बजट पास होते ही सदन बना अखाड़ा फेंकी बजट की प्रतियां

2018-11-20T13:58:51Z

पुनरीक्षित बजट को लेकर निगम सभागार में आयोजित सदन का पहला चरण तो कमोवेश शांतिपूर्ण तरीके से निपट गया लेकिन दूसरे चरण में जमकर हंगामा हुआ

- अपनी बात न सुने जाने से नाराज विपक्ष सदन में ही धरने पर बैठा

- मेयर के खिलाफ नारेबाजी, उनके कक्ष के बाहर भी दिया धरना

lucknow@inext.co.in
LUCKNOW: पुनरीक्षित बजट को लेकर निगम सभागार में आयोजित सदन का पहला चरण तो कमोवेश शांतिपूर्ण तरीके से निपट गया लेकिन जैसे ही दूसरे चरण में सत्ता पक्ष के पार्षदों ने पुनरीक्षित बजट पास कहते हुए सभागार गेट की तरफ कदम बढ़ाए, ठीक उसी दौरान विपक्ष भड़क गया. अपनी समस्याओं पर व्यवस्था न मिलने से नाराज विपक्ष पहले तो सदन में ही धरने पर बैठ गया और मेयर के खिलाफ नारेबाजी शुरू कर दंी. इसके बाद विपक्ष ने मेयर कक्ष के बाहर भी प्रदर्शन करने की रणनीति बनाई और उस तरफ कदम बढ़ा दिए. इसी दौरान गुस्साए पार्षदों ने बजट की प्रतियां भी सदन में फेंक दीं. जबकि एक पार्षद की ओर से बजट की एक प्रति सदन में रखी अध्यक्ष की डायस की तरफ फेंकी गई, जो डायस में रखे ग्लास में लगी. जिसकी वजह से ग्लास जमीन पर गिरकर चकनाचूर हो गया. इसके बाद विपक्ष सीधे मेयर कक्ष के बाहर पहुंचा और वहीं पर धरने पर बैठ गया. यहां भी मेयर के खिलाफ नारेबाजी की गई. इस धरने में भाजपा के एक पार्षद भी शामिल रहे.

सत्ता पक्ष ने संभाला मोर्चा
विपक्ष के पार्षद करीब पंद्रह से बीस मिनट तक मेयर कक्ष के बाहर ही डटे रहे. जिसके बाद मेयर कक्ष के अंदर बैठे सत्ता पक्ष के पार्षद भी बाहर आ गए. इसके बाद दोनों पक्षों के बीच जमकर जवाबी नारेबाजी की गई. मामला बढ़ता देख वरिष्ठ पार्षद आगे आए और किसी तरह स्थिति संभाली. इसके बाद मामला शांत हुआ.

सदन में पहले विपक्ष दिखा शांत
इस बार सदन में कमोवेश विपक्ष खासा शांत नजर आया. विपक्ष की ओर से समस्याएं तो उठाई गईं लेकिन कोई खास आक्रामक रवैया नहीं अपनाया गया. जबकि वार्डो में व्याप्त समस्याओं को लेकर सत्ता पक्ष के पार्षद ज्यादा पीडि़त नजर आए. कई बार तो सत्ता और विपक्ष के पार्षदों ने मिलकर ही वार्डो में व्याप्त समस्याओं को उठाया.

