बिमल राॅय बर्थडे जमींदारी से आ गए रोड पर मेहनत से बने भारतीय सिनेमा के 'साइलेंट मास्टर'

2019-07-12T12:46:42Z

बिमल राॅय का जन्म बांग्लादेश के एक जमींदार के घर हुआ। किसे पता था कि वो अपने पिता से विरासत में मिली जमींदारी नहीं बल्कि फिल्म जगत को नया आयाम देंगे

कानपुर। बिमल राॅय का जन्म 12 जुलाई 1909 में बंग्लादेश में रहने वाले एक जमींदार के घर में हुआ। उनके पिता का निधन होने के बाद उन्हें ईस्ट मैनेजर ने जमींदारी से बेदखल कर दिया। फिर वो अपनी मां और छोटे भाई को लेकर कोलकाता चले गए। कोलकाता में उन्हें काम के लिए दर-दर भटकना पड़ा। वहां उन्होंने कुछ समय तक फोटोग्राफी की फिर जल्द ही उनकी मुलाकात असिस्टेंट कैमरामैन नितिन बोस से हुई। उनके साथ मिलकर बिमल कोलकाता के किसी बड़े थियेटर स्टूडियो में काम करने लगे। वहां उन्होंने थियेटर में भी काम किया। वो थियेटर के स्टेज पर लाइटिंग की व्यवस्ता देखते थे क्योंकि उन्हें लाइट और कम्पोजीशन की अच्छी समझ थी।
इस फिल्म से किया था डेब्यू

बिमल ने 1944 में फिल्म 'उड़यर पाथेर' से डायरेक्शन में कदम रखा। ये फिल्म इतनी बेहतरीन थी कि बंगाली भाषा की मास्टर पीस बन गई। उस समय जब तकनीक इतनी भी विकसित नहीं थी तब इसका कैमरावर्क, एक्टर्स, कहानी का ट्रीटमेंट और बाॅक्स ऑफिस केलक्शन वाकई शानदार था। वहीं उस वक्त 40 के दशक तक कई बंगाली निर्देशक मुंबई आने के लिए बाध्य हो गए थे क्योंकि आने वाले समय में वहीं काम मिलना था, उसे ही फिल्म सिटी बनाया जाना था। फिर क्या था, बिमल भी वहां पहुंच गए। बिमल राॅय की बायोग्राफी वेबसाइट के मुताबिक 1952 से 1953 तक बिमल राॅय ने फिल्म 'दो बीघा जमीन' का प्रोडक्शन वाला काम संभाला। फिल्म रिलीज के बाद बाॅकस ऑफिस पर ही नहीं बल्कि लोगों के दिलों तक उतर गई। इसी के साथ सफलता बिमल के कदम चूमने लगी। इसलिए लोग उन्हें आज भी 'साइलेंट मास्टर' के नाम से जानते हैं।

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55 साल की उम्र में चल बसे
फिल्म इतनी दमदार थी इसे टाॅप 10 बेस्ट इंडियन फिल्मों में शामिल कर लिया गया। इस फिल्म को देश में ही नहीं बल्कि चाइना, अमेरिका, कान्स, वेनिस और मेलबर्न जैसी जगहों पर भी अवाॅर्ड दे कर सम्मानित किया गया। इसके बाद उन्होंने 'परीणीता' , 'देवदास', 'सुजाता' और 'मधुमती' जैसी बेहतरीन फिल्में कीं। बिमल अपनी इन फिल्मों की वजह से न सिर्फ अपने शहर बल्कि देश और विदेश में लेजेंड्री डायरेक्टर बन चुके थे। हालांकि उनके दो प्रोजेक्ट आज तक अधूरे ही हैं। एक 'अमृत कुंभ' और दूसरा 'द महाभारत'। मालूम हो इंडस्ट्री को एक मुकाम देने के बाद बिमल सिर्फ 55 साल की उम्र में ये दुनिया छोड़ कर चले गए। उन्होंने अपना पूरा जीवन सिनेमा के नाम कर दिया उनके इस योगदान को कोई भी सिने आर्टिस्ट कभी नहीं भूल पाएगा।



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