ओवर स्पीड से हो रहे हादसे स्पीडोमीटर पड़े हैं खराब

2019-07-17T06:00:07Z

- रोडवेज की बसों में खराब पड़े हैं स्पीडोमीटर

- ड्राइवर को नहीं पता लगती बस की स्पीड

- सिर्फ नई बसों में ही चल रहे हैं स्पीडोमीटर

- आज तक कभी स्पीडोमीटर नहीं किए गए ठीक

LUCKNOW: ओवर स्पीड के चलते रोडवेज की बसें एक के बाद एक दुर्घटना का शिकार हो रही हैं। इसके बावजूद इन बसों में लगे स्पीडोमीटर काम नहीं कर रहे हैं। सफर के दौरान ड्राइवर्स को पता ही नहीं चलता है कि वह कितनी स्पीड में बस चला रहे हैं। इसको लेकर उन्होंने कई बार कंप्लेंट भी की, लेकिन इसमें बदलाव नहीं किया गया। अधिकारियों की लापरवाही का आलम यह है कि बसों में स्पीडोमीटर खराब होने के बाद कभी ठीक ही नहीं किए गए और बसों को फिटनेस देकर रोड पर भेज दिया जाता है। वहीं अधिकारियों का कहना है कि इसके लेकर जांच के आदेश दे दिये गये हैं।

पता नहीं लग पाती स्पीड

निगम के अधिकारियों के अनुसार रोडवेज बसों से होने वाली अधिकांश दुर्घटनाएं ओवरस्पीडिंग के कारण हुई। रोड खाली मिलने पर ड्राइवर बसों को भगाना शुरू कर देते हैं। उन्हें इसका अहसास ही नहीं होता है कि उनकी बस किस स्पीड से चलती है। ड्राइवर अधिक से अधिक किमी कम समय में पूरा करने के लिए ऐसा करते हैं।

आज तक नहीं बदली गई एक भी स्पीडोमीटर की सुई

रोडवेज की 8000 बसों में से 6000 से अधिक बसों के स्पीडोमीटर खराब हैं। ऐसा ही हाल रोडवेज की अनुबंधित बसों का भी है। 3000 से अधिक अनुबंधित बसें रोडवेज के बस बेड़े में शामिल हैं। रोडवेज की साधारण बस सेवा हो या फिर वातानुकूलित अधिकांश बसों में स्पीडोमीटर खराब होने के बाद कभी ठीक हीं नहीं किए गए। नई बसों का स्पीडोमीटर खराब होने के बाद उसे ठीक नहीं कराया जाता है। कई बसों में स्पीडोमीटर ही गायब हो चुके हैं। उनकी जगह पर सुराख ही बचे हैं। मुख्यालय से रखी जाती है नजर

इसको लेकर जब रोडवेज के अधिकारियों से बात की गई तो उनका कहना है कि सभी बसों में एसएलडी (स्पीड लिमिटिंग डिवाइस) लगे हैं। साथ ही परिवहन निगम में बने कंट्रोल रूप से इस पर नजर रखी जाती है। वह कुछ दिन पहले यमुना एक्सप्रेस वे से झरना नाले में गिरी बस की डिटेल कंट्रोल रूम के पास नहीं थी। प्रमुख सचिव परिवहन आराधना शुक्ला ने इसकी पुष्टि की थी। उन्होंने बताया था कि दुर्घटनाग्रस्त बस की डिटेल एक जुलाई से सात जुलाई तक कंट्रोल रूम के पास नहीं है। इसी बस में मौजूद एक यात्री ने बीते सोमवार को स्पष्ट किया था कि दुर्घटना की मुख्य वजह ओवर स्पीडिंग थी। सड़क सुरक्षा सेल के अधिकारियों के अनुसार दुर्घटनाओं की मुख्य वजह ओवर स्पीडिंग है।

अधिकतम स्पीड 100 निर्धारित

यूपी के अंदर हर साल 6000 से अधिक दुर्घटनाएं ओवर स्पीड के कारण होती हैं। इनमें 7000 से अधिक लोग दुर्घटना के समय मौत के मुंह में समा जाते हैं। ओवर स्पीड को रोकने के लिए ही देश में अधिकतम स्पीड 100 निर्धारित की गई है। रिहायशी इलाकों में 20 से अधिक स्पीड में वाहन नहीं चला सकते हैं।

तुरंत कम करेंगे स्पीड

रोडवेज के सीनियर अधिकारियों के अनुसार यदि बसों में स्पीडोमीटर ठीक हों तो दुर्घटनाओं पर लगाम लगाई जा सकती है। ड्राइविंग के दौरान बस के ड्राइवर जब स्पीडोमीटर देखेगा तो अपनी स्पीड कम कर लेगा। बस की गति नियंत्रण में आने के बाद दुर्घटना की संभावना बेहद कम हो जाएगी।

कोट

प्रदेश भर की सभी डिपो के अधिकारियों से जानकारी मांगी गई है कि उनके यहां कितनी बसों में स्पीडोमीटर खराब पड़े हैं। रोडवेज की सभी बसों के स्पीडोमीटर की जांच की जाएगी। इसके लिए आदेश जारी किए जा चुके हैं। अब तक इन पर कोई ध्यान नहीं दिया जाता था।

जयदीप वर्मा

मुख्य प्रधान प्रबंधक तकनीकी

परिवहन निगम

कोट

इसकी जांच कराई जाएगी। स्पीडोमीटर ठीक कराए जाएंगे।

डॉ। राजशेखर

एमडी, परिवहन निगम


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