हौसले की उड़ान! कैंसर को हराने वाली महिला ने बोस्‍टन मैरॉथन रेस 13 घंटे में पूरी कर जीता लोगों का दिल!

2018-04-18T07:14:30Z

कहते हैं ना कि पंखों से नहीं बल्कि हौसलों से उड़ान होती है। ऐसा ही कुछ देखने को मिला अमेरिका के बोस्‍टन शहर में होने वाली सालाना मैराथन रेस में। सालों तक कैंसर से लड़ने वाली एक महिला ने 122 साल पुरानी वर्ल्‍ड फेमस बोस्‍टन मैराथन को अपने पति के साथ साथ13 घंटो में पूरा किया। यह कोई वर्ल्‍ड रिकॉर्ड भले ही न हो लेकिन मैरी के हौसले ने तमाम लोगों को वो ताकत दी जो शायद जिंदगी भर उनके काम आएगी।

दुनिया की सबसे पुरानी सालाना रेस है बोस्टन मैराथन

बता दें कि बोस्टन मैराथन कोई मामूली रेस नहीं है। आज से 122 साल पहले सन 1897 में यह रेसिंग इवेंट पहली बार शुरु हुआ था। दुनिया की सबसे पुरानी सालाना रेस है बोस्टन मैराथन। 42 किलोमीटर से ज्यादा लंबी यह रेस हर साल अप्रैल महीने के तीसरे सोमवार को होती है, जिसमें शामिल होने के लिए हजारों लोग और उसे देखने के लिए कई लाख लोग देश और दुनिया से इक्ट्ठे होते हैं। इस रेस में जीतना किसी सम्मान से कम नहीं है। बता दें कि इस मैराथन में कोई भी यूं ही शामिल नहीं हो सकता। रेस में रजिस्टर करने से पहले हर एक प्रतिभागी को मैराथन अथॉरिटी द्वारा फिजिकल टेस्ट पास करना होता है। इतने दमदार प्रतिभागियों के बीच कैंसर सें जंग जीतने वाली 'मैरी शेरटेनलीब' नाम की इस एक महिला ने खुद का बचाने वाले डॉक्टरों और सहयोगियों के लिए चंदा जुटाने के लिए इस रेस में हिस्सा लिया था।

 

मैराथन रेस पूरी करने के लिए कैंसर पीडि़त ने लगा दी जान

बता दें कि Mary Shertenlieb कई साल तक कैंसर से लड़ने के बाद अपनी जिंदगी जीतकर वापस आईं थीं। तो अपनी जान बचाने वालों की खातिर उन्होंने इस मैराथन रेस में हिस्सा लिया। दोपहर में रेस शुरु होने के बाद उन्होंने आधी से ज्यादा रेस पूरी कर ली थी, लेकिन उसके बाद मैरी की हालत बिगड़ने लगी। उनके होठ बैंगनी हो रहे थे, ठंड और थकान से उनके पैर कांप रहे थे और बारिश के बीच दौड़ने के कारण उन्हें खतरनाक हाइपोथर्मिया (शरीर का तेजी से ठंडा पड़ना) का खतरा हो गया था। मैरी जान रहीं थी, कि वो आगे नहीं बढ़ पाएंगी, लेकिन उनका दिल हार मानने को तैयार नहीं था।

 

ऐसा पार्टनर हो तो जिंदगी की हर रेस लगेगी आसान

ऐसे में उनके पति रिच ने उन्हें हिम्मत बंधाई और करीब 15 मील दूर एक मेडिकल टेंट में भिजवाया। जहां मैरी ने खाना खाया, कुछ देर आराम किया, बॉडी को गर्म रखने का इंतजाम किया और खुद को आगे की रेस के लिए तैयार किया। रात करीब साढ़े आठ बजे मैरी जब मानसिक और शारीरिक रूप से तैयार हो गईं, तो उन्होंने वहां से एक टैक्सी ली और बोस्टन मैराथन के उस रेसिंग प्वाइंट पर वापस पहुंच गईं, दिन में जहां से उन्होंने वो रेस छोड़ी थी। इसके बाद पति और पत्नी दोनों ने मिलकर बची हुई 11 किलोमीटर की रेस के लिए दौड़ना शुरु किया।

 

मैरी बताती हैं कि रास्ते भर पति रिच उन्हें हिम्मत दिलाते रहे और कहते रहे कि तुम कुछ भी कर सकती हो। इस हिम्मत का ही नतीजा रहा कि कैंसर से जंग जीतने वाली मैरी ने पति के साथ आधी रात के बाद बोस्टन मैराथन की फिनिशिंग लाइन को पार कर लिया। मैरी ने यह रेस कुल 13 घंटों में पूरी की। रेस पूरी करने के वक्त मैरी के फ्रेंड्स और रिलेटिव्स उन्हें चियरअप करने के लिए फिनिशिंग लाइन पर मौजूद थे। मैरी के हौसले की इस कहानी को सुनकर उन तमाम लोगों को जिंदगी की मुश्किल जंग जीतने की ताकत मिलेगी, जो हारा हुआ महसूस कर रहे हैं।

इनपुट: बोस्टन


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