जड़ीबूटी से होगा पलायन का इलाज

2017-12-14T07:00:29Z

- जड़ी-बूटी और चाय का उत्पादन बढ़ाने की हो रही कोशिश

- को-ऑपरेटिव फार्मिग, कॉन्ट्रे1ट फॉर्मिग व लीज फॉर्मिग पर हो रहा मंथन

DEHRADUN: पर्वतीय क्षेत्रों में पलायन रोकने व निवेशकों को आकर्षित करने के लिए जड़ी-बूटी और चाय के उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए लीज फॉर्मिग पर सरकार विचार कर रही है। सरकार राज्य के किसानों के अलावा बाहरी क्षेत्रों से भी निवेश के रास्ते खोलने के लिए योजना बना रही है। इसके लिए को-ऑपरेटिव फार्मिग, कॉन्ट्रेक्ट फॉर्मिग व लीज फॉर्मिग पर विचार किया जा रहा है।

एक्सप‌र्ट्स की कमेटी गठित

जानकारी देते हुए सचिव उद्यान एवं रेशम डी सेंथिल पाण्डियन ने बताया कि इसके लिए कार्ययोजना बनाने व नीति निर्धारित किये जाने के लिए विशेषज्ञ समिति का गठन किया गया है। विशेषज्ञ समिति में अपर सचिव उद्यान को अध्यक्ष नामित किया गया है। जबकि उद्यान विभाग के निदेशक, जड़ी-बूटी शोध एवं विकास संस्थान गोपेश्वर के डायरेक्टर, उलराखंड चाय विकास बोर्ड अलमोडा, मुख्य कार्यकारी अधिकारी भेषज विकास इकाई देहरादून, वैज्ञानिक प्रभारी सगंध पौधा केन्द्र सेलाकुई देहरादून, सचिव राजस्व को विशेषज्ञ समिति में मेंबर्स नामित किया गया है। सचिव उद्यान ने बताया कि उक्त समिति द्वारा राज्य में आगामी 8-10 वषरें के लिए एक वृहद कार्ययोजना तैयार करते हुए एक माह के अंदर रिपोर्ट शासन को उपलब्ध कराने के लिए कहा गया है।


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