वाराणसी क्षमता से तीन गुना बंदियों से फुल है जिला जेल बैरक में ठूसठूस कर रखे गए हैं कैदी

2019-02-07T12:43:49Z

-शिफ्टवार सोने के लिए बाध्य हैं बंदी, मोबाइल पर लगाम बिल्कुल भी नहीं


VARANASI : वैसे तो जेल बना ही है इसलिए कि यहां आने के बाद गुनहगार को यह पता चल सके कि उसके गलत काम का ये अंजाम है। उसके गलत रास्ते पर जाने की ही देन है कि उसे यहां बंद होना पड़ा। यहां घर जैसा ऐशो आराम पाना मुश्किल है। क्योंकि अपराध करने के बाद यहां बड़े बुरे हालात में अपने किये की सजा काटनी पड़ती है। इसके बाद भी जेल मैन्युअल के अनुसार यहां बंद बंदियों के लिए भी रहने सोने व खान-पीने के अधिकार निर्धारित हैं। लेकिन जिला जेल में हालात इसके एकदम उलट हैं। बंदी यहां किस हाल में जी, खा व रह रहे हैं। इसकी एक रिपोर्ट आपके सामने पेश है।

क्षमता से तीन गुना बंदियों से भरा

बनारस का जिला जेल इन दिनों क्षमता से तीन गुना बंदियों से भरा हुआ है। हालत यह हो गई है कि बैरक में बंदी रात-दिन सोने के लिए आपस में शिफ्ट बनाए हुए हैं। 50 बंदी की क्षमता वाले बैरक में लगभग डेढ़ सौ बंदियों को रखा गया है। यही वजह है कि बंदी रात-दिन जागने को विवश हो रहे हैं। शिफ्ट वाइज सोने पर भी यदि बंदी अंगड़ाई भी लेना चाहे तो अगल-बगल ठसाठस भरे बंदियों के बीच में हाथ-पैर फैलाना मुश्किल है। बैरकों में निश्चित तौर पर बंदियों की संख्या निर्धारित से ज्यादा है लेकिन जेल प्रशासन की भी मजबूरी है कि वह बंद बंदियों को कहां शिफ्ट कराए। इस बाबत शासन को लेटर भी लिखा गया है। 747 बंदियों की क्षमता वाले जिला जेल चौकाघाट में इन दिनों लगभग 2100 बंदी बंद हैं। वहीं जेल के अंदर मोबाइल का संचालन भी धड़ल्ले से किया जा रहा है। बताया जाता है कि हर माह मोबाइल चलाने के लिए रकम बांधी गई है। ऐसा नहीं है कि जेल प्रशासन को इसकी खबर नहीं है लेकिन पैसे के लालच में आंख बंद किये पड़े हैं।

 

होती हैं मारपीट की घटनाएं

बैरकों में बंदियों की संख्या अधिक होने के नाते ही आए दिन बंदी आपस में भिड़ जाते हैं। जिसे संभालना बंदी रक्षकों के लिए मुश्किल भरा होता है। पुराने बंदियों का जेल में ठीक-ठाक हिसाब-किताब है। नए बंदियों से मारपीट कर काम करवाया जाता है। बैरक ट्रांसफर के दौरान रकम की डिमांड भी की जाती है। पुराने बंदियों के चाहने पर बंदीरक्षक उनकी हर डिमांड पूरा कराते हैं।

 

महिला बैरक में भी जगह नहीं

सत्रह बैरकों में से एक महिला बैरक भी है। जिसमें मौजूदा समय में 25 से 30 महिला बंदी हैं। यहां की स्थिति यह है कि इसमें भी महिला बंदियों को रहने में दिक्कतें होती हैं। कुछ दिनों पूर्व जेल में इंस्पेक्शन के लिए आई मानवाधिकार महिला आयोग की टीम ने इस पर आपत्ति भी जताई थी। बिंदुवार रिपोर्ट बनाकर शासन को ले गई टीम ने महिला बैरक की स्थिति को सुधारने पर अधिक फोकस किया था। यह भी बताया गया कि रात में कुछ महिला बंदी बिना लाकअप के रहती हैं।

 

पैसा दीजिए सब काम होगा

जैसा की कुछ माह पूर्व रायबरेली की जेल में बंद बंदी अंशु दीक्षित ने बैरक के अंदर वीडियो बनाकर जेल प्रशासन की सुरक्षा को तार-तार करते हुए सुविधा शुल्क पर हर सामान उपलब्ध कराने का पोल खोला था। कुछ ऐसे ही हालात चौकाघाट के जिला जेल में भी हैं। मुलाकात कराने के नाम पर, बैरक ट्रांसफर कराने पर, जेल में पैसा मंगवाने से लेकर कैंटीन से कुछ भी सामान खरीदने पर डबल रेट तय किया गया है। सबसे अधिक फोकस तो मोबाइल पर किया गया है। सूत्रों की मानें तो मोबाइल रखने के लिए पांच हजार रुपये एक माह का रेट तय किया गया है।

 

गैंगवार की भी आशंका

जेल में क्षमता से अधिक बंद बंदियों को संभालने में जेल प्रशासन के पसीने छुट रहे हैं। इधर बीच एक दूसरे के जानी दुश्मन और कुख्यात अपराधियों के जेल में आने के बाद से गैंगवार की आशंका भी बढ़ गई है। यही कारण है कि जेलर ने एसएसपी आनंद कुलकर्णी को लेटर लिखकर सुरक्षा बढ़ाने की गुहार लगाई है। जेल पुलिस चौकी को सिक्योरिटी टाइट रखने के लिए एसएसपी ने निर्देशित भी कर दिया है। जिला जेल में निरूद्ध बंदियों में दालमंडी एरिया का अमन मलिक, उसका भाई सलमान उर्फ अन्ना, शाहरुख, शेरू, फैजान, शाहनवाज उर्फ भंटू, अमित यादव उर्फ पट्टी सहित कई अन्य चर्चित हैं। इन बदमाशों की आपसी रंजिश भी जगजाहिर है।

 

एसएसपी से मांग

-जेल के बाहर पीएसी के जवानों की रोजाना ड्यूटी व गश्त लगाई जाए

-जेल पुलिस चौकी एक्टिव रहे और प्रभारी के साथ ही अन्य पुलिसकर्मी तैनात रहें

-जेल के बाहर हुकुलगंज की ओर फैंटम दस्ता और यूपी 100 की पीआरवी तैनात रहे

 

 

 

 

एक नजर

747

बंदियों की क्षमता का है जिला जेल

2100

बंदियों की है वर्तमान में मौजूदगी

17

बैरक हैं जिला जेल में

50

बंदियों की क्षमता है बैरक में

150-170

बंदियों से भरे हुए हैं एक-एक बैरक

40

परसेंट कम हैं बंदीरक्षक

01

शिफ्ट में सात से आठ बंदीरक्षक संभालते हैं सुरक्षा व्यवस्था की कमान

01

महिला बैरक

25-30

महिला बंदी बंद हैं बैरक में

01

हॉस्पिटल बैरक है

04

छोटे-छोटे हैं तन्हाई बैरक

 

 

 

बंदियों की संख्या जरूर अधिक है लेकिन कोई दिक्कत नहीं है। सोने-जागने के लिए बंदी स्वतंत्र हैं। सिक्योरिटी बढ़ाने के लिए कई बार लेटर लिखा जा चुका है।

पीके त्रिवेदी, जेल अधीक्षक

जिला जेल चौकाघाट

Posted By: Inextlive

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