उत्सवप्रियता भारतीय जीवन की प्रमुख विशेषता है। देश में समय- समय पर अनेक पर्वों एवं त्योहारों का भव्य आयोजन इसका प्रत्यक्ष प्रमाण है। श्रावण मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को नागपंचमी त्योहार नागों को समर्पित है। इस त्योहार पर व्रत पूर्वक नागों का अर्चन-पूजन होता है। इस वर्ष नागपंचमी सोमवार 5 अगस्त को पड़ रही है।


वेद और पुराणों में नागों का उद्गम महर्षि कश्यप और उनकी पत्नी कद्रू से माना जाता है। नागों का मूल स्थान पाताल लोक प्रसिद्ध है। पुराणों में नागलोक की राजधानी के रूप में भोगवतीपुरी विख्यात है। संस्कृत कथा- साहित्य में विशेष रूप से ' कथासरित्सागर' नागलोक और वहाँ के निवासियों की कथाओं से ओतप्रोत है। गरुण पुराण, भविष्य पुराण, चरकसंहिता, सुश्रुतसंहिता, भावप्रकाश आदि ग्रन्थों में नाग सम्बन्धित विविध विषयों का उल्लेख मिलता है। पुराणों में यक्ष, किन्नर और गन्धर्वों के वर्णन के साथ-साथ नागों का भी वर्णन मिलता है। भगवान् विष्णु की शय्या की शोभा नागराज शेष बढ़ाते हैं। भगवान् शिव के अलंकरण में नागों की महत्वपूर्ण भूमिका है।
योगसिद्धि के लिए जो कुण्डलिनी शक्ति जागृत की जाती है, उसको सर्पिणी कहा जाता है। पुराणों में भगवान् सूर्य के रथ में द्वादश नागों का उल्लेख मिलता है, जो क्रमश: प्रत्येक मास में उनके रथ के वाहक बनते हैं। इस प्रकार अन्य देवताओं ने भी नागों को धारण किया है। नाग देवता भारतीय संस्कृति में देवरूप में स्वीकार किये गये हैं। कश्मीर के जाने-माने संस्कृत कवि कल्हण ने अपनी प्रसिद्ध पुस्तक 'राजतरंगिणी' में कश्मीर की सम्पूर्ण भूमि को नागों का अवदान माना है।


वहाँ के प्रसिद्ध नगर अनन्तनाग का नामकरण इसका ऐतिहासिक प्रमाण है। देश के पर्वतीय प्रदेशों में नागपूजा बहुतायत से होती है। यहाँ नागदेवता अत्यन्त पूज्य माने जाते हैं। हमारे देश के प्रत्येक ग्राम- नगर में ग्राम देवता और लोक देवता के रूप में नागदेवताओं के पूजास्थल हैं। भारतीय संस्कृति में सायं-प्रात: भगवत्स्मरण के साथ अनन्त तथा वासुकि आदि पवित्र नागों का नामस्मरण भी किया जाता है जिनमें नागविष और भय से रक्षा होती है तथा सर्वत्र विजय होती है-अनन्तं वासुकिं शेषं पद्मनाभं च कम्बलम्।शंखपालं धार्तराष्ट्रं तक्षकं कालियं तथा।।एतानि नव नामानि नागानां च महात्मनाम्।सायंकाले पठेन्नित्यं प्रात:काले विशेषत:।।तस्मै विषभयं नास्ति सर्वत्र विजयी भवेत्।।ज्योतिषाचार्य पंडित गणेश प्रसाद मिश्र

Posted By: Vandana Sharma