Political Managers!

2012-01-14T00:00:00Z

नेताओं के चुनाव को मैनेज करने में लगे हैं दर्जनों MBA passouts क्या बोलना है कहां बोलना है कौन से local issues पर जोर देना है सब कुछ plan करते हैं ये Laptop से लैस साये की तरह रहते हैं नेता के साथ लाखों में है salary package

Lucknow: नेताजी को कहां पर कै म्पेन चलाना है और कहां पर उनको प्रमोशन की जरूरत है, किस एरिया में कितने वोटों को टारगेट करना है, इस बार इलेक्शन में नेताजी के चुनावी दौरों से लेकर उनका सारा शेड्यूल, सबकुछ बेहतरीन एमबीए कॉलेज से पास आउट मैनेजर्स तय कर रहे हैं. वह पूरे दौरे में बाकायदा नेताजी के साथ रहते हैं और मजबूत तथा कमजोर कडिय़ों को नोट करते हुए आगे बढ़ते हैं.
जी हां, बदलते दौर के साथ-साथ चुनावी रंग भी तेजी से बदले हैं. कल तक जो नेता सैकड़ों समर्थक और शोर शराबे के साथ प्रचार करने के लिए निकलते थे उनकी जगह अब पॉलीटिकल मैनेजर्स ने ले ली है. हर पल उनकी वेबसाइट अपडेट करने के साथ-साथ वे उनके लिए चुनावी महाभारत में संजय की भूमिका निभा रहे हैं.

