काम के नहीं, सिर्फ नाम के रैन बसेरे

2019-12-15T05:45:44Z

- कहीं बंद तो कहीं रैनबसेरों का इस्तेमाल हो रहा दूसरे कामों में, लोग बाहर बैठकर ठिठुर रहे

- दैनिक जागरण आईनेक्स्ट ने किया रियलिटी चेक, अलाव भी नहीं जलते मिले

यहां स्थाई रैन बसेरे

। बाकरगंज

2. अय्यूब खां चौराहे के पास

3. हजियापुर

4. छोटी विहार

5. सीआई पार्क

6. बदायूं रोड

7. सैदपुर हाकिन्स

यहां अस्थाई रैन बसेरे

। रेलवे जंक्शन

2. पुराना रोडवेज

3. सैटेलाइट बस स्टैंड

4. डेलापीर मंडी

5. जिला अस्पताल

यह है व्यवस्था

7 स्थाई रैन बसेरे हैं नगर निगम के शहर में

5 अस्थाई रैन बसेरे बनाए जाते हैं हर साल

बरेली : सर्द हवाओं से मौसम में अचानक से बदलाव आया है। ऐसे में, कुछ लोगों को रैन बसेरे का ही आसरा है। पर मुश्किल ये है कि रैन बसेरा होने के बावजूद भी लोग सर्द हवाओं में रात बिताने को मजबूर हैं। डिस्ट्रिक्ट हॉस्पिटल का हाल सबसे खराब है। यहां फीमेल हॉस्पिटल में तो अनियमितताओं की हदें पार कर दी हैं। इसके अलावा शहर में न तो अस्थाई रैन बसेरे बनाए गए हैं और न ही अलाव जलवाए जा रहे हैं। वहीं, नगर आयुक्त ने रेलवे-रोडवेज पर पर कंबल बांटे हैं। यह हकीकत सैटरडे को दैनिक जागरण आई नेक्स्ट की टीम के रियलटी चेक में सामने आई।

सीएम का आदेश भी बेअसर

प्रदेश में लोगों को ठंड से बचाने के लिए सीएम योगी आदित्यनाथ ने अफसरों को रैन बसेरे बनवाने के साथ ही अलाव जलवाने के निर्देश दिए। इसके साथ ही जरुरतमंदों को कंबल वितरण के आदेश भी दिए हैं, लेकिन अब तक शहर में लोगों को ठंड से बचाने के इंतजाम नहीं किए गए हैं।

रैनबसेरे को बना लिया वार्ड

जिला अस्पताल परिसर में ओटी के सामने बने रैन बसेरे को वार्ड में तब्दील कर दिया गया है। दैनिक जागरण आईनेक्स्ट टीम ने जिम्मेदार अफसर से इस बारे में बात की तो पता चला कि मरीजों की भारी संख्या को देखते हुए रैन बसेरे को दस बेड का वार्ड बनाया है।

दिन भर बंद, शाम को पार्किग

महिला अस्पताल में तीमारदारों के लिए बना रैन बसेरा पूरा दिन बंद मिला। जब दैनिक जागरण आईनेक्स्ट के रिपोर्टर ने अस्पताल की सीएमएस से बंद पड़े रैन बसेरे के बारे में पूछा, तो सीएमएस ने आनन-फानन में रैन बसेरे को खुलवा कर तीमारदारों को उसमें ठहरवाया। लेकिन सीएमएस के जाने के बाद अस्पताल के पैरामेडिकल स्टाफ ने उसमें अपनी बाइक खड़ी कर दी।

बारिश में भीगे बिस्तर

डेलापीर मंडी गेट पर नगर निगम ने एक अस्थाई रैन बसेरा तो बनवा दिया है, लेकिन बारिश के चलते यहां के बिस्तर भीग गए हैं। सर्दी से बचने के लिए लोगों को न चाहते हुए भी वहां रात काटनी पड़ती है।

यहां नहीं बने रैन बसेरे

रेलवे जंक्शन, पुराना रोडवेज और सैटेलाइट बस स्टैंड पर हर साल नगर निगम अस्थाई रैन बसेरे की व्यवस्था करता है। ठंड बढ़ने पर भी नगर निगम ने इन जगहों पर एक भी रैन बसेरा नहीं बनाया है, जिस वजह से मुसाफिर चाय के खोखों और प्लेटफॉर्म पर सर्द रातें गुजार रहे हैं।

नहीं जले अलाव

शासन ने आदेश दिए हैं कि शहर और तहसील में अलाव जलवाए जाएं। ऐसा न होने पर लोगों ने राहत पाने के लिए शहर के चौराहों पर लोग कूड़ा जलाकर ठंड से बचने की कोशिश करते नजर आए। इससे व्यवस्था की पोल खुलती दिखी।

अस्पताल में रैन बसेरे में कब्जा

चार दिनों से पत्‍‌नी अस्पताल में भर्ती है। रैन बसेरा पूरा दिन बंद रहता है। रात में खुल जाता है। जिस वजह से पूरा दिन बाहर काटना पड़ता है।

वीरेंद्र, तीमारदार

रैनबसेरे में कंबल की व्यवस्था है। एक बेड अस्पतालकर्मी ने कब्जा लिया है। कंबल मांगने पर भी कंबल नहीं दिया गया। जिस वजह से सर्दी में ठिठुरना पड़ रहा है।

राजवीर, तीमारदार

- जहां रैन बसेरे नहीं बन पाए हैं। नगर निगम वहां जल्द ही अस्थाई रैनबसेरे बनवाएगा। इसके अलावा सभी चौराहों पर अलाव जलवाने की व्यवस्था की जाएगी।

ईश शक्ति सिंह, अपर नगर आयुक्त

- रैन बसेरा सिर्फ तीमारदारों के ठहरने के लिए बनाया गया है। यह 24 घंटे खुला रहता है। अगर इसमें ताला लगा हुआ है तो यह गलत है। चौकीदार से जवाब तलब किया जाएगा।

डॉ। अलका शर्मा, सीएमएस

Posted By: Inextlive

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