तिलिस्मी आग ने ठंडी कर दी घोटालों की लपट

2019-07-08T06:00:15Z

- बीते तीन साल में सरकारी दफ्तरों में आग लगने की घटनाओं की नहीं सुलझ सकी गुत्थी

- डीजी हेल्थ के दफ्तर में लगी आग की जांच में एसटीएफ ने किया था साजिश का खुलासा, गुनहगार का नहीं लग सका पता

pankaj.awasthi@inext.co.in

LUCKNOW: वैसे तो कहीं भी लगने वाली आग नुकसान ही करती है लेकिन, राजधानी में सरकारी दफ्तरों में लगने वाली आग घोटालेबाजों के लिये फायदेमंद साबित हो रही है। वजह भी साफ है कि इस आग में करोड़ों के घोटालों पर पानी पड़ जाता है। उसके बाद न तो किसी भी जांच की आंच घोटालेबाजों तक पहुंचती है और न ही सरकारी धन की लूट करने वाले गुनहगार कानून के शिकंजे में आ पाते हैं। हैरत की बात है कि सभी अग्निकांडों के बाद उसकी जांच को लेकर बढ़चढ़ कर दावे किये जाते हैं लेकिन, नतीजा वही ढाक के तीन पात वाला ही साबित होता है। आइए आपको बताते हैं ऐसे ही कुछ रहस्यमय अग्निकांडों के बारे में, जिनकी जांच का नतीजा सिफर ही साबित हुआ-

स्वास्थ्य भवन, कैसरबाग

14 जून 2016

रात करीब 9 बजे तीसरे फ्लोर पर स्थित लेखा अनुभाग में आग लग गई। देखते ही देखते आग ने आसपास के कमरों को भी अपने आगोश में ले लिया। आनन-फानन फायर टेंडर्स मौके पर पहुंची और करीब दो घंटे की मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया। हालांकि, तब तक कई अहम दस्तावेज जलकर खाक हो गए।

जांच का हश्र: साजिश के तहत आग लगाए जाने की आशंका में पुलिस ने जांच शुरू की लेकिन, अब तक किसी के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं हो सकी।

इंदिराभवन, अशोक मार्ग

10 मई 2016

बाल विकास एवं पुष्टाहार विभाग के दफ्तर में आग लगी। इस अग्निकांड में फर्नीचर के साथ कई कंप्यूटर और दस्तावेज भी जलकर खाक हो गए। बताया गया कि जो कंप्यूटर आग की वजह से नष्ट हुए उसमें कई योजनाओं का डाटा था। अग्निकांड के बाद सवाल उठे कि घोटाले को छिपाने के लिये इस घटना को साजिशन अंजाम दिया गया।

जांच का हश्र: अग्निकांड पर सवाल खड़े होने पर विभागीय जांच शुरू हुई। लेकिन, यह जांच सिर्फ खानापूरी ही साबित हुई। दरअसल, न तो तीन साल बीतने के बाद भी जली फाइलों का खुलासा हुआ और न ही आग लगने की सटीक वजह ही पता चल सकी।

स्वास्थ्य भवन, कैसरबाग

5 अगस्त 2016

स्वास्थ्य भवन में डीजी हेल्थ का दफ्तर तड़के धू-धूकर जलने लगा। पहली घटना की जांच अभी चल ही रही थी कि इसी बीच लगातार दूसरी बार आग लगने से हड़कंप मच गया। आरोप लगे कि एनआरएचएम घोटाले से संबंधित फाइलें इस अग्निकांड में नष्ट हो गई।

जांच का हश्र: मामले की गंभीरता को देखते हुए घटना की जांच एसटीएफ को सौंपी गई। एसटीएफ ने जांच के बाद बताया कि यह आग साजिश के तहत लगाई गई है। हालांकि, आग लगाने वाले शख्स का पता नहीं चल सका।

मिड-डे मील प्राधिकरण कार्यालय, गोमतीनगर

7 सितम्बर 2016

प्राधिकरण का दफ्तर बंद हो चुका था। रात करीब 11 बजे अचानक दफ्तर के उस कमरे से आग की लपटें उठने लगीं, जिसमें प्रदेश भर की योजनाओं से जुड़े दस्तावेज सुरक्षित रखे गए थे। जानकारी मिलने पर फायर टेंडर्स मौके पर पहुंची। लेकिन, तब तक हजारों फाइलें जलकर खाक हो चुकी थीं।

जांच का हश्र: विभागीय जांच शुरू की गई लेकिन, अब तक न तो आग लगने की वजह साफ हो सकी और न ही अग्निकांड में कौन-कौन सी फाइलें जलकर खाक हुई, इनका ही पता चल सका।

शक्तिभवन, अशोक मार्ग

18 अगस्त 2016

शक्तिभवन के कॉरपोरेट सेक्शन में तड़के अचानक आग लग गई। धुआं व लपटें देख सुरक्षाकर्मियों ने फायर कंट्रोल रूम को सूचना दी। मौके पर पहुंची फायर टेंडर्स ने आग पर काबू पा लिया। हालांकि, भारी संख्या में दस्तावेज राख हो गए। आशंका जताई गई कि दस्तावेजों को साजिशन आग के हवाले किया गया और इसे अग्निकांड का रूप दिया गया।

जांच का हश्र: घटना के बाद फायर डिपार्टमेंट ने आग की चपेट में आकर नष्ट हुई फाइलों की डिटेल मांगी गई लेकिन, विभाग के जिम्मेदार अफसर टालमटोल करते रहे। आलम यह कि अब तक न ही डिटेल दी गई और न ही एफआईआर ही दर्ज कराई गई।


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