पूरा कैम्पेन कर रहे हैं मैनेज
सिटी के एक प्रत्याशी का चुनाव मैनेज कर रहे एमबीए पासआउट विवेक ने बताया कि चुनाव से पहले ही प्रत्याशी का चुनाव कैम्पेन तय करना पड़ता है. इसमें सबसे पहले यह जानना होता है कि प्रत्याशी के चुनावी मुद्दे क्या हैं? उसमें से जो मेन-मेन इश्यू होते हैं उनको छांटना पड़ता है.
इसके साथ ही क्षेत्र में सर्वे करके यह जानना पड़ता है कि जनता का रुझान किस इश्यू पर है. उसके बाद फिर उस इश्यू को टारगेट करके लोगों को अपने प्रत्याशी से जोडऩे का काम करते हैं. यह क्षेत्रीय चुनाव है इसलिए राष्ट्रीय इश्यू से ज्यादा यहां पर आम जनता के जो क्षेत्रीय इश्यू हैं. अगर उनको लेकर काम किया जाए तो फिर अचानक प्रत्याशी का वोट बैंक बढ़ जाता है.
हर क्षेत्र में अलग इश्यू पर बात
रामस्वरूप कालेज से पास आउट एक चुनावी मैनेजर के मुताबिक प्रत्याशी जिस क्षेत्र से चुनाव लड़ रहा है. उसमें कई छोटे-छोटे इलाके आते हैं. जिसमें हर इलाके की अलग प्राब्लम होती हैं. मसलन कहीं पर रेलवे क्रासिंग बड़ी प्राब्लम है तो कहीं पर बाढ़ या फिर किसी इलाके में बिजली और पानी की समस्या है.
तो ऐसे में हर प्रत्याशी एक ही मुददे को लेकर अलग-अलग क्षेत्र की जनता का दिल नहीं जीत सकता है. इलेक्शन से पहले ही प्रत्याशी के हर क्षेत्र का सर्वे कर लिया जाता है और प्रत्याशी को बता दिया जाता है कि किस क्षेत्र में किस मुद्दे पर ज्यादा जोर देना है. यही नहीं किस तरह से जनता को उनकी बातों पर यकीन दिलवाना है यह भी मैनेजर्स ही संभाल रहे हैं.
कहां पर हुई चूक
अगर किसी पार्टी के प्रत्याशी को पिछली बार हार का मुंह देखना पड़ा तो इसके लिए मैनेजर्स को अलग तरह की स्ट्रैटजी बनाना पड़ती है. आईएफसीआई, नई दिल्ली से एमबीए पासआउट आजकल लखनऊ में एक नेता जी के कैम्पेन को मैनेज कर रहे हैं. उन्होंने बताया कि पिछले साल नेताजी को कितने वोट मिले थे यह पता करना पड़ता है.
किस-किस बूथ पर कम वोट मिले थे और हार की वजह क्या थी. इस इलाके का जातिगत समीकरण क्या है. पिछली बार प्रत्याशी ने किन-किन मुददों को लेकर चुनाव लड़ा था और कौन से इश्यू छोड़ दिए थे. उसके बाद नई प्लानिंग और इश्यू के साथ प्रत्याशी को मैदान में लडऩे के लिए लाना पड़ता है.
फंड भी करते हैं मैनेज
ऐसे ही एक और बड़े मैनेजमेंट कॉलेज से आए चुनावी मैनेजर ने बताया कि पूरे चुनाव के दौरान सबसे अहम प्रत्याशी का प्रमोशन रहता है किस जगह पर उसका कितना प्रमोशन करना है, कौन कौन से मीडिया में ऐड देना है. कहां पर प्रत्याशी को डेवलपमेंट की जरूरत है.
उसके दिन का शेड्यूल क्या रहना चाहिए किस इलाके में उसको कितनी मेहनत की जरूरत है. मैनेजर्स का कहना है कि इसमें सबसे अहम होता है फंड मैनेज करने का क्योंकि चुनाव आयोग ने प्रत्याशी को पैसा खर्च करने की एक लिमिट कर दी है. इसलिए प्रत्याशी का फंड मैनेज करना भी सबसे बड़ी चुनौती है.
जैसा अनुभव वैसा दाम
इस पूरे इलेक्शन मैनेजमेंट के लिए चुनावी मैनेजर एक से डेढ़ लाख रुपए का पैकेज लेते हैं. मैनेजर्स के मुताबिक अगर बंदा नया है तो उसका पैकेज कुछ कम होता है. कहीं-कहीं मैनेजर्स की पूरी टीम लगाई जाती है किसी टीम में चार मेंबर होते हैं तो किसी में पांच की टीम होती है.
पल-पल का एलर्ट
उत्तर विस क्षेत्र से सपा प्रत्याशी अभिषेक मिश्रा ने बताया कि हर फील्ड में मैनेजमेंट की जरूरत है. वह तो आईआईएम अहमदाबाद में प्रोफेसर थे.  उन्होंने बताया कि एमबीए पासआउट स्टूडेंट्स की टीम उन्हें पूरा सपोर्ट कर रही है. यह मैनेजमेंट का ही खेल है कि हम अपने लेबर को कैसे डिवाइड कर सकते हैं.
पूरी ताकत एक ही जगह झोंकने से अच्छा है कि इस ताकत को डिस्ट्रीब्यूट करें. इसके अलावा टेक्नोलॉजी तो बहुत ही जरूरी है. फेस बुक, ट्विटर, गूगल अलर्ट पर उन्हें पल-पल की जानकारी मिल जाती है. इसके अलावा एक एक्सपट्र्स का पैनल भी उनके पास है. जिसमें सभी फील्ड के एक्सपट्र्स इलेक्शन पर अपनी राय रखते हैं और फिर उसी तरह प्रचार को मोटीवेट किया जाता है.
छह महीने पहले से तैयारी
पश्चिम विस क्षेत्र से सपा प्रत्याशी रेहान नईम भी एमबीए पास आउट हैं. इसलिए इलेक्शन में वह भी मैनेजमेंट का सहारा ले रहे हैं. करीब छह महीने पहले ही उन्होंने तैयारी शुरू कर दी थी.
उन्होंने बताया कि छह महीने पहले ही पूरे क्षेत्र का डाटा बैंक वह तैयार कर चुके हैं. फेस बुक पर यंगस्टर्स क्षेत्र की परेशानियों को उनसे शेयर कर रहे हैं. यहां किए सर्वे के आधार पर ही वह चुनावी इश्यू को उठा रहे हैं.
Reported By: Abbas Rizvi



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