कौन संभालेगा जानलेवा पोल और खंभे

2015-05-25T07:00:54Z

-तेज आंधी में कभी भी गिर सकते हैं पेड़ और खंभे

- हादसों की बाट जोह रहे कई इलाकों में खुले ट्रांसफार्मर

तेज आंधी में कभी भी गिर सकते हैं पेड़ और खंभे

- हादसों की बाट जोह रहे कई इलाकों में खुले ट्रांसफार्मर

Meerut: Meerut: एक ओर जहां प्राकृतिक आपदा कहर बनकर मानव जीवन को लील रही है। वहीं सरकारी विभागों की लापरवाही भी शहरवासियों के सामने मौत बनकर खड़ी है। शहर की सड़कों लटके जर्जर यूनिपॉल कभी भी हादसों का सबब बन सकते हैं। तो आंधी का एक तेज झोंका सड़कों पर झूल रहे बिजली के खंभों और आडे तिरछे वृक्षों को दुर्घटना में बदल सकता है।

खुले पडे़ ट्रांसफार्मर

महानगर में इस समय साढ़े तीन हजार से अधिक छोटे-बड़े डिस्ट्रीब्यूशन ट्रांसफार्मर पॉवर सप्लाई का माध्यम बने हुए हैं। यहां चौंकाने वाली बात यह है कि इनमें से बीस फीसद ट्रांसफार्मर विभाग ने खुले में ही रखकर छोड़े हैं। विभाग की लापरवाही का आलम यह है कि गली-मोहल्लों और रिहायशी इलाकों में रखे ट्रांसफार्मर सुरक्षा इंतजामों के अभाव में हर रोज दुर्घटनाओं का कारण बन रहे हैं।

झूल रहे बिजली के खंभे

यह नगर निगम और बिजली विभाग की लापरवाही का ही परिणाम है कि शहर की सड़कों पर झूल रहे खंभों ं को आसानी से देखा जा सकता है। हवा में झूल रहे या फिर अन्य खंभों के सहारे टिके ये खंभे कभी शहर में बड़े हादसों की वजह बन सकते हैं। विभागों की लापरवाही का यह आलम तो तब है जब इस तरह के हादसे कई लोगों के जीवन को लील चुके हैं। बावजूद इसके विभाग हरकत में आने को तैयार नहीं है।

जर्जर हो चुके यूनिपॉल

यह बात छुपी नहीं है कि शहर में लगे यूनिपॉल दर्जनों बार बड़े हादसों को जन्म दे चुके हैं। नगर निगम की ओर से विज्ञापन एजेंसियों को यूनिपॉल लगाने के कांट्रेक्ट तो दिए जाते हैं। जिस पर ये एजेंसियां अफसरों से सांठ गांठ कर पूरे शहर को अवैध होर्डिग और यूनिपॉल से पाट देते हैं। परिणाम यह होता है कि ये आधे अधूरे मानकों पर टिके ये यूनिपॉल शहरवासियों के लिए आफत परोस देते हैं।

एचटी लाइनों में दौड़ती मौत

शहर में बना एचटी लाइनों का मकड़जाल भी अब तक न जाने कितने हादसों को जन्म दे चुका है। वभाग की ओर से लाइन खींचने के बाद सालों तक इन लाइनों को चेक नहीं किया जाता। नतीजन लाइनें पुरानी पड़ कर झूलने लगती हैं और नीचे स्थित मकानों, दुकानों और वाहनों के लिए आफत खड़ी कर देती हैं। तकनीकी रूप से यदि देखा जाए तो दस साल बाद विद्युत लाइनों की क्षमता क्षीण पड़ने लगती है, जिसकी वजह से उनका टूटना और स्पार्किंग शुरू हो जाती है।

ये हुए हैं हादसे

-लोहियानगर स्थित एक मकान में लगी आग को इस वजह से नहीं बुझाया गया कि ट्रांसफार्मर में लाइन चेंजर मौजूद नहीं था। परिणाम सात लोग जिंदा जले

-पिछले दिनों आए आंधी और तूफान के चलते पेड़ टूटकर बिजली की लाइनों पर गिरे। 48 घंटों तक अंधेरे में डूबा रहा शहर। विभाग को पचास लाख का नुकसान


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