एलयू में मेहमानों की पीएचडी में नो एंट्री

2018-12-24T06:00:16Z

- विदेशी स्टूडेंट्स को पीएचडी में एडमिशन देने को ऑर्डिनेंस में नहीं कोई व्यवस्था

- एडमिशन को विदेशी स्टूडेंट्स एलयू से कर रहे संपर्क

- पहले होते थे डायरेक्ट एडमिशन, अब एंट्रेंस में शामिल होने की बात आ रही सामने

LUCKNOW: लखनऊ यूनिवर्सिटी के पीएचडी में एडमिशन लेना विदेशी स्टूडेंट्स के लिए मुसीबत बन गया है। वहीं यूनिवर्सिटी प्रशासन के लिए पीएचडी एडमिशन की प्रक्रिया गले की फांस बन गया है। आवेदन की प्रक्रिया खत्म होने में महज तीन दिन बचे हैं, लेकिन अभी तक यह तय नहीं हो पाया है कि विदेशी स्टूडेंट्स को किस तरह एडमिशन देना है। अभी तक विदेशी स्टूडेंट्स के डायरेक्ट एडमिशन लिये जाते थे। उन्हें फॉर्म भी नहीं भरना होता था। वहीं इस बार विदेशी स्टूडेंट्स से ऑनलाइन फॉर्म भरवाए जा रहे हैं, लेकिन एडमिशन के लिए एंट्रेंस लेना है या सीधे एडमिशन देना है यह अभी तक तय नहीं है।

नहीं आपस में तालमेल

यूनिवर्सिटी के इंटरनेशनल स्टूडेंट एडवाइजर प्रो। आरिफ अय्यूबी ने बताया कि यूनिवर्सिटी की ओर से इस दिशा में कोई निर्देश नहीं मिले हैं। कुलसचिव के साथ इस संबंध में बैठक भी हो चुकी है, लेकिन एडमिशन को लेकर कोई गाइडलाइन नहीं निर्धारित की गई है। फिलहाल उनसे ऑनलाइन आवेदन करने को कहा गया है। वहीं कुलसचिव एसके शुक्ला ने बताया कि विदेशी स्टूडेंट्स के एडमिशन को लेकर प्रक्रिया तय की जा रही है। हालांकि एडमिशन का मामला है इसलिए एडमिशन कोऑर्डिनेटर ज्यादा बेहतर बता सकते हैं। कोऑर्डिनेटर प्रो। अनिल मिश्रा ने बताया कि इसकी अब तक कोई पॉलिसी तय नहीं है। उनके आवेदन ऑनलाइन लेने हैं या अलग से सूची दी जाएगी यह भी मुझे नहीं बताया गया है। पॉलिसी तो यूनिवर्सिटी ही तय करेगी।

सीटों पर भी फंसेगा पेंच

वहीं यूनिवर्सिटी की ओर से विदेश स्टूडेंट्स के एडमिशन को लेकर कोई पॉलिसी तय नहीं की गई है। ऐसे में आगे चलकर सीटों में भी पेंच फंसेगा। कई यूनिवर्सिटी में विदेशी स्टूडेंट्स को सुपरन्यूमेरिक सीट पर डायरेक्ट एडमिशन दिया जाता है। सूत्रों की मानें तो इस बार एंट्रेंस एग्जाम में विदेशी स्टूडेंट्स को भी शामिल किया जा सकता है। ऐसे में डायरेक्ट एडमिशन ना देने से निर्धारित सीटों पर विदेशी स्टूडेंट्स की भी दावेदारी होगी। वहीं विदेशी स्टूडेंट्स एलयू से किनारा कर सकते हैं क्योंकि दूसरे यूनिवर्सिटी उन्हें सीधे पीएचडी पर एडमिशन दे रहे हैं।

अन्य कोर्स में भी बुरा हाल

यूनिवर्सिटी के अन्य कोर्स के एडमिशन में भी यही हाल रहा था। इस बार कुल 52 विदेशी स्टूडेंट्स ने विभिन्न कोर्स में आवेदन किया था, लेकिन यूनिवर्सिटी ने इनके प्रवेश के मंजूरी में ढाई महीने लगा दिये। इसके चलते महज 11 विदेशी स्टूडेंट्स ने ही एडमिशन लिये बाकी सभी स्टूडेंट्स ने दूसरी यूनिवर्सिटी में एडमिशन लिया।


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