दशहरा के दिन खेले गए वो क्रिकेट मैच जिनमें टीम इंडिया ने लहराया विजय पताका

2018-10-19T08:15:45Z

भारत में दशहरा बड़ी धूमधाम से मनाया जा रहा। पुराणो में जहां भगवान राम ने रावण का वध पर युद्ध जीता था तो वहीं क्रिकेट मैदान पर टीम इंडिया जीत के झंडे गाड़ती आई है। तो आइए जानते हैं आखिर दशहरे वाले दिन भारत ने कितने मैच खेले और कैसे मिली उनको जीत

कानपुर। क्रिकेट प्रेमियों के लिए वो दिन किसी त्यौहार से कम नहीं जब टीम इंडिया मैच जीतती है। मगर ये खुशी तब दोगुनी हो जाती जब ये जीत किसी त्यौहार वाले दिन आए। भारतीय क्रिकेट टीम का वनडे रिकॉर्ड देखें तो 1974 में खेले गए पहले वनडे से लेकर 2018 तक टीम इंडिया ने दशहरे वाले दिन कुल पांच मैच खेले हैं जिसमें तीन में जीत मिली, एक में हार और एक मैच बेनतीजा रहा था। भारत ने जो मैच जीते थे वो 1996, 2000 और 2015 में खेले गए। तो आइए जानें कैसा रहा था मैच का हाल..

1996 में सचिन तेंदुलकर बने जीत के हीरो
साल 1996 में टाइटन कप का तीसरा मुकाबला भारत बनाम ऑस्ट्रेलिया के बीच खेला गया। उस वक्त भारतीय टीम की कमान सचिन तेंदुलकर के हाथों में थी। ऑस्ट्रेलिया ने टॉस जीतकर पहले बैटिंग का निर्णय लिया। कंगारुओं ने निर्धारित 50 ओवर में 7 विकेट के नुकसान पर 215 रन बनाए। इसमें ऑस्ट्रेलियाई ओपनर मार्क टेलर की शतकीय पारी का अहम योगदान रहा। टेलर ने 105 रन बनाए थे। अब भारत को जीत के लिए 216 रन चाहिए थे। उस वक्त यह लक्ष्य आसान नहीं माना जाता था, भारत की तरफ से दिग्गज बल्लेबाज राहुल द्रविड़ (6), अजहर (1) और सौरव गांगुली (4) कुछ खास नहीं कर पाए और सस्ते में आउट हो गए। ऐसे में भारत को जीत दिलाने की जिम्मेदारी सचिन तेंदुलकर के कंधो पर आ गई। सचिन ने उस दिन 88 रन की शानदार पारी खेल भारत को जीत का रास्ता दिखलाया और अंत में भारतीय गेंदबाजों जवागल श्रीनाथ (30) और अनिल कुंबले (16) ने छोटी मगर महत्वपूर्ण साझेदारी कर जीत भारत की झोली में डाल दी। भारत यह मैच 2 विकेट से जीत गया और सचिन को मैन ऑफ द मैच का पुरस्कार मिला।
2000 में युवराज सिंह ने जिताया भारत को
साल 2000 में केन्या में आईसीसी नॉकआउट ट्रॉफी का आयोजन किया गया था। जिसका नाम बाद में बदलकर आईसीसी चैंपियंस ट्रॉफी कर दिया गया। 18 साल पहले गए इस टूर्नामेंट में 11 देशों की क्रिकेट टीमों ने हिस्सा लिया था। फाइनल में भारत बनाम न्यूजीलैंड का मुकाबला हुआ था जिसमें भारत को हार मिली थी। मगर टूर्नामेंट का पहला क्वॉटर्र फाइनल दशहरे वाले दिन भारत बनाम ऑस्ट्रेलिया के बीच खेला गया। उस वक्त टीम के कप्तान सौरव गांगुली थे। ऑस्ट्रेलिया ने टॉस जीतकर भारत को बैटिंग का न्यौता दिया। भारतीय ओपनर बल्लेबाज सौरव गांगुली (24) और सचिन तेंदुलकर (38) ने टीम को अच्छी शुरुआत तो दिलाई मगर बड़ी पारी नहीं खेल सके। फिर द्रविड़ और कांबली भी खास नहीं कर पाए। इसके बाद बल्लेबाजी करने उतरे युवराज सिंह, यह उनका दूसरा वनडे मैच था। डेब्यू मैच में उन्हें बैटिंग नहीं मिली थी मगर इस मैच में युवी ने 84 रनों की शानदार पारी खेली जिसकी बदौलत भारत ने निर्धारित ओवर में 265 रन बनाए। अब कंगारुओं को जीत के लिए 266 रन चाहिए थे मगर पूरी ऑस्ट्रेलियाई टीम 245 रन पर सिमट गई और भारत यह मैच 20 रन से जीत गया। युवा बल्लेबाज युवराज सिंह को मैन ऑफ द मैच चुना गया।

2015 में कोहली ने फैलाया विजय पताका

2015 में दशहरे वाले दिन भारतीय टीम फिर से क्रिकेट मैदान पर उतरी। इस बार भारत के सामने ऑस्ट्रेलियाई नहीं साउथ अफ्रीकी टीम थी। साउथ अफ्रीका उस वक्त भारत दौरे पर थी और वनडे सीरीज का चौथा मैच चेन्नई में खेला गया। उस वक्त टीम इंडिया की कमान एमएस धोनी के हाथों में थी। माही ने टॉस जीतकर पहले बैटिंग का निर्णय लिया। भारतीय ओपनर बल्लेबाज रोहित शर्मा (21) और शिखर धवन (7) कुछ कमाल नहीं कर सके। मगर तीसरे नंबर पर उतरे विराट कोहली ने प्रोटीज गेंदबाजों की जमकर धुनाई की। विराट ने 140 गेंदों में 138 रन की पारी खेली जिसकी बदौलत भारत ने निर्धारित 50 ओवर में 8 विकेट के नुकसान पर 299 रन बनाए। अब अफ्रीका को जीत के लिए 300 रन चाहिए थे मगर वे 35 रन से पीछे रह गए और भारत यह मैच जीत गया। कोहली को शानदार शतक लगाने पर मैन ऑफ द मैच चुना गया।
एक मैच में 10 विकेट लेने वाला गेंदबाज शामिल हुआ टीम इंडिया में
नहीं देखा होगा ऐसा वनडे मैच, जहां एक टीम ने बनाए 596 रन तो दूसरी 25 रन पर ढेर



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