चलती बस में लगी आग 40 पैसेंजर्स की बची जान

2019-07-10T06:00:35Z

फ्लैग- बूंदाबांदी की वजह से नहीं फैली लपटें, जान बचाने के लिए कूदे यात्री

- यूपी 86टी-0999 बस जयपुर से बरेली आ रही थी

- 380 के करीब हैं जिले में प्राइवेट बसें

- 30-40 के करीब बसें बदायूं रोड पर चलती हैं, इनमें परमिट कुछ का ही

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- जयपुर से लौट रही बस में शार्ट सर्किट से लगी आग

- पुलिस-प्रशासन को भनक तक नहीं लगेगी

बरेली : जयपुर से बरेली आ रही एक प्राइवेट बस में ट्यूजडे को शॉर्ट सर्किट से आग लग गई। बस में 40 सवारियां बैठी थीं। आग लगने का पता चलते ही की जानकारी जैसे ही पैसेंजर्स को मिली चीख-पुकार मच गई। बस ड्राइवर और कंडेक्टर बस को चौपुला पर छोड़कर फरार हो गए। जबकि सवारियों ने बस से कूद कर जान बचाई। सूचना मिलते ही फायर ब्रिगेड गाड़ी मौके पर पहुंची और बस में सुलग रही वायरिंग की आग बुझाई। गनीमत रही बस की वायरिंग की आग बस में नहीं लग पाई वर्ना बड़ा हादसा हो सकता था।

समय रहते बुझा ली गई आग

आग को समय रहते बुझा लिया गया। बस (यूपी86टी-0999) जयपुर से बरेली आ रही थी। उसमें करीब 40 सवारियां बैठी थीं। बस जैसे ही चौपुला के पास पहुंची। उसके इंजन से धुआं निकलने लगा। पता चलते ही बस के अंदर चीख पुकार मच गई। ड्राइवर ने बस साइड में लगाई और कूदकर भाग गया।

जान बचाने के लिए कूदे यात्री

बस के रुकने से पहले ही सवारियां कूद कर बाहर आ गई। सूचना पर पहुंची फायर ब्रिगेड ने आग पर काबू पाया। बस में पानी का छिड़काव करने से अंदर रख यात्रियों का सामान भी खराब हो गया। गनीमत यह रही कि बूंदाबांदी हो रही थी। जिस कारण बस ने बाहर से आग नहीं पकड़ी साथ ही आग फैल भी नहीं सकी। अगर बरसात का मौसम नहीं होता तो चलती बस में आग लगने से भीषण हादसा हो सकता था।

मानक के विपरीत चल रहीं बसें

अकेले बदायूं रोड पर ही देख लें तो करीब 30-40 बसें यहां से चलती हैं। जबकि इनमें परमिट महज कुछ की ही हैं। बगैर परमिट के खुर्रम गौटिया के पास रात में बसें खड़ी हो जाती हैं यहां से दिल्ली व जयपुर के लिए बसें जाती हैं। प्राइवेट बस स्वामियों की पुलिस से लेकर परिवहन विभाग में इस कदर पकड़ है कि उनकी बसों को कोई सीज नहीं करता। बेधड़क चलने वाली इन बसों से दर्जनों बार हादसे हो चुके हैं।

ड्राइवर्स का आई टेस्ट तक नहीं

डग्गामार बसों को दौड़ाने वाले चालकों का कभी आई टेस्ट तक नहीं किया जाता। कई ऐसे चालक भी हैं जो काफी बूढ़े थे और उनकी आंखों में हाई पावर के चश्मे लगे थे। डग्गामार वाहन चलाने वाले कुछ लोगों से बातचीत से पता चला कि बसों को सड़क पर दौड़ाने के बदले यह आरटीओ के साथ रास्ते में पड़ने वाले सभी थानों को महीना देते हैं। जिसके बाद इन बसों को रोकने व टोकने वाला नहीं होता है।

न रिफ्लेक्टर, न अच्छे टायर

ज्यादातर बसों में तो रिफ्लेक्टर तक नहीं दिखे। रिफ्लेक्टर न होने के कारण दिन में हादसे की गुंजाइश भले ही कम हो लेकिन रात में यह डग्गामार बसें भगवान भरोसे हैं। आश्चर्य की बात तो यह है ज्यादातर बसों में खत्साहाल टायर का प्रयोग किया जा रहा है।

परमिट का कर रहे दुरुपयोग

जिले में करीब 380 प्राइवेट बसे हैं। इनमें कई के पास परमिट है तथा कई बुकिंग पर चलती है। प्राइवेट बसें नियमानुसार बुकिंग पर जा सकती है लेकिन फुटकर में जगह-जगह से सवारियां नहीं ढो सकती। प्राइवेट बस मालिक परमिट तो बनवा लेता है लेकिन इसी परमिट की आड़ में वह डग्गामारी करता है। दिल्ली व जयपुर रूट पर सबसे ज्यादा बसें हैं। चूंकि इस रूट पर ज्यादा मुनाफा होता है।

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वर्जन

- फायर विभाग को सुबह जल्दी सूचना मिली कि चौपुला पर बस में आग लगी है। तुरंत टीम मौके पर पहुंची और आग पर काबू पा लिया गया। ड्राइवर और कंडक्टर भाग गए। सभी पैसेंजर्स सुरक्षित हैं। बस की वायरिंग ही जली थी।

सोमदत्त सोनकर, एफएसओ


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