यौन शोषण मामला तरुण तेजपाल के ख़िलाफ़ एफ़आईआर

2013-11-22T16:51:31Z

गोवा पुलिस ने तहलका के संपादक तरुण तेजपाल के ख़िलाफ़ एफ़आईआर दर्ज कर ली है

गोवा पुलिस के उप महानिरीक्षक ओपी मिश्रा ने समाचार एजेंसी पीटीआई को बताया कि एफ़आईआर दर्ज कर ली गई है. जबकि पुलिस महानिदेशक किशन कुमार ने कहा कि अपराध शाखा आगे की जांच के लिए अधिकारियों के एक दल को दिल्ली भेज सकती है.

डीआईजी ने कहा, "हम सभी तथ्यों की जांच करेंगे. अगर पीड़ित लड़की की शिकायत में पुष्टि हो गई तो हम उनके ख़िलाफ़ बलात्कार का मामला दर्ज करेंगे."

मिश्रा ने कहा कि होटल से सीसीटीवी फ़ुटेज कल (गुरुवार) शाम मिल गई है और उसे सुरक्षित रख लिया गया है. उन्होंने कहा कि मामले के बारे में ज़्यादा जानकारी वीडियो फ़ुटेज को देखने के बाद ही मिल सकेगी.

पुलिस पहले ही ईमेल कर तहलका प्रबंधन से पीड़िता की ईमेल और तेजपाल के बयान की मांग कर चुकी है.

'सहयोग करेंगे तरुण'

तहलका पत्रिका ने एक महिला पत्रकार के साथ संस्थापक संपादक तरुण तेजपाल के कथित यौन दुर्व्यवहार के मामले की जांच के लिए एक समिति गठित की है.

तहलका की प्रबंध संपादक शोमा चौधरी ने शुक्रवार को बताया कि विशाखा दिशानिर्देशों के अनुरूप औपचारिक तौर पर एक शिकायत समिति बनाई गई है जिसकी अध्यक्षता जानी मानी महिला अधिकार कार्यकर्ता और प्रकाशक उर्वशी बुटालिया करेंगी.

शोमा चौधरी ने कहा, "इस मामले में महिला पत्रकार की सभी मांगें मानी जा रही हैं. वो चाहती थीं कि संस्थान इस मामले में कार्रवाई करे. हमने ऐसा किया. लेकिन यह मामला लीक हो गया और उसी आधार पर मीडिया इस बारे में अपनी कहानी बना रहा है. तीन दिन में बिना शर्त माफी मांगी जा चुकी है, तरुण अपने पद से हट गए हैं और मामले की जांच के लिए समिति गठित कर दी गई है."

उन्होंने कहा, "तरुण समिति के साथ पूरा सहयोग करेंगे. इस बात में कोई सच्चाई नहीं है कि वो देश से भाग चुके हैं."

इस बीच भारतीय जनता पार्टी ने जानना चाहा है कि कहीं शिकायतकर्ता पर मामला दर्ज नहीं कराने के लिए दबाव तो नहीं बनाया जाएगा क्योंकि तहलका के संपादक के कांग्रेस से संबंध हैं.

कार्रवाई की मांग

के वरिष्ठ नेता अरुण जेटली ने कहा कि इस मामले में भारतीय मीडिया कसौटी पर है क्योंकि तेजपाल के ख़िलाफ़ उस अपराध के लिए कोई क़ानूनी कार्रवाई शुरू नहीं की गई है जो संशोधित क़ानून के तहत बलात्कार है.

उन्होंने अपने ब्लॉग में लिखा है, "संसद ने बलात्कार की परिभाषा को संशोधित करते हुए जो नई परिस्थितियां जोड़ी हैं उसके आधार पर पीड़ित के ई मेल से को मामला दर्ज करने के लिए पर्याप्त आधार माना जा सकता है. लेकिन अभी तक इस मामले को दर्ज क्यों नहीं किया गया है? क्या पीड़ित महिला पर मामला दर्ज न करवाने का दबाव है?"

वो आगे लिखते हैं, "किसी व्यक्ति के पश्चाताप स्वरूप छह महीने के लिए दफ्तर से दूर हो जाने से कैसे उसका अपराध कम हो जाता है? और ये कैसे हो सकता है कि तरुण तेजपाल और शोमा चौधरी एक निजी सहमति के तहत बलात्कार के मामले को क़ानूनी प्रक्रिया तक न पहुंचने दें. शोमा चौधरी पुख्ता तौर पर ये कैसे कह सकती हैं कि पीड़ित महिला पुलिस के सामने नहीं जाएगी? क्या वो बलात्कार के इस मामले में सबूत के साथ छेड़छाड़ करने की दोषी नहीं हैं जहां वो अपने स्टाफ़ पर तथ्य छुपा लेने के लिए दबाव डाल रही हैं."

बीजेपी नेता अरुण जेटली ने तहलका यौन शोषण मामले पर अपने ब्लॉग में कई सवाल उठाए हैं.

अरुण जेटली ने कहा है, "दिल्ली में सामूहिक मामले के बाद नागरिकों के आंदोलन की शिकायत यही थी कि यौन हमलों की ख़बरों को प्रमुखता नहीं दी जाती हैं. क्या इस मामले में भी यही हो रहा है?"

प्रेस क्लब ऑफ़ इंडिया ने भी एक बयान में मांग की है कि क़ानून को इस मामले में स्वतः संज्ञान लेते हुए अपना काम करना चाहिए चाहे महिला पत्रकार पुलिस में शिकायत दर्ज करे या नहीं.

घटना

सीपीआई एमएल के नेता दीपांकर भट्टाचार्या ने ट्वीट किया है कि अगर गोवा सरकार स्वतः संज्ञान लेते हुए इस मामले की जांच करने को तैयार है तो फिर गुजरात सरकार को महिला जासूसी मामले में ऐसा करने से कौन रोक रहा है.

ये मामला तहलका पत्रिका के इसी महीने गोवा में हुए एक कार्यक्रम के दौरान हुआ है जिसमें दुनिया भर से बड़ी हस्तियां पहुंची थीं.

गोवा सरकार ने इस मामले में अपनी ओर से शुरुआती जाँच कराने का आदेश दिया है.

तरुण तेजपाल ने कथित यौन दुर्व्यवहार के बाद पद से छह महीने के लिए हटने का फ़ैसला किया था. साथ ही उन्होंने इसके लिए उस सहकर्मी से माफ़ी माँगने की भी बात कही है.

 


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