रिम्स में अब सभी पैथोलॉजी टेस्ट फ्री

2018-08-18T06:00:34Z

RANCHI: रिम्स ओपीडी में इलाज के लिए आने वाले मरीजों का अब सभी पैथोलॉजी टेस्ट फ्री में होगा। ऐसे में मरीजों को अब साइन कराने के लिए इंतजार नहीं करना होगा। वहीं सीधे लैब में जाकर वे अपना टेस्ट करा सकेंगे। इससे मरीजों का टाइम बचेगा, वहीं इलाज भी समय से शुरू हो पाएगा। प्रबंधन को भी साइन के चक्कर में होने वाली परेशानियों से छुटकारा मिल जाएगा। सुपरिंटेंडेंट डॉ। विवेक कश्यप स्वास्थ्य मंत्री रामचंद्र चंद्रवंशी के सामने यह प्रस्ताव रखने की तैयारी में है, ताकि इलाज के लिए आने वाले मरीजों को राहत मिल सके।

250 तक के टेस्ट पहले से फ्री

हॉस्पिटल में इलाज के लिए हर दिन 1500 मरीज आते हैं, जहां उन्हें पैथोलॉजी टेस्ट कराने की सलाह दी जाती है। ऐसे में रिम्स में 250 तक का पैथोलॉजी टेस्ट पहले से फ्री कर दिया गया है। लेकिन 50 टेस्ट अब भी इस कैटेगरी से बाहर हैं। इसका चार्ज मात्र 20-50 रुपए के बीच है। ऐसे में टेस्ट कराने के लिए मरीजों को कैश काउंटर में लाईन लगनी पड़ती है। इस चक्कर में कई बार उनका पूरा दिन निकल जाता है। ऐसे में जांच के लिए दूसरे दिन का इंतजार करने के अलावा कोई चारा नहीं होता। वहीं, कई टेस्ट ऐसे भी हैं, जिसका चार्ज 250 रुपए से ऊपर है।

लाल-पीला कार्ड वालों का चार्ज नहीं

लाल कार्ड और पीला कार्ड वालों का सभी टेस्ट फ्री में हो जाता है। इसके लिए मरीजों की पर्ची पर अधिकारी से साईन कराने के बाद उनका फ्री टेस्ट किया जाता है। इसमें पैथोलॉजी टेस्ट से लेकर सिटी स्कैन, अल्ट्रासाउंड भी शामिल है। वहीं भर्ती मरीजों के लिए एमआरआई भी फ्री में की जाती है। जबकि एपीएल को 250 से ऊपर की सभी जांच के लिए कैश काउंटर से पर्ची कटानी होती है। इसके बाद ही मरीजों की जांच की जाती है।

पीएमसीएच व एमजीएम में नहीं लगता चार्ज

राज्य में रिम्स को छोड़कर अन्य दोनों मेडिकल कॉलेजों में पैथोलॉजी टेस्ट के लिए कोई चार्ज नहीं लगता है। मरीज को जांच के लिए पर्ची पर लिखा जाता है तो सीधे वे लैब में जाकर सैंपल जमा करा देते हैं। ऐसे में न तो उन्हें लाईन में घंटों इंतजार करना होता है और न ही साईन कराने का झंझट। ऐसे में रिम्स में फ्री टेस्ट लागू होने से मरीजों को राहत मिल जाएगी। साथ ही वे दिन भर में इलाज कराकर अपने घर भी लौट सकेंगे।

वर्जन

मरीजों को छोटी-छोटी जांच के लिए भी साईन कराना होता है। इस चक्कर में अधिकारी परेशान होते है और मरीज भी। इसलिए स्वास्थ्य मंत्री के सामने इस प्रस्ताव को रखा जाएगा। इसका थोड़ा बोझ रिम्स पर बढ़ेगा लेकिन इससे मरीज को राहत मिल जाएगी। वहीं अधिकारी भी हॉस्पिटल की व्यवस्था सुधारने पर ध्यान दे सकेंगे।

डॉ.विवेक कश्यप, सुपरिंटेंडेंट, रिम्स

Posted By: Inextlive

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