Begging For Life!

2011-06-28T16:12:22Z

29 मार्च 2010 से MViceberg है बंधक छह लोगों की जिंदगी दांव पर Government नहीं ले रही दिलचस्पी फिरौती की 11 2 करोड़ की रकम को पूरा करने फैमिली ने मांगी है बिजनेसमैन और फिल्म स्टार्स की मदद

मां-बाप अपने बच्चों के लिए कुछ भी करने को तैयार रहते हैं और फिर मामला अगर बच्चों की जान का हो तो वह किसी भी हद तक जा सकते हैं. पिछले 14 महीने से सोमाली पाइरेट्स के द्वारा कैप्चर किए गए एमवी आइसबर्ग-1 में मौजूद छह सेलर्स के पैरेंट्स ने फिरौती की रकम को पूरा करने के लिए बिजनेसमैन और फिल्म स्टार्स की मदद मांगी है.
एमवी सुएज के सेलर्स भले ही पाइरंट्स के चंगुल से छूट कर अपने वतन वापस लौट आए हैं लेकिन एमवी आइसबर्ग के सेलर्स के पैरेंट्स आज भी अपने बच्चों का इंतजार कर रहे हैं. पैरेंट्स का कहना है कि उनका केस हाई प्रोफाइल न होने की वजह से गवर्नमेंट दिलचस्पी नहीं दिखा रही है.
गवर्नमेंट पर विश्वास नहीं
एमवी आइसबर्ग-1 को सोमाली पाइरेट्स ने यमन के एडन पोर्ट से 10 माइल की दूरी पर 29 मार्च को कैप्चर कर लिया था. 14 महीने से ऊपर हो गए हैं और इसमें मौजूद छह सेलर्स आज भी पाइरेट्स के कब्जे में हैं. एमवी आइसबर्ग-1 में चीफ ऑफिसर इन कमांड धीरज तिवारी के पिता पुरुषोत्तम दास तिवारी का कहना है कि उन्हें गवर्नमेंट पर बिल्कुल भी विश्वास नहीं है. उसने अभी तक के किसी भी प्रॉमिस का पूरा नहीं किया है और अब हमें उससे कोई उम्मीद भी नहीं रह गई है.
उन्होंने बताया कि फिरौती की 11.2 करोड़ की रकम को पूरा करने के लिए उन्होंने टॉप बिजनेसमैन और फिल्म स्टार्स की मदद मांगी है. उन लोगों ने पहले जरूरतमंद फैमिलीज की मदद की है और उन्हें उम्मीद है कि वह उनकी भी मदद करेंगे. उन्होंने बताया कि अगर जरूरत पड़ी तो वह सडक़ों पर निकल कर लोगों का ध्यान इस तरफ आकर्षित करेंगे.
They need only money


तिवारी ने बताया कि मीडिएटर की मदद से उन्होंने पाइरेट्स से भी बात की, लेकिन उन लोगों ने हमेशा फिरौती के पैसे के बारे में ही बात की. वे हमेशा यही पूछते हैं कि पैसे अरेंज हो गए या और वक्त चाहिए. तिवारी ने बताया कि उन्होंने अपने बेटे से भी बात की, उसने भी पाइरेट्स की डिमांड को दोहराया. इस बात से यह बिल्कुल साफ है कि पाइरेट्स को सिर्फ पैसा चाहिए. यह दुर्भाग्यपूर्ण है. स्टेट और सेंट्रल गवर्नमेंट हमारी मदद करने में फेल रही है.


Suez case

फैमिली ने सुएज केस भी प्वॉइंट आउट किया. उन्होंने कहा कि बंधकों को मुक्त कराने में पाकिस्मानी सोशल एक्टिविस्ट अंसार बर्नी ने इस केस में बहुत ही इंपॉर्टेंट रोल प्ले किया. उन्होंने गवर्नमेंट पर डिपेंड न रह कर खुद से पैसा एकत्र करने में फैमिली की हेल्प की. एक और पैरेंट मानसिंह महते, जिनकर बेटा गनेश भी बंधक है, ने बताया कि वे लोग भी बर्नी को कांटैक्ट करेंगे. देखते हैं कि वह हम लोगों की मदद करने के लिए आगे आते हैं कि नहीं. उन्होंने आगे बोला कि हमें उम्मीद है कि वह हमारी मदद करेंगे.

Low profile
मानसिंह ने बताया कि गवर्नमेंट उनकी हेल्प करने में दिलचस्पी नहीं दिखा रही है क्योंकि इसमें जो लोग इनवॉल्व हैं वो हाई प्रोफाइल नहीं हैं. उन्होंने बताया कि उनके बच्चे उतने हाई प्रोफाइल नहीं हैं जितने कि एमवी सुएज के बंधक थे. 
अगर यह एक प्लेन हाई जैक होता तो गवर्नमेंट बंधकों को छुड़ाने के लिए कुछ भी करती. पाकिस्तान बेस्ड टेररिस्ट ऑर्गनाइजेशन आईसी-814 के हाईजैक किए जाने पर गवर्नमेंट ने बदले में पैसे के साथ-साथ कुछ खतरनाक टेररिस्ट्स को रिहा कर दिया था.
Hostage
एमवी आइसबर्ग-1 में नासिक के धीरज कुमार, सतारा के स्वपनिल जाधव, मुंबई के गनेश महते, केरल के साजी कुमार पुरुषोत्तम, यूपी के संतोष कुमार यादव और हरियाणा के जसविंदर सिंह हैं.

In vain

बंधकों की रिहाई के लिए पैरेंट्स प्राइम मिनिस्टर मनमोहन सिंह, फॉरेन मिनिस्टर एस.एम कृष्णा, लोकसभा स्पीकर मीरा कुमार, अपोजीशन लीडर सुषमा स्वराज, महाराष्ट्र के सीएम पृथ्वीराज चह्वाण, फॉरेन सेक्रेट्री निरुपमा राव समेत कई मिनिस्टर्स से मदद की गुहार लगा चुके हैं. यहां तक की उन्होंने इसके लिए योग गुरु रामदेव को भी अप्रोच किया था.


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