फिल्म रिव्यू : अभय देओल की फिल्म 'नानू की जानू' देखने से पहले ये रिव्यू जरुर पढे़

कुछ फिल्में देखने के बाद मन करता है कि फिल्म से जुड़े महापुरुष की विराट प्रतिमा फिल्मसिटी के दरवाजे पे लगा दूं ताकि कौवे और कबूतर उसपे बैठ सकें और... खैर कुछ इच्छाएं सिर्फ दिल में ही रह जाएंगी आप चाहें कितना भी चाह लें।

Updated Date: Fri, 20 Apr 2018 06:06 PM (IST)

कहानी घर हथियाने वाले एक गुंडे का घर एक भूतनी हथिया लेती है फिर गुंडे के दिमाग मे कुछ गड़बड़ी आ जाती है और गुंडे को भूत से प्यार हो जाता है। यही है फिल्म की कहानी...एजेक्टली इतनी ही है फिल्म की असल कहानी। समीक्षाकुछ फिल्मों को देख के दिल को सुकून पहुंचता है, कुछ रोमांचित करती हैं और कुछ को देख के पहले अपने ऊपर दया आती है फिर फिल्म के फिनेंसर पे दया आती है। फिर अपनी तड़पती किलपती आत्मा से आवाज आती है कि फिनेंसर पे दया करना बेवकूफी है। ये तो उसकी मूर्खता के कारण ही है कि फिल्म बनाई गई और उसे मुझे झेलना पड़ा। ये वैसी ही फिल्म है। क्या क्या बिगड़ा
फिल्म में जितने पंच हैं, वो सब आप पहले ही ट्रेलर में देख सकते हैं उसके अलावा फिल्म असल मे मनोरंजक पल बस 'निल बटे सन्नाटा'है...मतलब जीरो। फिल्म में कहानी, स्क्रीनप्ले और डायलाग तीनों ही जैसे मजाक बनाने के लिए लिखे गए हैं। फिल्म की लेंथ बढ़ाने के लिए बिना किसी कारण सब्प्लॉट ठूंस दिए गए हैं। फिल्म की एडिटिंग, वी एफ एक्स उतने ही खराब हैं जितने मोहन जोदड़ो में थे। पार्श्वसंगीत लाउड और बेहद खराब है। फिल्म की सिनेमैटोग्राफी भी निम्न दर्जे की है। अदाकारी


अभय देयोल पूरी कोशिश करते हैं कि वे इस डूबती हुई नैया को किनारे लगा ले पर जो नाव दलदल में डूब रही हो उसे भगवान के अलावा कोई नहीं बचा सकता और यहीं से आप ऊपरवाले से प्रार्थना करने लगते हैं कि अभय जैसे पॉलिशड एक्टर को कोई अच्छी फिल्म मिल जाये और हम भूल जाएं कि उन्होंने ये फिल्म की। पत्रलेखा का रोल तो इस फिल्म के ट्रेलर से भी छोटा है अगर गीत हटा दें तो। मनु ऋषि और बृजेन्द्र काला भी कोई मजा नहीं पैदा कर पाते...इसका पूरा श्रेय फिल्म की रद्दी राइटिंग को जाता है। वर्डिक्टहॉरर और कॉमेडी को मिलाना उतना ही मुश्किल है जितना चाक को पानी मे मिलाने की कोशिश करना। इस बात की तारीफ जरूर करनी पड़ेगी की कोशिश की गई है इस हफ्ते रिलीज हुई नानू की जानू में। अफसोस की बात है कि बस वही ठीक से किया गया है। बाकी फिल्म तो बस भगवान भरोसे ही है। रेटिंग : 1 स्टार Janet Ellis Prajapatiफिल्म रिव्यू : इसलिए देख सकते हैं ईशान खट्टर की फिल्म 'बियॉन्ड द क्लाउड्स'Movie Review : स्टीवन स्पीलबर्ग की 'रेडी प्लेयर वन' देखने की 7 वजहें

Posted By: Vandana Sharma
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