पलायन की नौबत सरकारें ही लाईं एनएचआरसी

2017-07-15T07:40:14Z

16793 गांवों में से तीन हजार गांव पूरी तरह हुए खाली।

2.50 लाख से ज्यादा घरों में लटके ताले।

36401 घर अल्मोड़ा में हुए खाली।

35654 घर पौड़ी में हुए खाली।

33689 घर टिहरी में हुए खाली।

22936 पिथौरागढ़ के घरों में ताले लगे।

शिक्षा और स्वास्थ्य जैसी बुनियादी सुविधाएं न होने के कारण हो रहा पलायन

आयोग ने अफसरों से मांगा जवाब

DEHRADUN: प्रदेश के पहाड़ी क्षेत्रों से हो रहे पलायन पर राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने चिंता जताते हुए सरकारों को जिम्मेदार ठहराया है। आयोग के सदस्यों का कहना है कि शिक्षा और स्वास्थ्य जैसी बुनियादी सुविधाएं न होने के कारण यह नौबत आई है। आयोग ने इस पर अधिकारियों से जवाब भी मांगा है।

अफसरों के साथ की बैठक

शुक्रवार को राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के दो दिवसीय समारोह के समापन अवसर पर आयोग के सदस्य एवं न्यायाधीश पीसी घोष, डी। मुरुगेशन और ज्योति कालरा ने शासन के अफसरों के साथ बैठक की। आयोग के सदस्यों ने कहा कि शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधा मनुष्य की मूलभूत आवश्यकता है, लेकिन विडंबना ही है कि सरकारें इन सेवाओं को उपलब्ध कराने में नाकाम रही हैं। आयोग ने फटकार लगाते हुए कहा कि सरकारी अस्पतालों में डॉक्टर, नर्स, पैरा मेडिकल स्टाफ और विशेषज्ञ डॉक्टरों की जबरदस्त कमी है। इससे आमजन को उचित उपचार नहीं मिल पा रहा है। उन्होंने इस दिशा में आवश्यक सुधार करने के निर्देश दिए।

आयोग ने जताई निराशा

इसके अलावा उन्होंने मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं की दिशा में कोई प्रगति न होने पर भी निराशा जताई। कहा कि इस संबंध में पूर्व में भी शासन को नोटिस जारी किया जा चुका है। आयोग ने अधिकारियों को शीघ्र कार्रवाई के निर्देश देते हुए प्रगति रिपोर्ट भी सौंपने को कहा। बैठक में प्रमुख सचिव मनीषा पंवार, अपर मुख्य सचिव रणबीर सिंह, अपर सचिव ओमप्रकाश, पर्यटन सचिव मीनाक्षी सुंदरम, डीजीपी एमए गणपति समेत अधिकारी मौजूद रहे।

क्म् साल में तीन हजार गांव हुए खाली

उत्तराखंड राज्य के बने हुए क्म् साल हो गए हैं और इस अंतराल में प्रदेश के कुल क्म्79फ् गांवों में से तीन हजार गांव पूरी तरह खाली हो गए। ढाई लाख से ज्यादा घरों में लटके ताले पहाड़ की पीड़ा को बयां करने के लिए काफी हैं। खाली घरों की सर्वाधिक संख्या अल्मोड़ा (फ्म्ब्0क्) और पौड़ी (फ्भ्म्भ्ब्) में है। हालांकि टिहरी और पिथौरागढ़ जैसे जिलों की स्थिति भी बहुत बेहतर नहीं है। टिहरी में फ्फ्म्89 और पिथौरागढ़ में ख्ख्9फ्म् घरों में ताले लगे हुए हैं।


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