अंत में बदल गई तस्वीर
लंच समाप्त होने के बाद 2.45 पर सदन पुन: शुरू हुआ. करीब पंद्रह मिनट बाद ही सत्ता पक्ष की ओर से पुनरीक्षित बजट पास होने संबंधी आवाजें आने लगीं. जबकि विपक्ष के पार्षद सैय्यद यावर हुसैन रेशू, गिरीश मिश्रा, ममता चौधरी व अन्य पार्षद बजट से जुड़े कुछ अन्य बिंदुओं को लेकर चर्चा करना चाह रहे थे. जिससे उनकी तस्वीर साफ हो सके. जैसे ही विपक्ष ने अवस्थापना निधि, 14वें वित्त आयोग को बजट में शामिल किए जाने संबंधी सवाल को उठाया, माहौल गर्माने लगा. विपक्ष ने मांग उठाई कि बजट में अवस्थापना निधि, 14वें वित्त आयोग को शामिल न किया जाए और अगर किया जाए तो पार्षदों को भी शामिल किया जाए. इस पर नगर आयुक्त ने क्लीयर किया कि यह शासन के अनुसार ही है, इस पर निगम को गाइडलाइंस मिलती है. यह बात सामने आते ही विपक्ष ने आवाज बुलंद की. इस पर भाजपा पार्षदों ने भी सवाल उठाया कि पिछली सरकारों में भी यही व्यवस्था रही है. इस पर सत्ता पक्ष और विपक्ष आमने-सामने आ गए. इसी दौरान सत्ता पक्ष बजट पास कहकर सदन से बाहर निकल गया, जबकि विपक्ष हंगामा करने लगा.

टाइमलाइन

11.30 बजे मेयर-नगर आयुक्त सदन पहुंचे

11.55 तक पार्षदों का आना लगा रहा

12.00 के करीब सदन की शुरुआत

12.07 पर निगम उपाध्यक्ष अरुण कुमार तिवारी ने बजट पढ़कर समाप्त किया

2.00 बजे लंच हुआ

2.45 पर सदन फिर से शुरू

3.10 पर सत्ता पक्ष ने पुनरीक्षित बजट पास होने की घोषणा की

3.15 पर विपक्ष का हंगामा शुरू

ये रहीं खास बातें

1-जब विपक्ष बोला, लेट्स स्टार्ट

2-सदन में गूंजा शेम-शेम

3-पार्टी पर बात आते ही भाजपा-सपा पार्षद दिखे अलग-थलग

4-लेखाधिकारी ने सदन को संबोधित नहीं किया, पार्षदों ने किया विरोध

5-निगम के पर्यावरण अभियंता भी पार्षदों के निशाने पर रहेट

6-भाजपा पार्षद ने ही पूछ लिया रविवार को आयोजित स्वच्छता रैली पर कितना हुआ खर्च

7-पार्षद गिरीश मिश्रा का व्यंग्य, अगर विकास निधि से 30 मार्च तक हो जाएं काम तो सदन छोड़ दूंगा

8-करीब 8 से 10 साल बाद मेयर के खिलाफ हुई नारेबाजी

अध्यक्ष की व्यवस्था पर 'दुर्भाग्य' का ग्रहण
कांग्रेस पार्षद गिरीश मिश्रा ने सदन अध्यक्ष (मेयर) को संबोधित करते हुए कहाकि आपके द्वारा दी जाने वाली व्यवस्था पर 'दुर्भाग्य' का ग्रहण है. आपके निर्देशों को अनुपालन नहीं होता है. इस दुर्भाग्य को दूर करें, तभी विकास होगा.

10 लाख के सफाई उपकरण आएं, कहां हैं, पता नहीं..
सदन में उस वक्त हड़कंप सा मच गया, जब नेता सदन सपा सैय्यद यावर हुसैन रेशू ने सफाई उपकरणों की खरीद मद में बढ़ाई गई धनराशि के बारे में पूछा. जवाब देने के लिए डायस पर आए पर्यावरण अभियंता पंकज भूषण ने बताया कि गोमती सफाई के लिए करीब 10 लाख के सफाई उपकरण खरीदे गए थे. इस पर जब पार्षद ने पूछा कि अब वे सफाई उपकरण कहां हैं, तो वह जवाब नहीं दे सके. उन्होंने कहाकि जोन में दिए गए हैं. इस पर सभी पार्षद आक्रोशित हो गए. मेयर ने सफाई उपकरणों का सत्यापन कराने जाने के निर्देश दिए.


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