पॉल्यूशन रोकने में फेल हुए मास्क

2018-11-12T06:01:11Z

हाई लेवल पर पहुंचे पॉल्यूशन लेवल के आगे परेशान हुए लोग

-मार्केट में बिकने वाले कपड़े के मास्क से नहीं रुक रहे धूल-धुएं के कण

फैक्ट फाइल

पार्टिकल तय मानक शहर में लेवल

पीएम 10 100 500

पीएम 2.5 60 200

इन वजहों से बढ़ा है पॉल्यूशन लेवल

-शहर में सीवर लाइन बिछाने के लिए बेतरतीब खोदी गई सड़कें और पुलों का निर्माण कार्य है।

-रही-सही कसर दिवाली पर पटाखों और आतिशबाजी ने कर दिया है।

-इसकी वजह से चारों ओर स्मॉग की सफेद चादर नजर आने लगी है।

vineet.tiwari@inext.co.in

PRAYAGRAJ: शहर का पॉल्यूशन लेवल इस कदर बढ़ा है कि मार्केट में बिक रहे मास्क भी पर्याप्त साबित नहीं हो रहे। जो लोग मास्क का यूज कर रहे हैं उनको भी सांस लेने में दिक्कत महसूस होने लगी है। खुद डॉक्टर भी इस बात को मान रहे हैं। उनका कहना है कि धूल और धुएं के कण इतने बारीक हैं कि बाजार में बिकने वाले आम मास्क से इनको रोकना आसान नहीं है।

दिवाली पर बढ़ गए मरीज

हवा में पॉल्यूशन फैलाने वाले धूल और धुएं के कणों का मानक मापने के लिए पीएम 10 और पीएम 2.5 स्केल का सहारा लिया जाता है। इनके जरिए पॉल्यूशन की पुष्टि होती है। पिछले एक सप्ताह में शहर का पीएम 10, 5 से 6 गुना तक बढ़ा हुआ है। यही हाल पीएम 2.5 का है। यह अपने निर्धारित मानक से 5 गुना अधिक हो चुका है। यही कारण है कि जहरीली हवा के प्रभाव में आकर मरीजों की संख्या में तेजी से इजाफा हुआ है और वह ओपीडी में दस्तक दे रहे हैं। अधिकतर मरीज एलर्जी के हैं जिनको लगातार खांसी और जुकाम बना हुआ है। जबकि अस्थमा और सीओपीडी के पुराने मरीजों को भी पॉल्यूशन से दिक्कत महसूस हो रही है।

इस पॉल्यूशन के जरूरी है एन-95

स्वाइन फ्लू फैलने पर डॉक्टर्स एन-95 मास्क को डॉक्टर्स साइंटिफिकली एडवाइस करते हैं। उसी प्रकार शहर में मौजूदा पॉल्यूशन के लेवल पर इस मास्क को बेहतर बताया जा रहा है। एक्सप‌र्ट्स का कहना है कि इस मास्क की ट्रिपल लेयर बारीक धूल के कणों को सांसों में जाने से काफी हद तक रोक देती है। फिर भी खतरा बना रहना स्वाभाविक माना जाता है। लेकिन साधारण मास्क की अपेक्षा एन 95 बेहतर विकल्प साबित हो सकता है।

वर्जन

शहर में पॉल्यूशन इस लेवल पर पहुंच चुका है कि साधारण मास्क से उसको रोकना मुश्किल है। इससे बचाव के लिए लोगों को एन-95 सर्जिकल मास्क का उपयोग करना होगा। उससे भी बहुत अधिक बचना मुश्किल है। सुबह-शाम घर के भीतर रहने में भलाई है।

-डॉ। आशुतोष गुप्ता, चेस्ट स्पेशलिस्ट

हमारी संस्था ने प्रयागराज के जिला प्रशासन से पॉल्यूशन से बचाव के लिए उपाय खोजने की मांग की है। इससे आमजन को बढ़ते प्रदूषण से बचाया जा सके। पैरामीटर पर आने वाले मानक वाकई खतरनाक हैं।

-ओम प्रकाश, अभियानकर्ता, द क्लाइमेट एजेंडा


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