नवजात को बेचने में मां व खरीदार महिला पर केस

2019-06-15T12:27:20Z

एमजीएम अस्पताल में एक बच्चे को जन्म देने के बाद बेचने के मामले में बच्चे की मां और बच्चे को खरीदने की आरोपी के खिलाफ साकची थाने में प्राथमिकी दर्ज की गई है

jamshedpur@inext.co.in
JAMSHEDPUR: एमजीएम अस्पताल में एक बच्चे को जन्म देने के बाद बेचने के मामले में बच्चे की मां अलीशा बानरा और बच्चे को खरीदने की आरोपी किरण देवी के खिलाफ साकची थाने में प्राथमिकी दर्ज की गई है. ये प्राथमिकी बाल कल्याण समिति (सीडब्ल्यूसी) की शिकायत पर दर्ज हुई है. पुलिस बच्चे की मां अलीशा व इसे खरीदने वाली किरण देवी का पता लगाने में जुट गई है.

क्या है मामला
माना जा रहा है कि बच्चा चोरी मामले में एक गिरोह सक्रिय है. यही गिरोह एमजीएम अस्पताल से लेकर अन्य कार्यालयों में सेटिंग कर बच्चों का कारोबार कर रही है. पुलिस जांच में गिरोह की कारस्तानी सामने आने की बात कही जा रही है. सीडब्ल्यूसी के अध्यक्ष आलोक भास्कर ने एसएसपी को शिकायत दे कर बताया कि रेलवे स्टेशन पर रहने वाली अलीशा बानरा भीख मांगने का काम करती है. उसने पिछले 11 जून को एमजीएम अस्पताल में अलीशा बानरा ने बच्चे को जना था. यहीं से उसने अपने बच्चे को किरण देवी नामक महिला के हाथ बेच दिया था. मामले की शिकायत अलीशा की सहेली संध्या देवी ने सीडब्ल्यूसी से की थी. सीडब्ल्यूसी ने मामले की जांच की तो इसे सही पाया. इस पर साकची थाने से शिकायत की गई, लेकिन साकची थाने में प्राथमिकी दर्ज नहीं हुई थी. इस पर शुक्रवार को सीडब्ल्यूसी ने एसएसपी से शिकायत की. इसके बाद मुकदमा दर्ज हुआ.

बरामद नहीं हो सका बच्चा
सीडब्ल्यूसी ने मंगलवार को शिकायत मिलने के बाद काफी खोजबीन की थी लेकिन बच्चा नहीं मिला. सीडब्ल्यूसी और पुलिस ने किरण देवी को फोन किया, लेकिन उसका फोन स्विच आफ था.

लेबर रूम में नहीं दर्ज अलीशा का नाम
अलीशा बानरा ने एमजीएम में बच्चा जना, लेकिन इसकी लिखा-पढ़ी एमजीएम अस्पताल में नहीं है. जबकि बिना रजिस्टर में दर्ज किए अस्पताल के लेबर रूम में किसी महिला को कैसे ले जा सकते हैं. मंगलवार को जब सीडब्ल्यूसी ने इस मामले के बारे में एमजीएम अधीक्षक से जानकारी मांगी थी तो वो इसका सुबूत मांगने लगे थे. उनका कहना था कि अलीशा बानरा ने एमजीएम में भर्ती ही नहीं हुई. उनके इस बयान से केस काफी पेचीदा हो गया है. माना जा रहा है कि यदि पुलिस ने निष्पक्षता से पूरे मामले की जांच की तो इसमें अस्पताल के अधिकारी भी फंस सकते हैं.


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