जब दक्षिण अफ्रीका से भारत लौटे महात्‍मा गांधी ऐसे मनाया गया था जश्न

2019-01-09T08:30:17Z

आज 9 जनवरी को प्रवासी भारतीय दिवस के रूप में मनाया जा रहा है। आज ही के दिन महात्‍मा गांधी दक्षिण अफ्रीका से भारत लौटे थे। एेसे में जानें इस खास दिन के बारे में

कानपुर। भारत में प्रवासी भारतीय दिवस हर साल 9 जनवरी को मनाया जाता है। इस अवसर पर तीन दिवसीय कार्यक्रम आयोजित होते हैं। इतिहास के पन्नों पर नजर डालें तो यह दिन महात्मा गांधी के दक्षिण अफ्रीका से लाैटने की खुशी में मनाया जाता है। एक भारतीय बैरिस्टर के रूप में साउथ अफ्रीका से आने पर 9 जनवरी, 1915 में महात्मा गांधी जी का स्वागत हुआ था।

स्वागत समारोह में शरीक हुर्इ भारत सरकार

महात्मा गांधी की भारत वापसी को लेकर एक आधिकारिक वेबसाइट एमकेगांधी डाॅट आेअारजी के मुताबिक जब गांधी जी बॉम्बे में अपोलो बंदरगाह पर उतरे तो उनका भव्य स्वागत किया गया। इसके तीन दिन बाद बॉम्बे मैग्नेट जहंगीत पेटिट के महलनुमा घर में भी उनके सम्मान में लोगों ने शानदार स्वागत समारोह आयोजित किया था। इस समारोह में भारत सरकार भी शामिल हुर्इ थी।
दक्षिण अफ्रीका से संघर्ष कर लाैटे थे भारत
इतना ही नहीं महात्मा गांधी को 1915 में सरकार की ओर से 'कैसर-ए-हिन्द' स्वर्ण पदक प्रदान किया गया। गांधी जी से लोगों को काफी उम्मीदें क्योंकि एक प्रवासी वकील के रूप में महात्मा गांधी ने दक्षिण अफ्रीका में भारतीय समुदाय के लोगों के नागरिक अधिकारों के लिये काफी संघर्ष किया था। इस दाैरान महात्मा गांधी जी को दक्षिण अफ्रीका जेल यात्रा भी करनी पड़ी थी।
देश को अंग्रेजों से आजाद कराने में आगे आए
वहीं भारत आगमन के बाद गांधी जी यहां देश को अंग्रेजों से आजाद कराने की दिशा में बढ़ने लगे। गांधी जी की विशेष भूमिका वाला सत्याग्रह आन्दोलन 1917 चम्पारण जिले में हुआ था। गांधी जी ने न सिर्फ भारत को आजादी दिलाया बल्कि पूरी दुनिया में लोगों को नागरिक अधिकारों एवं स्वतन्त्रता के प्रति आन्दोलन के लिये प्रेरित किया। दक्षिण अफ्रीका इसका बड़ा उदाहरण था।
गांधी जी ने अहिंसा और सत्य का पालन किया
बता दें कि महात्मा गांधी का पूरा नाम मोहनदास करमचंद गांधी था। 2 अक्टूबर, 1869 में गुजरात के पोरबंदर में जन्में गांधी जी ने सत्याग्रह आैर अंग्रेजो भारत छोड़ो आन्दोलन में विशेष भूमिका निभार्इ थी। गांधी जी ने सभी परिस्थितियों में अहिंसा और सत्य का पालन किया। सादा जीवन बिताने के लिए उन्होंने परम्परागत भारतीय पोशाक धोती व सूत से बनी शाल को धारण किया।

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