पीयूसी में नहीं होगा फर्जीवाड़ा

2019-02-27T06:00:50Z

67 अधिकृत सेंटर जांच के लिए हैं रजिस्टर्ड, 57000 वाहन मेरठ में रजिस्टर्ड

एनआईसी के एडवांस पोर्टल से जुडें़गे प्रदूषण सेंटर

पोर्टल से पुष्टि के बाद आवेदक को जारी होगा पीयूसी

Meerut। जनपद में प्रदूषण जांच के नाम पर नकली सर्टिफिकेट देकर फर्जीवाड़ा करने वाले सेंटरों पर लगाम कसने के लिए अब परिवहन विभाग ने प्रदूषण सेंटर्स को एनआईसी के एडवांस पोर्टल से जोड़ने की योजना बनाई है। इसके बाद प्रदूषण सेंटर से जारी होने वाले सभी पीयूसी यानि पॉल्यूशन अंडर कंट्रोल सर्टिफिकेट की जांच के बाद पोर्टल से जारी किया जाएगा। यदि आपकी गाड़ी प्रदूषण कर रही है तो पोर्टल पीयूसी रिजेक्ट कर देगा। हालांकि अभी यह व्यवस्था मुख्यालय स्तर पर ट्रॉयल तक सीमित है, जल्द इसे पूरे प्रदेश में लागू किया जाएगा।

फर्जी केंद्रों की भरमार

परिवहन विभाग के आंकड़ों पर नजर डालें तो मेरठ जनपद में करीब 67 अधिकृत सेंटर प्रदूषण जांच के लिए मानक अनुसार रजिस्टर्ड हैं। अधिकतर सेंटर्स का संचालन पेट्रोल पंप पर किया जा रहा है, लेकिन हकीकत में प्रदूषण जांच के नाम पर शहर के गली मोहल्लों से लेकर गांव देहात में सैकड़ों सेंटर खुले हुए हैं जो पीयूसी जारी कर रहे हैं। अब इस योजना के लागू होने से केवल रजिस्टर्ड सेंटर को पोर्टल से जोड़ा जाएगा।

ऑनलाइन होगी जांच

दरअसल अधिकतर फर्जी सेंटर्स पर बाइक या गाड़ी कंडीशन के हिसाब से पहले से ही औसत प्रदूषण स्तर के सर्टिफिकेट तैयार करके रख लिए जाते हैं। गाड़ी की हालत देखकर मॉडल कंप्यूटर में फीड कर कंप्यूटरीकृत सर्टिफिकेट वाहन मालिक को दे दिया जाता है। लेकिन पोर्टल से लिंक होने के बाद ऐसा नही होगा। पोर्टल पर लाइव गाड़ी की फोटो व पॉल्यूशन स्तर फीड होगा। अगर आपकी गाड़ी या बाइक अधिक धुआं दे रही है तो सर्टिफिकेट रिजेक्ट हो जाएगा। जो पॉल्यूशन सर्टिफिकेट मिलेगा उसकी चेकिंग के दौरान ऑनलाइन जांच कर पुष्टि की जा सकेगी।

ये हैं मानक

जांच केंद्र संचालक के पास रजिस्ट्रेशन नंबर होना चाहिए

सेंटर पर पॉल्यूशन जांच के लिए स्मोक मीटर लगा होना चाहिए

स्मोक मीटर को गाड़ी या बाइक के साइलेंसर पर लगाकर जांच होनी चाहिए

जांचकर्ता के पास इलैक्ट्रोनिक का डिप्लोमा होना चाहिए

कम से कम 10 से 12 गज की जगह होनी चाहिए

डिजीटल कैमरा और कंप्यूटर होना चाहिए

कई अनाधिकृत सेंटर्स बिना जांच के प्रदूषण सर्टिफिकेट जारी कर रहे हैं। इस योजना से ऐसे सेंटर और प्रदूषण फैलाने वाली गाडि़यों के संचालन पर रोक लगेगी। अभी लखनऊ में इस योजना का ट्रायल किया जा रहा है। जल्द सभी जनपदों में लागू होगी।

ओपी सिंह, आरटीओ


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