संसद भवन हमले की 18वीं बरसी : राष्ट्रपति कोविंद ने शहीदों को दी श्रद्धांजलि

Updated Date: Fri, 13 Dec 2019 11:36 AM (IST)

आज यानी कि 13 दिसंबर को भारतीय संसद भवन पर हुए आतंकी हमले की 18वीं बरसी है। 13 दिसंबर 2001 का वो भयानक दिन आज भी भारतवासियों को अंदर से दहला देता है। इस मौके पर राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद ने सभी शहीदों को श्रद्धांजलि दी है।

नई दिल्ली (पीटीआई)। राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद और केंद्रीय मंत्रियों ने शुक्रवार को उन लोगों को श्रद्धांजलि दी जिन्होंने 2001 के संसद हमले में अपनी जान गंवाई थी। अठारह साल पहले 13 दिसंबर को लश्कर-ए-तैयबा (एलईटी) और जैश-ए-मोहम्मद (जेएम) के आतंकवादियों ने संसद परिसर पर हमला किया था, जिसमें नौ लोग शहीद हो गए थे। इनमें में दिल्ली पुलिस के पांच जवान, केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) की एक महिला जवान, दो संसद सदस्य, वार्ड स्टाफ और एक माली शामिल थे।इसके अलावा, इस हमले में घायल हुए एक पत्रकार की बाद में मौत हो गई थी। सभी पांच आतंकवादियों को गोली मार दी गई थी।
राष्ट्रपति ने शहीदों के साहस को किया याद
राष्ट्रपति कोविंद ने एक ट्वीट में कहा, 'एक कृतज्ञ राष्ट्र 2001 में इस दिन आतंकवादियों से संसद का बचाव करते हुए अपने प्राणों की आहूति देने वाले शहीदों के अनुकरणीय शौर्य और साहस को सलाम करता है। हम अपने सभी रूपों और अभिव्यक्तियों में आतंकवाद को हराने और खत्म करने के अपने संकल्प में दृढ़ हैं।' वहीं, केंद्रीय कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने ट्वीट किया, 'आज हम उन शहीदों को याद करते हैं जिन्होंने आतंकवादी हमले से भारत की संसद का बचाव और रक्षा के लिए अपने प्राणों का बलिदान दिया।'

A grateful nation salutes the exemplary valour and courage of the martyrs who sacrificed their lives while defending the Parliament from terrorists on this day in 2001. We remain firm in our resolve to defeat and eliminate terrorism in all its forms and manifestations.

— President of India (@rashtrapatibhvn) December 13, 2019
केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने शहीदों को किया सलाम

केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने हमले में जान गंवाने वाले बहादुरों को सलाम किया। उन्होंने ट्वीट किया, 'मैं उन बहादुरों को श्रद्धांजलि देने के लिए एक कृतज्ञ राष्ट्र में शामिल होता हूं, जिन्होंने 2001 में इस दिन एक नृशंस आतंकी हमले के खिलाफ हमारी संसद का बहादुरी से बचाव करने के लिए अपने प्राणों का बलिदान दिया था। नया भारत हमेशा अपनी निस्वार्थता, भाग्य और साहस के लिए उनका ऋणी रहेगा।'
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Posted By: Mukul Kumar
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