टेंपो या बाहरी वाहन नहीं ढोएंगे स्कूली बच्चे

2019-07-19T06:00:25Z

RANCHI : स्कूल की जो बस है उस बस को छोड़कर अगर स्कूल जाने वाले बच्चे टेंपो, छोटे मारुति वैन या दूसरे किसी गाड़ी से स्कूल जाते हैं तो इसके लिए अब स्कूल प्रशासन जिम्मेदार होगा। और उस पर कार्रवाई भी की जाएगी। रांची ट्रैफिक पुलिस के इस फरमान से स्कूल जाने के दौरान अब बच्चों को खतरे की आशंका कम रहेगी। इसी की ध्यान में रखते हुए खुद ट्रैफिक एसपी ने शहर के सभी स्कूलों को नोटिस दिया है कि उनके यहां पढ़ने वाले बच्चे स्कूल की ओर से अधिकृत वाहन या अपने पेरेंट्स के वाहन से ही स्कूल जाएंगे। इसके अलावा दूसरे किसी भी तरह के वाहन जो स्कूल की ओर से अधिकृत नहीं हैं, उससे अगर बच्चे स्कूल जाते हैं तो स्कूल प्रशासन पर कार्रवाई की जाएगी।

तो स्कूल प्रशासन होगा जिम्मेवार

ट्रैफि क एसपी ने लिखा है पत्र

रांची ट्रैफि क एसपी की ओर से स्कूलों को भेजे गए लेटर में यह सुनिश्चित कराने को कहा गया है कि स्कूल के अलावा दूसरे किसी वाहन से बच्चे स्कूल नहीं जाएंगे। अगर किसी भी स्कूल में अब प्राइवेट वाहन से बच्चे स्कूल पहुंचेंगे तो स्कूल प्रशासन इसके लिए जिम्मेवार माना जाएगा

कैराली की घटना से लिया सबक

पिछले दिनों कैराली स्कूल के बच्चों को ले जा रहे मारुति वैन में अचानक आग लग गई थी। भगवान का शुक्र रहा कि हादसे में किसी बच्चे को कोई क्षति नहीं पहुंची। इस घटना से सबक लेते हुए ट्रैफिक पुलिस ने यह नियम जारी किया है कि अब बच्चे बाहर की गाडि़यों से स्कूल नहीं पहुंचेंगे। बच्चे स्कूल द्वारा अधिकृत बस या गाड़ी से ही पहुंचेंगे या उनके पेरेंट्स जो गाड़ी उनके लिए उपलब्ध कराएंगे उससे ही वो स्कूल जाएंगे।

अधिकतर स्कूल में प्राइवेट वाहन

शहर में जितने भी स्कूल हैं उन सभी में बस उपलब्ध है, लेकिन स्टूडेंट्स की संख्या अधिक है। इसके कारण बहुत सारी छोटी गाडि़यां जो प्राइवेट एजेंसी द्वारा चलायी जा रही हैं उससे बच्चों को स्कूल लाया जाता है। टेंपो और मारुति वैन जैसी बहुत सारी गाडि़यां हैं जो बच्चों को स्कूल पहुंचाने और छोड़ने का काम कर रही हैं। हर स्कूल में काफ संख्या में बच्चे स्कूल बसों की जगह इन प्राइवेट गाडि़यों से ही स्कूल पहुंचते हैं। लेकिन इन गाडि़यों से बच्चों को अगर किसी भी तरह की क्षति होती है तो ये गाड़ी वाले जिम्मेवार नहीं होते हैं ।

बिना सुरक्षा के चलती हैं छोटी गाडि़यां

बच्चों को लेकर जो प्राइवेट गाडि़यां स्कूल आ जा रही हैं उनमें सुरक्षा का भी कोई ध्यान नहीं रखा जाता है। छोटे टेंपो में जहां 6 लोगों की बैठने की सीट होती है। उसमे टेंपो वाले 12 से 15 बच्चों को भरकर स्कूल पहुंचाते हैं। यहां तक कि कई पुराने मारुति वैन जो कंडम घोषित हो चुके हैं, उनको भी स्कूल वैन के रूप में यूज कर बच्चों को लाने ले जाने के काम जारी है। जबकि इन गाडि़यों से हादसा होने का बराबर डर बना रहता है। इसके बाद भी प्राइवेट वाले इसकी परवाह किए बिना बच्चों को स्कूल पहुंचाते हैं। बच्चों को इन्हीं सब परेशानियों से बचाने के लिए ही एसपी ट्रैफिक ने ये फरमान जारी किया है।


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