शहर में घूम रही 'मौत' गाड़ी

2019-07-04T06:00:05Z

- लोकल रूट पर गाडि़यों के अभाव में रिस्क लेकर सफर कर रहे पैसेंजर्स

- ऑटो, जीप और डग्गामार बसों में हो रही पैसेंजर्स की ओवरलोडिंग

- जर्जर गाडि़यां भी खुलआम सड़क पर भर रहीं फर्राटा

GORAKHPUR: शहर को हाईटेक बनाया जा रहा है। यहां इलेक्ट्रिक बसों समेत मेट्रो तक की कवायद चल रही है। लेकिन इससे पहले जो वास्तविकता है उससे भी इनकार नहीं किया जा सकता है। अब हर दिन शहर में आने-जाने वाले लोगों का ही हाल देख लीजिए। शहर में हर दिन लाखों लोग किसी ना किसी काम से जरूर आते हैं। लेकिन लोकल रूट पर सरकार की तरफ से कोई खास इंतजाम न होने की वजह से वे डग्गामार बस, ट्रैक्टर ट्रॉली, ट्रक, जीप और मैजिक में लटकर सफर करने को मजबूर हैं। ट्रक और ट्रैक्टर पर सफर करने वाले लोग इस लालच में उसमें बैठते हैं कि किराया कम लगेगा जबकि उन्हें ये नहीं मालूम कि इन गाडि़यों में सफर करते वक्त अगर कोई घटना हुई तो उन्हें या उनके घरवालों को भी कोई मुआवजा नहीं मिलेगा। क्योंकि सरकार ने इन गाडि़यों को यात्री सेवा का लाइसेंस नहीं दिया है।

शहर में ऑटो चालक करते मनमानी

शहर में चलने वाले ऑटो कोई भी मानक पूरा नहीं करते हैं। एक्स्ट्रा सीट लगाकर ऑटो में मानक से ज्यादा पैसेंजर्स भरते हैं। सबसे ज्यादा दिक्कत महिलाओं को होती है जो ऑटो चालक की मनमानी के आगे कुछ बोल नहीं पाती हैं। भीड़ में लदकर उन्हें भी मजबूरी में सफर करना पड़ता है।

ओवरलोड बसों से हो सकता हादसा

शहर में लोकल रूटों पर परिवहन निगम की तरफ से कोई खास इंतजाम नहीं है। परिवहन निगम की ज्यादातर बसें लॉन्ग रूट पर चलती हैं। ये लोकल पैसेंजर्स को बैठाने से भी कतराते हैं। इस कारण घर जल्दी पहुंचने के लिए डग्गामार बसों और अन्य गाडि़यों में सफर करना लोकल पैसेंजर्स की मजबूरी है। वहीं लोकल डग्गामार बसों की बात करें तो ये पैसे की खातिर सीट से दोगुने पैसेंजर्स बैठाते हैं जो अक्सर हादसे का कारण बनता है। इसका पैसेंजर्स भी विरोध नहीं कर पाते हैं। वो पैसा देकर भी इन गाडि़यों में ठुंसकर जाने को मजबूर हैं।

आरटीओ भी नहीं करते चेक

खुलेआम चल रहे डग्गामार और जर्जर वाहनों पर शिकंजा कसने के लिए गोरखपुर आरटीओ भी कुछ खास इंट्रेस्ट नहीं दिखाते हैं। जिसकी वजह से डग्गामार बसें ओवरलोड पैसेंजर्स बैठाकर फर्राटा भर रही हैं। आरटीओ टीम साल में एक या दो बार अभियान के समय सड़क पर दिखाई देती है। इसी समय वे कार्रवाई कर कोरम पूरा कर लेते हैं।

कई बार हो चुका है हादसा

जर्जर बसों और ऑटो से आए दिन हादसे होते रहते हैं। हादसे की जांच में ज्यादातार मामलों में जर्जर गाड़ी या फिर ओवरलोड होने की वजह से कंट्रोल न कर पाना जैसी वजह सामने आती है। इसके बाद भी अफसर इन पर कार्रवाई करने से बचते हैं। सूत्रों की मानें तो इसके लिए डग्गामार वाहनों का पैसा भी बंधा हुआ है। जिसकी वजह से इनपर कार्रवाई नहीं होती है।

वर्जन

ओवरलोड और जर्जर वाहनों को पकड़कर सीज किया जाता है। इधर सड़क सुरक्षा अभियान में लोगों को जागरूक भी किया जा रहा है। कुछ गाडि़यां अभी भी छुप-छुपकर चलती रहती हैं जिनपर कार्रवाई की जाएगी।

- डीडी मिश्रा, आरटीओ प्रवर्तन


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