 30 प्रतिशत पेशेंट

- ठंड के दिनों में दो गुना रहता खतरा, बरतें सावधानी

GORAKHPUR: ब्रेन स्ट्रोक अब बुजुर्गो को ही अपनी चपेट में नहीं ले रहा बल्कि यंगस्टर भी बड़ी संख्या में इसके शिकार हो रहे हैं। ब्रेन स्ट्रोक के केसेज में 30 प्रतिशत ऐसे पेशेंट होते हैं जिनकी उम्र 40 साल से कम है। इंडियन एकेडमी ऑफ न्यूरोलॉजी जर्नल के इसी वर्ष के जनवरी-मार्च अंक में फिफ्टी ईयर्स ऑफ स्ट्रोक रिसर्च इन इंडिया शीर्षक से प्रकाशित रिसर्च पेपर में ये बात सामने आई है। गोरखपुर की बात करें तो यहां भी डेली आने वाले 40 से 50 ब्रेन स्ट्रोक के केसेज में करीब 30 प्रतिशत युवा पेशेंट ही होते हैं। न्यूरो सर्जन डॉ। मुकेश शुक्ला बताते हैं कि साल दर साल युवाओं को ब्रेन स्ट्रोक के केसेज बढ़ते ही जा रहे हैं जो काफी चिंताजनक है। ठंड के दिनों में ब्रेन स्ट्रोक का खतरा गर्मियों की अपेक्षा लगभग दो गुना हो जाता है।

रिसर्च पेपर में शोधों का हवाला देते हुए कहा गया है कि युवाओं में ब्रेन स्ट्रोक के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। कुल ब्रोन हैमरेज के मामलों में करीब 30 फीसदी तक ऐसे युवा हैं जिनकी उम्र 40 साल से कम है। इन युवा मरीजों में 60 फीसदी पुरुष हैं। शोध के मुताबिक इसका मुख्य कारण नशे की लत, खराब जीवनशैली और जागरुकता का अभाव है। न्यूरो सर्जन डॉ। मुकेश शुक्ला बताते हैं कि ब्लड वेन्स में सिकुड़न या क्लॉटिंग (नलियों में वसा का जमना) के कारण दिमाग में ब्लड का प्रवाह कम हो जाता है। जब दिमाग के भीतर धमनियां फट जाती हैं तो इसे हैमरेजिक स्ट्रोक या ब्रेन हैमरेज कहते हैं।

ठंड है खतरे की घंटी

सर्दियों में ब्रेन स्ट्रोक के मरीजों की संख्या गर्मियों की अपेक्षा लगभग दोगुनी हो जाती है। इस बीमारी की वजह से दिमाग की किसी ब्लड वेन्स में जमाव हो जाता है, जिससे ब्लड का बहाव सुचारू रूप से नहीं हो पाता। इससे उस ब्लड वेन्स से जुड़े शरीर के अन्य भाग काम करना बंद कर देते हैं। ब्रेन स्ट्रोक का ठंड से सीधा जुड़ाव है। सर्दियों में खून गाढ़ा हो जाता है। शरीर को गर्म रखने के लिए ब्लड प्रेशर भी बढ़ जाता है। वहीं ठंड के मौसम में लोग बेहतर स्वास्थ्य के लिए ज्यादा कैलोरी युक्त भोजन लेने लगते हैं। इससे कोलेस्ट्रॉल काफी तेजी से बढ़ता है।

ये है टीआईए

अगर किसी में स्ट्रोक के लक्षण दिखते हैं और खुद ही 24 घंटे के अंदर ठीक भी हो जाते हैं तो इसे ट्रांजियंट इस्कमिक स्ट्रोक (टीआईए) कहते हैं। यह ब्रेन स्ट्रोक की चेतावनी है। ऐसे में तुरंत डॉक्टर्स से सलाह लेनी चाहिए।

स्ट्रोक होने पर क्या करें

मरीज को स्ट्रोक के साढ़े चार घंटे के अंदर अस्पताल पहुंचाएं। मरीज को धमनियों के माध्यम से दवाएं दी जाती हैं, जो मस्तिष्क में जाकर ब्लड के थक्के को तोड़ देती हैं।

बचाव के तरीके

- हाई रिस्क फैक्टर को जानें और बचें।

- अगर हार्ट, बीपी, शुगर या किडनी की बीमारी के मरीज हैं तो सतर्क रहें।

- बीमारी को नियंत्रित रखने के लिए नियमित रूप से दवाओं का सेवन करते रहें।

- सिगरेट, खैनी, गुटखा व शराब के सेवन से बचें।

- मोटापा के शिकार हों तो वजन नियंत्रित रखें। दिनचर्या में एक्सरसाइज को शामिल करें।

- पानी खूब पिएं तथा जंक फूड से दूरी बनाए रखें।

- सर्दियों में इस बीमारी से बचने के लिए कोलेस्ट्रॉल और ब्लड प्रेशर को नियंत्रित रखें।

- जब मौसम काफी ठंडा हो तो घर से बाहर न निकलें।

- ऊनी कपड़े पहनें।

- भोजन में नमक व सैच्युरेटेड फैट की मात्रा सीमित रखें।

लक्षण

- शरीर के आधे हिस्से में कमजोरी

- आधे चेहरे, एक हाथ या पैर में सुन्नपन या कमजोरी महसूस होना

- हाथ-पैर का संतुलन बिगड़ना

- बेहोशी आना

- सिर में तेजदर्द के साथ उल्टी और चक्कर आना

- भ्रम की स्थिति होना

- आंख से धुंधला या डबल दिखना, निगलने में परेशानी, चाल में लडखड़ाहट, आवाज में तुतलाहट या बंद होना

प्रमुख जांचें

ब्रेन स्ट्रोक पेशेंट्स की प्रारंभिक जांचों में कुछ ब्लड टेस्ट और सीटी स्कैन किए जाते हैं। एमआरआई, एंजियोग्राफी और 2डी ईको भी कराया जाता है। प्रॉपर इलाज होने पर मरीज ठीक हो जाते हैं।

- डॉ। मुकेश शुक्ला, न्यूरो सर्जन


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