Muharram 2021 Ashura मुहर्रम के 10वें दिन को आशूरा कहा जाता है। इसे मुहर्रम के नाम से भी पुकारते हैं। आइए जानें इस खास दिन का इतिहास और महत्व...

कानपुर (इंटरनेट डेस्क)। मुहर्रम 2021 इस्लामिक कैलेंडर का पहला महीना है जो 10 अगस्त मंगलवार को शुरू हुआ था। मुहर्रम को इस्लाम में गम का महीना माना जाता है। मुहर्रम कुरान में वर्णित चार पवित्र महीनों में से एक है, जो रमजान के पवित्र महीने के बाद आता है। मुहर्रम के दसवें दिन को अशूरा के नाम से जाना जाता है। इस दिन पहले ताजिया जुलूस निकाला जाता है और फिर उनको कर्बला में दफन किया जाता है। इस साल भारत में 19 अगस्त और 20,2021 को आशूरा मनाया जाएगा। इसके लिए विशेष तैयारियां की गई हैं।

क्या है आशूरा?
आशूरा नए साल का दसवां दिन मुहर्रम है। इराक के कर्बला में 10 अक्टूबर सन् 680 को पैगंबर हजरत मोहम्मद साहब के नवासे हजरत इमाम हुसैन की इसी दिन धोखे से हत्या कर दी गई थी। ऐसे में इस दिन हजरत इमाम हुसैन और उनके परिवार की शहादत पर शोक मनाया जाता है। उनकी शहादत आज भी लोगों को यह सीख देती है कि व्यक्ति को सच्चाई और मानवता के मार्ग पर चलना चाहिए।दोनों मुसलमान मुहर्रम अलग-अलग तरीके से मनाते हैं। सूनी मुसलमान उपवास रखते हैं जबकि शिया मुसलमान जितना संभव हो उतना कम खाते हैं।

आशूरा का इतिहास?
पैगम्बर मोहम्मद के दामाद तथा चौथे खलीफा अली की वर्ष 661 ईस्वी में हत्या के बाद अमीर मुवैया खलीफा की गद्दी पर आसीन हुए। अपने उन्होंने अपने बेटे यजीद को खलीफा बना दिया। उनके इस फैसले का काफी विरोध किया गया और कहा गया कि खलीफा की चयन प्रक्रिया पाक तरीके नहीं हुई है। वहीं यजीद को खलीफा घोषित करने के बाद अली के बेटे हजरत हुसैन समेत कई लोगों को अपनी स्वीकृति देने को कहा गया लेकिन उन्होंने यजीद को खलीफा मानने से इंकार कर दिया। इस पर यजीद की सेना और हजरत इमाम हुसैन के बीच कर्बला की जंग लड़ी गई थी। हजरत इमाम हुसैन ने इस्लाम की रक्षा के लिए अपने परिवार और दोस्तों के साथ कुर्बानी दी थी। उनकी शहादत मुहर्रम के 10वें दिन हुई थी जिसे आशूरा कहा जाता है।

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Posted By: Shweta Mishra