अफसर 'खा' रहे गरीबों का राशन

2018-09-19T06:01:12Z

आई एक्सक्लूसिव

-आपूर्ति विभाग में चलता है कमीशनबाजी का खेल, कोटेदार और अधिकारियों के बीच प्रति कुंतल कमीशन तय

-कोटेदार को दिए जाने वाले कोटे में प्रति कुंतल 5 किलो ज्यादा खाद्यान्न का पैसा वसूलते हैं क्षेत्र के अधिकारी

-हर महीने विभाग के अधिकारी और कोटेदार मिलकर करते हैं लाखों की डकैती, सबका हिस्सा होता है तय

KANPUR@inext.co.in

KANPUR : शहर में गरीबों के राशन पर विभाग के अधिकारी ही डाका डाल रहे हैं। इस खेल में आपूर्ति विभाग के कई बड़े अधिकारी भी शामिल हैं। दैनिक जागरण आई नेक्स्ट की पड़ताल में पता चला कि गोदाम से राशन उठाने पर प्रति कुंतल 5 किलो के हिसाब से कमीशन तय है। हर कोटेदार को लगभग 1,000 रुपए तक हर महीने देना पड़ता है। जिले में लगभग 816 राशन की दुकानें हैं। 1,000 रुपए प्रति कोटेदार के हिसाब से यह डकैती 8 लाख 16 हजार रुपए हर महीने की है। जिसे जिम्मेदार अधिकारियों के बीच बराबर बांट लिया जाता है। कमीशनबाजी के इस खेल का खुलासा एक कोटेदार ने ही नाम न छापने की शर्त पर किया है। उसने कहा कि जो कोटेदार कमीशन नहीं देता उसका काम करना बेहद मुश्किल है।

एक कुंतल में 5 किलो हमारा

हर महीने की 5 तारीख को राशन वितरण किया जाता है। कोटेदार को राशन गोदामों से हर महीने कोटे के मुताबिक राशन मिलता है। एक गेंहू और चावल की बोरी में नियमत: 50 किलो राशन होता है। लेकिन कोटेदारों को प्रति कुंतल 5 किलो ज्यादा राशन के पैसे देने पड़ते हैं। ऐसे में कोटेदार इस नुकसान को पूरा करने के लिए राशन वितरण में खेल करता है। जिससे लाभार्थी को पूरा राशन नहीं मिल पाता है।

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एसटीएफ के राडार पर अधिकारी

आपूर्ति विभाग में कार्यरत एक कर्मचारी ने बताया कि इस कमीशनबाजी के इस खेल की जानकारी ऊपर तक पहुंचा दी गई है। राशन घोटाले की जांच में आपूर्ति विभाग के कई सप्लाई इंस्पेक्टर और अधिकारी एसटीएफ के राडार पर आ गए हैं। ऐसे में सप्लाई इंस्पेक्टर जांच में कोई भी सहयोग नहीं कर रहे हैं। वहीं यूआईडीएआई ने भी घोटाले में पकड़े गए 17 आधार कार्डो की जानकारी देने से मना कर दिया है। ऐसे में पुलिस की जांच अब और मुश्किल हो गई है। वहीं मामले में अभी तक कानपुर से न तो किसी कोटेदार से रिकवरी की गई और न ही कोई कोटेदार पुलिस के हाथ आया है।

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एक भी मामले में कार्रवाई

आपूर्ति विभाग में खाद्यान्न वितरण में गड़बड़ी का यह कोई नया मामला नहीं है। अप्रैल-2012 में कलक्टरगंज थाना क्षेत्र में 200 कुंतल चावल पकड़ा गया था। जिसमें रातों रात चावल की जगह सिंघाड़ा भर दिया गया था। इसी प्रकार दूसरा मामला एक फरवरी 2018 में पोखरपुर स्थित लक्ष्मी मित्तल फूड में सामने आया था। जिसमें 652 बोरी गेंहू, 200 कुंतल सरकारी चावल पकड़ा गया था। मामलों में एफआईआर दर्ज कराई गई थी, लेकिन बाद में कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। हाल ही में सरसौल में एक कोटेदार की दुकान पर डीएम ने छापेमारी कर कालाबाजारी पकड़ी थी लेकिन लेकिन विभाग ने उसके खिलाफ भी कार्रवाई नहीं की।

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आंकड़ों से राशन घोटाला

-9292 बार फर्जी आधार आईडी के जरिए निकाला गया राशन।

-17 फर्जी आधार के जरिए बार-बार राशन निकाला गया।

-42 कोटेदारों के खिलाफ दर्ज हुई कई थानों में एफआईआर।

-18 सप्लाई इंस्पेक्टर तैनात हैं जिला आपूर्ति विभाग में।

-1393.80 कुंतल गेंहू फर्जी आधार के जरिए निकाला।

-929.20 कुंतल चावल भी कोटेदारों ने फर्जी तरीके से निकाला।

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आपूर्ति विभाग की हर महीने समीक्षा की जा रही है। राशन वितरण में किसी भी प्रकार की गड़बड़ी पाए जाने पर अब सीधे कार्रवाई की जाएगी। लापरवाही किसी भी स्तर पर बर्दाश्त नहीं होगी। कई लोगों के नाम सामने आएं हैं लेकिन ये जांच का विषय है।

-विजय विश्वास पंत, डीएम, कानपुर नगर।


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